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UP: स्कूलों की किताबों में कमीशनखोरी, DM ने मांगी थी सात दिन में रिपोर्ट, दो महीने बाद भी फाइलों में कैद जांच
Mon, 06 Jul 2026 09:55 AM IST
Dhirendra Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 06 Jul 2026 09:55 AM IST
सार
निजी स्कूलों में महंगी किताबें अनिवार्य कराने की शिकायतों पर जिलाधिकारी ने सात दिन में जांच रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन दो महीने बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी है, जिससे कार्रवाई और जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं।
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किताबें महंगी हुई
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विस्तार
आगरा के निजी विद्यालयों में किताबों के नाम पर कथित कमीशनखोरी की शिकायतों की जांच पूरी नहीं हो सकी है। जिलाधिकारी ने 6 मई को बेसिक शिक्षा विभाग को निर्देश दिए थे कि मामले की जांच कर सात दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। दो महीने बीतने के बाद भी जांच रिपोर्ट तैयार नहीं हो सकी है।
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डीएम मनीष बंसल के आदेश के बाद बीएसए ने खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) की टीम गठित कर निजी विद्यालयों की पुस्तक सूची, प्रकाशकों और अन्य संबंधित दस्तावेज की जांच शुरू कराई थी। शिकायत थी कि कई विद्यालय एनसीईआरटी के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें अनिवार्य कर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। जांच टीम के गठन के बाद भी रिपोर्ट तैयार नहीं हो सकी है। ऐसे में न तो किसी विद्यालय की जवाबदेही तय हुई है और न ही कथित अनियमितताओं पर कोई कार्रवाई सामने आई है।
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टीम पापा संस्थापक मनोज शर्मा का कहना है कि जिलाधिकारी ने सात दिन में जांच रिपोर्ट मांगी थी लेकिन दो महीने बाद भी रिपोर्ट सामने नहीं आई है। जांच में हो रही देरी से अभिभावकों का भरोसा कमजोर हो रहा है। यदि कहीं अनियमितता हुई है तो दोषी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं बीएसए डॉ. राकेश सिंह ने बताया कि रिपोर्ट तैयार हो चुकी है लेकिन कुछ बिंदु पर जांच पूरी नहीं हुई। जल्द रिपोर्ट पूरी होने पर जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी।
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डीएम मनीष बंसल के आदेश के बाद बीएसए ने खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) की टीम गठित कर निजी विद्यालयों की पुस्तक सूची, प्रकाशकों और अन्य संबंधित दस्तावेज की जांच शुरू कराई थी। शिकायत थी कि कई विद्यालय एनसीईआरटी के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें अनिवार्य कर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। जांच टीम के गठन के बाद भी रिपोर्ट तैयार नहीं हो सकी है। ऐसे में न तो किसी विद्यालय की जवाबदेही तय हुई है और न ही कथित अनियमितताओं पर कोई कार्रवाई सामने आई है।
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टीम पापा संस्थापक मनोज शर्मा का कहना है कि जिलाधिकारी ने सात दिन में जांच रिपोर्ट मांगी थी लेकिन दो महीने बाद भी रिपोर्ट सामने नहीं आई है। जांच में हो रही देरी से अभिभावकों का भरोसा कमजोर हो रहा है। यदि कहीं अनियमितता हुई है तो दोषी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं बीएसए डॉ. राकेश सिंह ने बताया कि रिपोर्ट तैयार हो चुकी है लेकिन कुछ बिंदु पर जांच पूरी नहीं हुई। जल्द रिपोर्ट पूरी होने पर जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी।
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