फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   devottthan

आज जागेंगे देव, शादी-समारोह की रहेगी धूम

Thu, 07 Nov 2019 10:18 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 07 Nov 2019 10:18 PM IST
विज्ञापन
devottthan
07एमएनपी-04-देवोत्थान को लेकर शहर में गन्ने की खरीदारी करते लोग - फोटो : MAINPURI
मैनपुरी। देवोत्थान एकादशी शुक्रवार को है इसे लेकर गुरुवार को बाजार, घरों में तैयारियां हुईं। शादी विवाह के मुहूर्त होने के चलते खरीदारी काफी हुुई। मैरिज होेम फुल हैं। गन्ना, सिंघाडे़ का भोग लगाया जाएगा।
विज्ञापन

देव शयनी एकादशी को देव सो जाते हैं और देवोत्थान एकादशी को देव जागते हैं। ऐसे में देवोत्थान एकादशी के दिन से ही सहालग की शुरुआत होती है। ज्योतिषाचार्य रामानंदन शास्त्री ने बताया कि देवोत्थान एकादशी से मांगलिक कार्यक्रम शुरू हो जाते हैं। शादी समारोह, गृहप्रवेश एवं अन्य शुभ कार्य इस दिन किए जाते हैं। जिन लोगों की शादी के लिए तिथि शुभ नहीं मिलती, वह लोग इस दिन शादियां करते हैं। देवोत्थान के दिन शादी को शुभ भी माना जाता है। जिले में दो सौ से अधिक शादी समारोह होने की संभावना जताई जा रही है। देवोत्थान एकादशी को लेकर बाजारों में गन्ना, सिघाड़ा की बिक्री हुई।
विज्ञापन

देवोत्थान एकादशी पर सहालग अधिक है। जिले के सभी मैरिज होम फुल हैं। ऐसे में कई लोगों ने बरातघर और धर्मशाला शादी के लिए बुक की है। यदुवंश नगर निवासी राजेश कुमार ने बताया कि देवोत्थान के दिन बेटी की शादी के लिए कोई बरात घर नहीं मिलने पर एक स्कूल में बरात ठहराने का इंतजाम करना पड़ा है। दावत का प्रबंध सड़क पर पंडाल लगाकर करना होगा। इसके साथ ही लोगों को बैंडबाजा नहीं मिल रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

तुलसी-सालिगराम का होगा विवाह
ज्योतिषाचार्य रामानंदन शास्त्री ने बताया कि देव स्थल की साफ सफाई कर लें। चूना और गेरू से श्रीहरि के स्वागत में रंगोली बनाएं। घी के 11 ीपक जलाएं। द्राक्ष, ईख, अनार, केला, सिंघाड़ा, लड्डू, बतासे, मूली पूजा सामग्री के साथ रखें। यह सब श्रद्धापूर्वक श्रीहरि को अर्पण करने से उनकी कृपा सदैव बनी रहती है।

कार्तिक में स्नान करने वाली स्त्रियां एकादशी को भगवान विष्णु के रूप सालिगराम एवं विष्णुप्रिया तुलसी का विवाह संपन्न करवाती हैं। पूर्ण रीति-रिवाज से तुलसी वृक्ष से सालिग्राम के फेरे एक सुंदर मंडप के नीचे किए जाते हैं। विवाह में कई गीत, भजन व तुलसी नामाष्टक सहित विष्णु सहस्त्रनाम के पाठ किए जाने का विधान है। शास्त्रों के अनुसार तुलसी-सालिगराम विवाह कराने से पुण्य की प्राप्ति होती है। दांपत्य जीवन में प्रेम बना रहता है। कार्तिक मास में तुलसी रूपी दान से बढ़कर कोई दान नहीं हैं। पृथ्वी लोक में देवी तुलसी आठ नामों वृंदावनी, वृंदा, विश्वपूजिता, विश्वपावनी, पुष्पसारा, नंदिनी, कृष्णजीवनी और तुलसी नाम से प्रसिद्ध हुई हैं। श्रीहरि के भोग में तुलसी दल का होना अनिवार्य है, भगवान की माला और चरणों में तुलसी चढ़ाई जाती है। जिले में कई जगह विवाह के आयोजन होंगे।
देवोत्थान एकादशी व्रत मुहूर्त
आठ नवंबर 2019 प्रात: 09:55 से रात्रि 12:24 बजे तक
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed