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धान की खेती में श्री विधि से बढ़ेगा उत्पादन: डॉ. विकास
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03एमएनपी-09-डॉ. विकास रंजन चौधरी
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। धान की परंपरागत खेती के तरीके में किसानों को अब बदलाव लाना होगा। नई तकनीक से न केवल किसानों पर बोझ कम होगा, बल्कि उत्पादन भी बढ़ेगा। बुधवार को कृषि विज्ञान केंद्र से धान की उन्नत खेती के लिए किसानों को एडवाइजरी जारी की गई है।
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. विकास रंजन चौधरी ने बताया कि जिले में धान की बुवाई बड़े पैमाने पर होती है। ऐसे में अधिक किसान इस खेती से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि श्री पद्घति से धान की खेती कर किसान अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। इस पद्घति के तहत धान की नर्सरी की रोपाई 10 से 12 दिन के या दो पत्तों के पौधों को लगाया जाता है। पौधों की रोपाई 25 सेंटीमीटर की दूरी पर लाइन में की जाती हैं और एक बार में एक पौधे को लगाया जाता है। इस विधि में एक एकड़ खेत में धान रोपने के लिए सिर्फ दो किलो बीज की आवश्यकता होती है।
उन्होंने बताया कि श्री विधि में कुछ ध्यान रखने की भी जरूरत है। इसमें कम से कम दो बार घास और खरपतवार निकालना जरूरी है। क्योंकि दूरी में पौधा लगाने के कारण घास अधिक होती है।
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इस विधि से धान की रोपाई करने पर पौधे में औसतन 40 से 50 किल्ले निकलते हैं, जो अधिकतम 80 तक जा सकते हैं। इस प्रकार उपज में भी 30 प्रतिशत तक की वृद्घि होती है। उन्होंने किसानों से इस विधि को अपनाने की अपील की है।
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वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. विकास रंजन चौधरी ने बताया कि जिले में धान की बुवाई बड़े पैमाने पर होती है। ऐसे में अधिक किसान इस खेती से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि श्री पद्घति से धान की खेती कर किसान अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। इस पद्घति के तहत धान की नर्सरी की रोपाई 10 से 12 दिन के या दो पत्तों के पौधों को लगाया जाता है। पौधों की रोपाई 25 सेंटीमीटर की दूरी पर लाइन में की जाती हैं और एक बार में एक पौधे को लगाया जाता है। इस विधि में एक एकड़ खेत में धान रोपने के लिए सिर्फ दो किलो बीज की आवश्यकता होती है।
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उन्होंने बताया कि श्री विधि में कुछ ध्यान रखने की भी जरूरत है। इसमें कम से कम दो बार घास और खरपतवार निकालना जरूरी है। क्योंकि दूरी में पौधा लगाने के कारण घास अधिक होती है।
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इस विधि से धान की रोपाई करने पर पौधे में औसतन 40 से 50 किल्ले निकलते हैं, जो अधिकतम 80 तक जा सकते हैं। इस प्रकार उपज में भी 30 प्रतिशत तक की वृद्घि होती है। उन्होंने किसानों से इस विधि को अपनाने की अपील की है।