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धनतेरस आज, बाजार सजकर हुए तैयार
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कासगंज में एक बर्तन की दुकान पर खरीदारी करते लोग
- फोटो : KASGANJ
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कासगंज। धनतेरस पर बाजार में धन की बरसात होने की उम्मीद के साथ कारोबारियाें ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। खासकर सराफा, बर्तन, वाहन कारोबारी पर्व को लेकर काफी उत्साहित नजर आ रहे है। इन कारोबारियों ने पर्व को लेकर विशेष तैयारियां की हैं। पांच दिवसीय दीपोत्सव के लिए बाजार में रौनक है। बिजली की सजावट से बाजार चमक रहा है।
सराफा कारोबारियों ने धनतेरस पर्व को विशेष तैयारियां की है। पिछले वर्ष सोने चांदी की कीमतें अधिक होने व कोरोना के चलते कारोबार पर काफी असर पड़ा था, पिछले साल से सोने की कीमतों में 2900 रुपये तोला तथा चांदी की कीमतों में 200 रुपये किलो की गिरावट है। कारोबारियों ने इस बार विदेशी कंपनी एमएमआईसी के सिक्कों को पहली बार मंगाया है। इसके अलावा पुराने व नए चांदी के सिक्के, गिन्नी, लक्ष्मी गणेश की मूर्तियां, चांदी के वर्तन सहित अन्य सामान की व्यवस्था की है।
धनतेरस के मौके पर बर्तन बाजार भी सज कर तैयार हो चुका है। तांबा, पीतल एवं स्टील की धातु के भाव इस बार आसमान पर हैं। पीतल 150 रुपये किलो, स्टील 60 रुपये किलो, तांबा 150 रुपये किलो, एल्यूमीनियम 60 रुपये किलो तक महंगी है। नॉन स्टिक पर भी 30 प्रतिशत तक महंगाई है। लोगों के बीच खरीद का ट्रेंड बदला हुआ है। अब लोगों के बीच इन धातुओं केे बजाय नॉन स्टिक के बर्तन पसंद किए जा रहे हैं। नॉन स्टिक की कढ़ाई, तवा, फ्राइपेन, कुकर आदि मंगाए है।
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वाहन एजेंसियों पर बड़ी संख्या में युवाओं के द्वारा वाहन खरीदने के लिए अपनी बुकिंग भी कराई गई है। युवा स्कूटी, बाइक को खरीदने को प्राथमिकता दे रहे हे। वहीं किसान ट्रैक्टर खरीदने के लिए एजेंसियों पर पहुंचकर जानकारी करते देखे गए।
दीपावली पर्व पर चीनी से बने खिलोने पूजा में प्रयोग होते है। ये खिलाने इन्ही दिनों में बिक्री होते है, जिससे लोगों के बीच यह काफी पसंद किए जाते हैं। बूरा, बताशा आदि के विक्रेताओं ने पर्व को देखते हुए इनका निर्माण शुरू करा दिया है। कारीगर इनको लगातार तैयार कर रहे हैं। इस समय बाजार में खिलोने 60 रुपये किलो बिक रहे हैं।
दीपावली पर्व पर बिकने वाली खीलें भी धान से तैयार करके बाजार में बिक्री को आ चुकी हैं। विक्रेताओं ने जगह-जगह इनके फड़ सजाए है। बाजार में इसकी कीमत इस समय 70 रुपये किलो है। पिछले साल के समान ही इस बार भाव रहने से कारोबारी अच्छे कारोबार की उम्मीद कर रहे है।
पंडित मुकुंद वल्लभ भट्ठ के अनुसार सबसे पहले मिट्टी का हाथी और धन्वंतरि भगवानजी की फोटो स्थापित करें। चांदी या तांबे की आचमनी से जल का आचमन करें। भगवान गणेश का ध्यान और पूजन करें। हाथ में अक्षत-पुष्प लेकर भगवान धन्वंतरि का ध्यान करें। फिर मंत्र का जाप करें।
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सराफा कारोबारियों ने धनतेरस पर्व को विशेष तैयारियां की है। पिछले वर्ष सोने चांदी की कीमतें अधिक होने व कोरोना के चलते कारोबार पर काफी असर पड़ा था, पिछले साल से सोने की कीमतों में 2900 रुपये तोला तथा चांदी की कीमतों में 200 रुपये किलो की गिरावट है। कारोबारियों ने इस बार विदेशी कंपनी एमएमआईसी के सिक्कों को पहली बार मंगाया है। इसके अलावा पुराने व नए चांदी के सिक्के, गिन्नी, लक्ष्मी गणेश की मूर्तियां, चांदी के वर्तन सहित अन्य सामान की व्यवस्था की है।
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धनतेरस के मौके पर बर्तन बाजार भी सज कर तैयार हो चुका है। तांबा, पीतल एवं स्टील की धातु के भाव इस बार आसमान पर हैं। पीतल 150 रुपये किलो, स्टील 60 रुपये किलो, तांबा 150 रुपये किलो, एल्यूमीनियम 60 रुपये किलो तक महंगी है। नॉन स्टिक पर भी 30 प्रतिशत तक महंगाई है। लोगों के बीच खरीद का ट्रेंड बदला हुआ है। अब लोगों के बीच इन धातुओं केे बजाय नॉन स्टिक के बर्तन पसंद किए जा रहे हैं। नॉन स्टिक की कढ़ाई, तवा, फ्राइपेन, कुकर आदि मंगाए है।
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वाहन एजेंसियों पर बड़ी संख्या में युवाओं के द्वारा वाहन खरीदने के लिए अपनी बुकिंग भी कराई गई है। युवा स्कूटी, बाइक को खरीदने को प्राथमिकता दे रहे हे। वहीं किसान ट्रैक्टर खरीदने के लिए एजेंसियों पर पहुंचकर जानकारी करते देखे गए।
दीपावली पर्व पर चीनी से बने खिलोने पूजा में प्रयोग होते है। ये खिलाने इन्ही दिनों में बिक्री होते है, जिससे लोगों के बीच यह काफी पसंद किए जाते हैं। बूरा, बताशा आदि के विक्रेताओं ने पर्व को देखते हुए इनका निर्माण शुरू करा दिया है। कारीगर इनको लगातार तैयार कर रहे हैं। इस समय बाजार में खिलोने 60 रुपये किलो बिक रहे हैं।
दीपावली पर्व पर बिकने वाली खीलें भी धान से तैयार करके बाजार में बिक्री को आ चुकी हैं। विक्रेताओं ने जगह-जगह इनके फड़ सजाए है। बाजार में इसकी कीमत इस समय 70 रुपये किलो है। पिछले साल के समान ही इस बार भाव रहने से कारोबारी अच्छे कारोबार की उम्मीद कर रहे है।
पंडित मुकुंद वल्लभ भट्ठ के अनुसार सबसे पहले मिट्टी का हाथी और धन्वंतरि भगवानजी की फोटो स्थापित करें। चांदी या तांबे की आचमनी से जल का आचमन करें। भगवान गणेश का ध्यान और पूजन करें। हाथ में अक्षत-पुष्प लेकर भगवान धन्वंतरि का ध्यान करें। फिर मंत्र का जाप करें।