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Diwali 2019: आतिशबाजी के धुएं में कहीं गुम न हो जाएं दिवाली की खुशियां, यह बरतें सावधानी
Sun, 27 Oct 2019 11:43 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 27 Oct 2019 11:43 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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दीपावली रोशनी, खुशी और उल्लास का पर्व है। इस पावन पर्व की खुशियां के शोर को पटाखों की धमाकों से कम न होने दें। खासकर बच्चे पटाखे चलाने की जिद कर रहें तो उनको तेज आवाज वाले पटाखे न चलवाएं। इससे उनके कानों के पर्दे और नस को नुकसान पहुंच सकता है। हाथ जलने और आंखों में चोट का भी खतरा अधिक रहता है। उन्हें चलाने के लिए रोशनी वाले पटाखे ही दें।
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. आलोक मित्तल का कहना है कि दिवाली पर तेज आवाज से 150 हर्टज आवाज से अधिक का शोर कानों के लिए नुकसानदेह है। 200 हर्टज की आवाज होने पर कान का पर्दा और नस फट सकती हैं। बच्चों को तेज आवाज वाले पटाखे चलाने के लिए कतई न दें। उन्हें फुलझड़ी, चकरी ही चलवाएं। जहां पटाखे चलें उससे दूरी पर रहें।
चश्मा पहनकर चलाएं पटाखे: डॉ. आनंद उपाध्याय
जिला अस्पताल के नेत्र सर्जन डॉ. आनंद उपाध्याय ने बताया कि पटाखे चश्मा पहनकर चलाएं। आंख में पटाखों का कचरा या चोट लगने पर उसे रगड़े नहीं और ना ही हाथों से दबाएं। घर में पहले से ही एंटीबायोटिक ऑइंटमेंट खरीद लें और आंख में उसका प्रयोग करें। आंखों में जलन हो तो साफ पानी से धो सकते हैं।
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ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. आलोक मित्तल का कहना है कि दिवाली पर तेज आवाज से 150 हर्टज आवाज से अधिक का शोर कानों के लिए नुकसानदेह है। 200 हर्टज की आवाज होने पर कान का पर्दा और नस फट सकती हैं। बच्चों को तेज आवाज वाले पटाखे चलाने के लिए कतई न दें। उन्हें फुलझड़ी, चकरी ही चलवाएं। जहां पटाखे चलें उससे दूरी पर रहें।
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चश्मा पहनकर चलाएं पटाखे: डॉ. आनंद उपाध्याय
जिला अस्पताल के नेत्र सर्जन डॉ. आनंद उपाध्याय ने बताया कि पटाखे चश्मा पहनकर चलाएं। आंख में पटाखों का कचरा या चोट लगने पर उसे रगड़े नहीं और ना ही हाथों से दबाएं। घर में पहले से ही एंटीबायोटिक ऑइंटमेंट खरीद लें और आंख में उसका प्रयोग करें। आंखों में जलन हो तो साफ पानी से धो सकते हैं।
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जल जाएं तो घाव पर डालें ठंडा पानी: डॉ. यतेंद्र चाहर
एसएन मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. यतेंद्र चाहर ने बताया कि दिवाली में सबसे ज्यादा जलने के मरीज आते हैं, इनमें बच्चों की संख्या अधिक रहती है। पटाखा-फुलझड़ी से जलने पर सबसे पहले दस मिनट तक ठंडा पानी डालें। एंटीसेप्टिक ऑइंटमेंट लगाएं। घाव ज्यादा हो तो चिकित्सक के पास लेकर जाएं।
अस्थमा गंभीर मरीज मास्क लगाएं: डॉ. जीवी सिंह
आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज के वक्ष एवं क्षय रोग के डॉ. जीवी सिंह का कहना है कि पटाखों का धुआं अस्थमा मरीजों की हालत खराब कर सकता है। सलाह यही है कि धुएं से बचें। अगर पटाखा चला भी रहें तो मास्क लगा लें। रुमाल भी लगा सकते हैं। इन्हेलर लेना बंद न करें, चिकित्सकीय परामर्श से इसकी डोज बढ़ाएं।
अस्थमा गंभीर मरीज मास्क लगाएं: डॉ. जीवी सिंह
आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज के वक्ष एवं क्षय रोग के डॉ. जीवी सिंह का कहना है कि पटाखों का धुआं अस्थमा मरीजों की हालत खराब कर सकता है। सलाह यही है कि धुएं से बचें। अगर पटाखा चला भी रहें तो मास्क लगा लें। रुमाल भी लगा सकते हैं। इन्हेलर लेना बंद न करें, चिकित्सकीय परामर्श से इसकी डोज बढ़ाएं।
यह बरतें सावधानी
- अनार चलाते वक्त उसके ऊपर झुककर आग न लगाएं।
- आंखों को तेज रोशनी से बचाने के लिए चश्मा पहनें।
- ढीले-ढाले और सिंथेटिक कपड़े न पहनें
- पटाखा फुस्स होने पर उसे छुएं नहीं, उस पर पानी डाल दें।
- पटाखा चलाते वक्त अभिभावक बच्चों के साथ जरूर रहें।
- आंखों को तेज रोशनी से बचाने के लिए चश्मा पहनें।
- ढीले-ढाले और सिंथेटिक कपड़े न पहनें
- पटाखा फुस्स होने पर उसे छुएं नहीं, उस पर पानी डाल दें।
- पटाखा चलाते वक्त अभिभावक बच्चों के साथ जरूर रहें।