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बार-बार जुकाम होना: बड़ी बीमारी का संकेत, चिकित्सकों ने किया आगाह; छिन सकती है सुनने की क्षमता
Sun, 06 Sep 2026 10:44 AM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Sun, 06 Sep 2026 10:44 AM IST
सार
बार-बार जुकाम को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। कान का पर्दा खराब होने की नाैबत आ सकती है। इसको लेकर कार्यशाला में चिकित्सकों ने आगाह किया है।
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सिजीकाॅन में माैजूद चिकित्सक।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
बार-बार जुकाम-खांसी से कान पर भी असर पड़ रहा है। इससे सूजन, दर्द के साथ संक्रमण भी हो रहा है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति से ऊंचा सुनने की परेशानी हो रही है। मर्ज बढ़ने पर कान का पर्दा भी खराब होने का खतरा रहता है। ऐसे में कॉक्लियर इम्प्लांट करने की जरूरत पड़ती है। फतेहाबाद रोड स्थित होटल में सिजीकॉन-2026 में डॉक्टरों ने बीमारी और बचाव पर व्याख्यान दिए।
जयपुर से आए लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. डीएम वेंकटेश ने बताया कि बार-बार जुकाम-खांसी से नाक और गले का बलगम यूस्टेशियन ट्यूब बंद होने लगता है। इससे कान में दबाव पड़ता है। सूजन और दर्द से मरीज को परेशानी होती है। ऐसे ही कान के पर्दे के पीछे मवाद पड़ने से ओटिटिस मीडिया (मध्य कान का संक्रमण) की परेशानी बनने लगती है। इससे सुनने की क्षमता प्रभावित होती है, ऊंचा सुनाई देता है। अधिकांश ये बच्चों में परेशानी मिल रही है। कार्यशाला में राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. माधुरी गोरे, डॉ. रश्मि अग्रवाल, डॉ. गौरव गुप्ता, डॉ. नरेश पांडा, डॉ. रजत कपूर, डॉ. अरविंद गुप्ता आदि ने भी व्याख्यान दिए।
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जयपुर से आए लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. डीएम वेंकटेश ने बताया कि बार-बार जुकाम-खांसी से नाक और गले का बलगम यूस्टेशियन ट्यूब बंद होने लगता है। इससे कान में दबाव पड़ता है। सूजन और दर्द से मरीज को परेशानी होती है। ऐसे ही कान के पर्दे के पीछे मवाद पड़ने से ओटिटिस मीडिया (मध्य कान का संक्रमण) की परेशानी बनने लगती है। इससे सुनने की क्षमता प्रभावित होती है, ऊंचा सुनाई देता है। अधिकांश ये बच्चों में परेशानी मिल रही है। कार्यशाला में राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. माधुरी गोरे, डॉ. रश्मि अग्रवाल, डॉ. गौरव गुप्ता, डॉ. नरेश पांडा, डॉ. रजत कपूर, डॉ. अरविंद गुप्ता आदि ने भी व्याख्यान दिए।
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ऑपरेशन के बाद बोल और सुनने लगे
आईएएस मनीराम शर्मा ने बताया कि वह 100 प्रतिशत बहरेपन की बीमारी से जूझ रहे थे। कॉक्लियर इम्प्लांट के बाद स्पीच थेरेपी से वह बोल और सुन सकते हैं। ऐसे ही कई बच्चे भी कार्यशाला में आए, जो जन्मजात मूक-बधिर थे। इन्होंने सर्जरी के बाद के अपने अनुभव साझा किए। आयोजन अध्यक्ष डॉ. राजीव पचौरी, कोषाध्यक्ष डॉ. गौरव खंडेलवाल ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कॉक्लियर इम्प्लांट (ऑपरेशन) निशुल्क हो रहे हैं, आगरा में भी ये सुविधा उपलब्ध है।
आईएएस मनीराम शर्मा ने बताया कि वह 100 प्रतिशत बहरेपन की बीमारी से जूझ रहे थे। कॉक्लियर इम्प्लांट के बाद स्पीच थेरेपी से वह बोल और सुन सकते हैं। ऐसे ही कई बच्चे भी कार्यशाला में आए, जो जन्मजात मूक-बधिर थे। इन्होंने सर्जरी के बाद के अपने अनुभव साझा किए। आयोजन अध्यक्ष डॉ. राजीव पचौरी, कोषाध्यक्ष डॉ. गौरव खंडेलवाल ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कॉक्लियर इम्प्लांट (ऑपरेशन) निशुल्क हो रहे हैं, आगरा में भी ये सुविधा उपलब्ध है।