आगरा: 26 साल में उपाधि नहीं दे सका विवि, शोधार्थी का हो गया निधन, अब कोर्ट ने लगाया दो लाख का जुर्माना
आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से आवास विकास के आनंद शंकर शर्मा ने वर्ष 1990 में शोध कार्य किया था, लेकिन 26 साल बाद भी विश्वविद्यालय उनको उपाधि नहीं दे सका। इस दौरान उनकी मौत हो गई। अब तक लोक अदालत ने विश्वविद्यालय पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही जांच के आदेश दिए हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से शोध कार्य करने के 26 साल बाद भी आनंद शंकर शर्मा को उपाधि नहीं दी गई। उन्होंने अपना हक पाने के लिए लोक अदालत में प्रार्थना पत्र दिया। मुकदमे के दौरान उनकी मौत हो गई। अब स्थायी लोक अदालत ने विश्वविद्यालय को दो लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने के आदेश दिए हैं।
आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर आठ निवासी आनंद शंकर शर्मा ने वर्ष 2018 में स्थायी लोक अदालत में मुकदमा प्रस्तुत किया था। जिसमें कहा कि उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय आगरा (डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय) से इतिहास में एमए किया था। डॉ. प्रतिमा अस्थाना के निर्देशन में शोध कार्य किया। इसका विषय वृंदावन के वैष्णव संप्रदायों का इतिहास था।
1990 में पूरा किया शोध कार्य
उन्होंने अपना शोध कार्य 1990 में पूर्ण कर लिया। वर्ष 1991 में उसकी मौखिक परीक्षा भी संपन्न हो गई। उपाधि के लिए शुल्क भी जमा कराया। 21 दिसंबर 1995 में विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की बैठक में शोध उपाधि से अलंकृत करने की संस्तुति की गई। इसके बावजूद शोध उपाधि नहीं दी गई। सात जनवरी 2017 को विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कुलसचिव के नाम विधिक नोटिस भी प्रेषित किया, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया।
आनंद शंकर ने मुकदमे में कहा था कि यदि विश्वविद्यालय समय पर उपाधि प्रदान कर देता तो वह किसी महाविद्यालय में नौकरी प्राप्त कर लेते। मुकदमे के दौरान आनंद शंकर शर्मा की मृत्यु हो गई। वादी की ओर से पैरवी अधिवक्ता लक्ष्मी चंद बंसल ने की।
विश्वविद्यालय की ओर से कोई जवाब नहीं आया। स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष गोपाल कुलश्रेष्ठ, सदस्य नेत्रपाल सिंह और सोनाली सिंह राठौर ने वादी की पत्नी संगीता शर्मा को दो लाख रुपये मय छह प्रतिशत मय ब्याज 60 दिन के अंदर अदा करने के आदेश किए। वहीं जांच कराने के आदेश किए।
आदेश का अनुपालन कराएंगे
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. आलोक राय ने बताया कि डिग्री 26 साल तक क्यों लंबित रही, इस संबंध में जानकारी की जाएगी। कोर्ट ने जो भी आदेश दिया है, उसका अनुपालन कराया जाएगा।