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सोरों के देवशरण ने हरिद्वार में अंग्रेजो का झंडा उतार फहराया था तिरंगा
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सोरों (कासगंज)। स्वतंत्रता संग्राम सैनानी स्वर्गीय वैद्य देवशरण पाराशरी 1942 में हरिद्वार के ऋषिकुल आयुर्वेदिक कालेज में छात्र थे। स्वतंत्रता सेनानी परिवार की पृष्ठभूमि होने के कारण देवशरण पढ़ाई के दौरान ही आंदोलन में कूद गए। उन्होंने साथी छात्रों के साथ हरिद्वार में अंग्रेज सरकार का झंडा उतार कर तिरंगा फहराया था।
देवशरण पाराशरी ने हरिद्वार स्थित हरि की पौड़ी पर अंग्रेजों के झंडे (यूनियन जैक) को उतार कर तिरंगा फहराने के लिए 13 अगस्त 1972 की अर्धरात्रि को छात्रावास में साथियों के साथ गुप्त मंत्रणा की। रात में ही ज्वालापुर निवासी कांग्रेसी नेता महाशयजी से तिरंगा झंडा लेकर चार किलोमीटर का रास्ता तय हरि की पौड़ी घंटाघर वाले घाट पर पहुंचे। जहां यूनियन जैक को उतारने के लिए छात्रों की टोली आगे बढ़ी तो, पुलिस ने उन पर लाठी बरसा दीं। वे अंग्रेजी झंडे तक न पहुंचें इसलिए उन पर घुड़सवार दौड़ाए गए। लाठी खाते हुए देवशरण पाराशरी व साथी रामकुमार गुप्त पोल पर चढ़े और यूनियन जैक उतार तिरंगा फहरा दिया। पुलिस ने उनको पकड़ कर हरिद्वार कोतवाली के प्रांगण में तेज बारिश में बैठा दिया। भींगते आंदोलनकारयिों पर लाठी बरसाईं गईं। सुबह होने से पहले रूड़की छावनी लाकर मोटर गैरेज में बंद कर यातनाएं दीं। उन पर पुलिस द्वारा डाकखाना फूंकने और रेल पटरी उखाड़ने का अभियोग लगाया गया। हालांकि संदेह का लाभ देकर मजिस्ट्रेट ने उन्हें बरी कर दिया। देवशरण पराशरी ने 1952 से सोरों में प्रतिष्ठित वैद्य के रूप में ख्याति अर्जित की। 26 अगस्त 2003 को उनका निधन हो गया।
इनका भी योगदान: सोरों के अन्य स्वतंत्रता सेनानी पहाड़ी बाबा, बल्लभराम मिश्र, पंडित दामोदर शर्मा, फूलचंद गुप्त आदि ने भी स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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पिता को मिला था सम्मान: स्व. देवशरण पाराशरी के पिता स्वर्गीय पंडित रामशरण वैद्य को स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान के लिए 15 अगस्त 1972 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा ताम्रपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया था।
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देवशरण पाराशरी ने हरिद्वार स्थित हरि की पौड़ी पर अंग्रेजों के झंडे (यूनियन जैक) को उतार कर तिरंगा फहराने के लिए 13 अगस्त 1972 की अर्धरात्रि को छात्रावास में साथियों के साथ गुप्त मंत्रणा की। रात में ही ज्वालापुर निवासी कांग्रेसी नेता महाशयजी से तिरंगा झंडा लेकर चार किलोमीटर का रास्ता तय हरि की पौड़ी घंटाघर वाले घाट पर पहुंचे। जहां यूनियन जैक को उतारने के लिए छात्रों की टोली आगे बढ़ी तो, पुलिस ने उन पर लाठी बरसा दीं। वे अंग्रेजी झंडे तक न पहुंचें इसलिए उन पर घुड़सवार दौड़ाए गए। लाठी खाते हुए देवशरण पाराशरी व साथी रामकुमार गुप्त पोल पर चढ़े और यूनियन जैक उतार तिरंगा फहरा दिया। पुलिस ने उनको पकड़ कर हरिद्वार कोतवाली के प्रांगण में तेज बारिश में बैठा दिया। भींगते आंदोलनकारयिों पर लाठी बरसाईं गईं। सुबह होने से पहले रूड़की छावनी लाकर मोटर गैरेज में बंद कर यातनाएं दीं। उन पर पुलिस द्वारा डाकखाना फूंकने और रेल पटरी उखाड़ने का अभियोग लगाया गया। हालांकि संदेह का लाभ देकर मजिस्ट्रेट ने उन्हें बरी कर दिया। देवशरण पराशरी ने 1952 से सोरों में प्रतिष्ठित वैद्य के रूप में ख्याति अर्जित की। 26 अगस्त 2003 को उनका निधन हो गया।
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इनका भी योगदान: सोरों के अन्य स्वतंत्रता सेनानी पहाड़ी बाबा, बल्लभराम मिश्र, पंडित दामोदर शर्मा, फूलचंद गुप्त आदि ने भी स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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पिता को मिला था सम्मान: स्व. देवशरण पाराशरी के पिता स्वर्गीय पंडित रामशरण वैद्य को स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान के लिए 15 अगस्त 1972 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा ताम्रपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया था।