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UP: देवकीनंदन ठाकुर ने बताया कौन थे प्रेमनिधि, मुगलकाल में इस तरह सनातन को बचाए रखने की जलाई अलख

Wed, 11 Dec 2024 08:59 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Wed, 11 Dec 2024 08:59 AM IST
सार

आगरा में चल रही कथा के दौरान देवकी नंदन ठाकुर ने प्रेमनिधि का जिक्र किया। बताया कि मुगलकाल में जब सनातन खतरे में था, तब भक्त प्रेमनिधि ने सनातन को बचाए रखने की अलख जगाई थी। 

 

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Devkinandan Thakur told who was Premnidhi during katha in bah agra
कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर - फोटो : amar ujala

विस्तार

आगरा के बाह में कथा वाचक देवकी नंदन ठाकुर ने कहा कि मुगलकाल में आगरा के भक्त प्रेमनिधि ने सनातन को बचाए रखने की अलख जगाई थी। हिंदू धर्म के प्रचार-प्रसार पर शाहजहां ने उन्हें बंदी बना लिया। प्रेमनिधि अपने आराध्य को जल न पिला पाने पर रात भर जेल में रोते रहे। भक्त की पुकार पर भगवान ने शाहजहां को अपना मन बदलने को मजबूर कर दिया। प्रेमनिधि को रात में ही बंदीगृह से छोड़ना पड़ा।
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मंगलवार को बजरंग आश्रम चौरंगा बीहड़ में भागवत कथा सुनाते हुए देवकी नंदन ठाकुर ने कहा कि ऐसी विचारधारा को समाप्त कर देना चाहिए जो हमारे देश और धर्म को नष्ट करे। यदि हम सावधान नहीं हुए तो 15-20 वर्ष बाद हमारी भी वही दुर्दशा होगी, जो आज बांग्लादेश में हिंदुओं की हो रही है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति से संचालित हो वह पंथ है और ईश्वर से संचालित हो वह सनातन धर्म है। इस मौके पर अरुण चतुर्वेदी, पवन चतुर्वेदी, दीपक शर्मा, कृपाशंकर दीक्षित, अनुपम मिश्रा, वीरेंद्र चतुर्वेदी, हिमांशु, अमृतांश, ओम, सूर्यांश अवधेश आदि मौजूद रहे।
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सनातन बोर्ड बनते ही हल होंगे मथुरा, संभल के मामले
कथा वाचक ने कहा कि एक बार सनातन बोर्ड बन गया तो भारत के सभी मंदिर सरकार से आजाद हो जाएंगे। गुरुकुल तैयार हो जाएंगे, गोशाला बन जाएंगी। जन्म भूमि मथुरा प्रकरण और संभल जैसे मामले हल हो जाएंगे।
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फटी जींस वाले पापा कैसे देंगे संस्कार
कथा वाचक ने बताया कि पिता से ज्यादा कल्याण कोई किताब नहीं कर सकती। पर, फटी जींस पहनने वाले पापा बच्चों को कैसा संस्कार देंगे। माताएं फैशन में लगी है। घर में बेटी और बहू आ जाए तो घर में कैसे रहना है इसकी सीख गांव के लोगों से लें। कहा कि पढ़ना अहम है, लेकिन संस्कारवान सबसे ज्यादा जरूरी है।


वामन देव की झांकी ने मोहा मन
कथा में सुनाया कि सतयुग में दैत्यराज बलि हुए थे, जो विष्णु भक्त भगवान प्रह्रलाद के पौत्र थे। राजा बलि ने अपने पराक्रम और बल से स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था। राजा बलि से रक्षा के लिए सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में गए। भगवान विष्णु ने सभी देवी-देवताओं की रक्षा का वचन देते हुए देवमाता अदिति के यहां वामन देव के रूप में जन्म लिया। वामन देव की झांकी देख लोग मुग्ध हो उठे।

 
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