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चिंताजनक: दूध भाता नहीं...धूप में खेलते नहीं, छोटी उम्र में बड़ी बीमारी; पढ़ें बच्चों की सेहत पर डॉक्टर की राय

Thu, 12 Oct 2023 03:32 PM IST
भूपेन्द्र सिंह धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला, आगरा
धर्मेंद्र त्यागी, अमर उजाला, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Thu, 12 Oct 2023 03:32 PM IST
सार

आजकल बच्चों में छोटी उम्र में गठिया का खतरा बन रहा है। इसका एक कारण दूध नहीं पीना और धूप में बाहर नहीं निकलना भी है। आगे पढ़ें और जानें कि इस पर डॉक्टर का क्या कहना है। 

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Doctor advice on foot pain in children and risk of arthritis in future
गठिया (सांकेतिक) - फोटो : Pixabay

विस्तार

अच्छे बच्चे धूप में नहीं खेलते...,मेरे बच्चों को तो दूध भाता ही नहीं। ये कहते हुए अक्सर महिलाएं सुनी जा सकती हैं। इससे 8.7 फीसदी बच्चों में कैल्शियम और विटामिन डी की कमी मिल रही है। नतीजतन छोटी उम्र में पैरों में दर्द और भविष्य में गठिया होने का खतरा तीन गुना अधिक है।

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ताजनगरी आगरा में इंडियन रुमेटोलॉजी एसोसिएशन की सदस्य और डॉ. अंजना पांडेय ने बताया कि स्वस्थ हड्डियों के लिए 1000-1500 मिलीग्राम कैल्शियम जरूरी है। 8 से 14 साल तक के 2247 बच्चों की जांच में 8.7 फीसदी में 800 मिलीग्राम से कम कैल्शियम मिला। ये डॉक्टरों के पास थोड़ी भागदौड़ करने पर मांसपेशी-पैरों में दर्द, घुटना अंदर-बाहरी ओर झुका होना, रात में पैरों में दर्द होने की शिकायत लेकर आए। 
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पूछताछ में परिजन ने बताया कि दूध का नाम लेते ही नाक-भौं सिकोड़ता है। बीमार न पड़ जाए, इसलिए धूप में खेलने से टोकते हैं। दर्द होने पर कैल्शियम की दवा भी दी, लेकिन ज्यादा आराम नहीं मिला। ऐसे बच्चों की हड्डियां लचीली मिलीं। भविष्य में 40-45 साल की उम्र से ही गठिया की परेशानी होने का खतरा रहता है।

40-45 साल के 23 फीसदी गठिया के मरीज

आगरा आर्थोपेडिक सोसाइटी के संयुक्त सचिव डॉ. अनुपम गुप्ता ने बताया कि चलना-फिरना कम होना, खेलकूद गतिविधियां कम होने और अधिक समय तक बैठकर कार्य करने से गठिया की परेशानी 10 साल पहले ही दस्तक दे रही है। गठिया मरीजों में 40-45 साल के 23 फीसदी मिल रहे हैं। दवाओं के साथ इनको योग, पैदल चलना, धूप सेंकने समेत अन्य सुझावों से आराम मिला।

खारे पानी-प्रदूषण से भी बढ़ा हड्डियों की मर्ज

आगरा आर्थोपेडिक सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. अरुण कपूर ने बताया कि घुटनों की बीमारियों के लिए प्रदूषण, खारा पानी, फास्ट फूड भी बड़ी वजह बनता जा रहा है। इसका असर हड्डियों पर पड़ रहा है, इससे इनमें कमजोरी बढ़ रही है। इससे किशोरों-युवाओं की बार-बार हड्डियां टूटने, पैरों में लचक, सूजन की दिक्कत मिल रही है। खानपान-जीवन शैली सुधारने से काफी राहत मिलती है।

डॉक्टरों के सुझाव

  • रोजाना 3-5 किमी पैदल चलने की आदत डालें
  • घंटे भर बैठने के बाद थोड़ा टहलें। सुबह नियमित धूप लें
  • दूध न पीएं तो दही, पनीर समेत दूध से बनी सामग्री खाएं
  • योग, व्यायाम करें, वजन कम करें। फास्ट फूड से बचें
  • बच्चों को खेलकूद पर जोर दें, हल्की धूप में भी खेलने दें
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