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विश्वविद्यालय: पीएचडी में 11 वर्ष पहले प्रवेश, अब तक 69 का वायवा नहीं हुआ
Mon, 28 Dec 2020 12:06 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 28 Dec 2020 12:06 AM IST
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में वर्ष 2009 में पीएचडी में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों का अभी तक वायवा नहीं हो पाया है। विभिन्न संकायों के कुल 69 वायवा लंबित हैं। इसमें से अधिकतर वर्ष 2009 में प्रवेश लेने वाले हैं, कुछ प्रवेश 2014 के भी हैं। पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन पर ध्यान नहीं दिया और अब शोध पर्यवेक्षक कम रुचि दिखा रहे हैं।
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विश्वविद्यालय में लंबित 69 प्रकरण में से कला संकाय में सर्वाधिक 39 वायवा लंबित हैं। इसमें से अंग्रेजी के आठ, संस्कृत के तीन, हिंदी के आठ, भूगोल के पांच, इतिहास के तीन, समाजशास्त्र के दो, मनोविज्ञान के तीन, राजनीतिशास्त्र के चार, अर्थशास्त्र के तीन शोधार्थियों का वायवा होना है।
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वाणिज्य संकाय के विभिन्न पाठ्यक्रमों के 11, प्रबंधन संकाय के तीन, शिक्षा संकाय में दो, ललित कला संकाय में एक, कृषि संकाय में एक, विधि संकाय में एक, विज्ञान संकाय में आठ, लाइफ साइंस में तीन प्रकरण लंबित हैं।
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डीन रिसर्च प्रो. अजय तनेजा ने बताया कि शोधार्थियों का वायवा कराने के लिए संबंधित पर्यवेक्षकों को पत्र भेजा गया था। उनको वाह्य परीक्षकों के साथ बात करके वायवा का समय निश्चित करना था, कम पर्यवेक्षकों ने इस दिशा में प्रयास किया। इस पर रिमाइंडर भी भेज दिया गया है।
पीएचडी व एमफिल के 25 वायवा हुए ऑनलाइन
डीन रिसर्च ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से पीएचडी व एमफिल के लंबित 25 वायवा ऑनलाइन माध्यम से कराए जा चुके हैं। इसमें भी पीएचडी के अधिकतर मामले वर्ष 2009 में प्रवेश लेने वाले शोधार्थियों के थे। लंबित प्रकरणों का निस्तारण जल्द से जल्द किए जाने का प्रयास किया जा रहा है। ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन भी वायवा देने का विकल्प दिया जा रहा है। ऑनलाइन माध्यम से भी अब तक का अनुभव अच्छा रहा है।
पीएचडी व एमफिल के 25 वायवा हुए ऑनलाइन
डीन रिसर्च ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से पीएचडी व एमफिल के लंबित 25 वायवा ऑनलाइन माध्यम से कराए जा चुके हैं। इसमें भी पीएचडी के अधिकतर मामले वर्ष 2009 में प्रवेश लेने वाले शोधार्थियों के थे। लंबित प्रकरणों का निस्तारण जल्द से जल्द किए जाने का प्रयास किया जा रहा है। ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन भी वायवा देने का विकल्प दिया जा रहा है। ऑनलाइन माध्यम से भी अब तक का अनुभव अच्छा रहा है।