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देवांश का अद्भुत दिमाग: 11 की उम्र में कोडिंग मास्टर, बनाए पांच एप, 12 में जेईई मेंस में लाए 99.91 परसेंटाइल

Tue, 02 May 2023 09:19 AM IST
भूपेन्द्र सिंह सिद्धार्थ चतुर्वेदी, आगरा
सिद्धार्थ चतुर्वेदी, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Tue, 02 May 2023 09:19 AM IST
सार

आगरा के देवांश के अद्भुत दिमाग के मुरीद बड़े-बड़े प्रोफेसर भी हो गए हैं। दरअसल, देवांश ने अपने दिमाग के दम पर छोटी उम्र में अपना लोहा मनवाया है। वह 11 की उम्र में कोडिंग मास्टर बन गए और पांच एप बना डाले। अब 12 की उम्र में उन्होंने जेईई मेंस में 99.91 परसेंटाइल अंक हासिल किए हैं। 

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Devansh scored ninety nine point nine one percentile in JEE Mains at age of just twelve year who lives in agra
देवांश धनगर व उनके माता-पिता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फितूर हैं ये उम्र की बातें, दिमाग जिद्दी होना चाहिए। किसी शायर का यह शेर देवांश पर बिल्कुल सटीक बैठता है। दिमाग के दम पर 12 साल के देवांश धनगर ने कमाल कर दिया है। जेईई मेंस परीक्षा में उनके ओबीसी-एनसीएल में 99.91 परसेंटाइल आए हैं। उन्होंने साबित कर दिया है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती है। हौसला और कुछ कर गुजरने की तमन्ना अगर हो, तो मिसाल बना जा सकता है। देश में 11 साल की उम्र में कोडिंग मास्टर के नाम से प्रख्यात देवांश की प्रतिभा को शिक्षाविद अनोखा मानते हैं।
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80 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की दसवीं

आगरा के बिचपुरी ब्लॉक क्षेत्र के बरारा गांव के रहने वाले 12 साल के देवांश धनगर ने खेत में रहकर ही पढ़ाई की। उनके पिता लाखन सिंह बताते हैं कि नौंवी तक घर में रहकर ही पढ़ाई कराई। इसके बाद पहली बार सुंदरलाल मेमोरियल इंटर कॉलेज से दसवीं की परीक्षा 80 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की थी। इस साल देवांश ने इंटर की परीक्षा दी है।
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देश में कोडिंग मास्टर के नाम से प्रख्यात

देवांश धनगर महज 11 साल की उम्र में देश में कोडिंग मास्टर के नाम से प्रख्यात हो गए। वह अभी तक 10 एप भी तैयार कर चुके हैं। 160 से ज्यादा जिला, राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजे जा चुके हैं। साथ ही 11 साल की उम्र में ही 500 से ज्यादा बच्चे उनसे निशुल्क कोडिंग सीख चुके हैं। देवांश की उम्र से दोगुने और तीन गुने बढ़े उनके शिष्य हैं।
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मन से पढ़ना जरूरी

देवांश कहते हैं कि मुझे मालूम था कि मेरा इतना परसेंटाइल बनेगा। इसके लिए मैंने समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा। मेरा मानना है कि जितनी देर भी पढ़ाई करें, उतनी देर पढ़ाई पर ही ध्यान रखना चाहिए। मैं रोज रात को यह आकलन करता हूं कि मैंने आज जितनी देर पढ़ाई की उसमें क्या सीखा। मैं वैज्ञानिक बनकर देश की सेवा करना चाहता हूं।

अबेकस के भी हैं महारथी

देवांश के पिता लाखन सिंह और मां जया बघेल कहती हैं कि देवांश को पढ़ाई से शुरू से लगाव है। किसी भी विषय की तह तक जाने की उसकी बचपन से आदत है। लाखन सिंह कहते कि अबेकस में भी देवांश को महारथ हैं। राष्ट्रीय स्तर के कई अवार्ड जीत चुके हैं।

देवांश की उपलब्धियां

जीरो माइल आईकॉन अवार्ड, प्राइड ऑफ नेशनल अवार्ड, कलाम स्पार्किंग डायमंड अवार्ड, बेस्ट टीचर अवार्ड, बाल गौरव अवार्ड, भारत मत अभिनंदन सम्मान, कोडिंग बेस्ट मेंटर अवार्ड, जॉकी बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड।

ये एप तैयार किए

फनी जोक्स एप, इंग्लिश ग्रामर एप, वोक्युलेबरी एप, जॉमेट्री केलकुलेशन एप, एक्सट्रा एजूकेशन एप।
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