देवोत्थान एकादशी: देव जागने के साथ सहालग की शुरुआत, ताजनगरी में आज होंगी सैकड़ों शादियां
सहालग की शुरुआत 14 नवंबर यानि देवोत्थान एकादशी के साथ होगी। एक महीने तक शादियां होंगी। इस दौरान 16 शुभ मुहूर्त हैं, जिनमें शहनाई बजेगी। रविवार को ही ताजनगरी में सैकड़ों शादियां हैं।
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विस्तार
कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान एकादशी कहते हैं। इसी के साथ विवाह समेत अन्य शुभ कार्य प्रारंभ हो जाएंगे। एकादशी 14 नवंबर को सुबह 5:48 बजे से अगले दिन सुबह 6:39 बजे तक होगी। भाद्रपद नक्षत्र में सर्वार्थ सिद्धि, शिवराज और हर्षण योग में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करके उन्हें भक्तगण विश्राम से उठाएंगे।
ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि चातुर्मास के दौरान पाताल लोक में निद्रा में लीन रहे भगवान विष्णु देवोत्थान एकादशी के दिन जागते हैं। इसके बाद एक बार पुन: भगवान विष्णु पूरी सृष्टि का पालन पोषण करेंगे और इसी दिन से विवाह, लग्न समेत अन्य शुभ कार्य प्रारंभ हो जाएंगे।
पूजन विधि
एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। दक्षिणावर्ती शंख में गंगाजल भरकर भगवान को पंचामृत से स्नान कराएं। सुंदर वस्त्र, जनेऊ, केसर, चंदन, अक्षत, पुष्पमाला, इत्र से भगवान का शृंगार करें।
इसके बाद केले के पत्तों से चौकी को सजाएं और भगवान को गन्ना, सिंघाड़ा, शकरकंद अर्पित करें। इस दिन भगवान शालिग्राम का विवाह तुलसी के साथ रचाया जाता है। भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है। उनके भोग में तुलसी अवश्य रखना चाहिए।
केला, आम और अंगूर का लगाएं भोग
प्राचीन सिद्धि विनायक मंदिर के महंत पंडित ज्ञानेश शास्त्री बताते हैं कि भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी व्रत में केला, आम, अंगूर, नारियल आदि के साथ सूखे मेवे आदि का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा फल, चीनी, कट्टू का आटा, आलू, साबूदाना, शकरकंद, नारियल, दूध, काली मिर्च, सेंधा नमक का सेवन व्रत रखने वाले लोग कर सकते हैं।
इस दिन सायंकाल ओम नमो: भगवते वासुदेवाय: द्वादश अक्षर मंत्र का जाप करें और तुलसी के पौधे के समक्ष गाय के घी का दीपक जलाएं। इससे घर में सुख शांति बनी रहती है। पितृदोष भी समाप्त हो जाता है। संतान की कामना करने वाले लोगों को भी इस दिन व्रत करके भगवान विष्णु सहस्त्रनाम और संतान गोपाल मंत्र का जाप करना चाहिए।
16 मुहूर्त में बजेगी शहनाई
दो साल के लंबे इंतजार के बाद शादियों की रौनक फिर से लौट आई है। सरकार ने कोरोना गाइड लाइन में मेहमानों की संख्या में छूट दी है। अब लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार मेहमानों को दावत पर बुला सकते हैं। 14 नवंबर यानी रविवार को ही ताजनगरी में सैकड़ों शादियां हैं। बुकिंग हालांकि पहले से ही हो चुकी है।
इन तिथियों में होंगी शादियां
सहालग देवोत्थान पर 14 नवंबर से शुरू हो रहा है। 15, 16, 20, 21, 28, 29 व 30 नवंबर को शादियां होंगी। वहीं, एक, दो, छह, सात, आठ, नौ, 11 व 13 दिसंबर को भी भारी सहालग है। ताजनगरी के लगभग सभी मैरिज होम फुल हैं।
दो साल बाद ताजनगरी में बैंड, बाजा और बरात की धूम मचेगी। देवोत्थान के साथ ही सहालग शुरू हो गया है। 15 दिसंबर तक जिले में एक हजार से अधिक शादियां होने का अनुमान है। यूपी वेडिंग इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने रविवार को जिले में करीब तीन सौ शादियां होने के दावा किया है।
इस बार शादियों का स्वरूप भी बदला रहेगा। पूर्व से प्रतिबंध कम होंगे लेकिन सतर्कता भी रहेगी। वेडिंग प्लानर का कहना है कि प्रतिबंध में ढील है लेकिन विवाह स्थल के बाहर मास्क पहनने के लिए जागरूक किया जाएगा। अतिथियों के लिए कुर्सियों की व्यवस्था भी उचित दूरी का ध्यान कर की जाएगी।
शुभ मुहूर्तों के लिए बंपर बुकिंग
यूपी वेडिंग इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के संयोजक मनीष अग्रवाल ने बताया कि शहर में करीब तीन सौ छोटे-बड़े होटल, मैरिज होम, फॉर्म हाउस हैं। अधिकांश बड़े शुभ मुहूर्तों के लिए बुक हो गए हैं। 15 दिसंबर तक सहालग रहेगा। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की कोशिश रहेगी कि खाने के स्टाल को इस तरह से लगाया जाए कि एक स्थान पर ज्यादा भीड़ नहीं हो।