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Agra News: बासमती चावल के विदेशी निर्यात में आई गिरावट, 11 कीटनाशक किए प्रतिबंधित

Fri, 22 Aug 2025 11:55 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Updated Fri, 22 Aug 2025 11:55 PM IST
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Decline in foreign export of Basmati rice, 11 pesticides banned
मैनपुरी। बासमती चावल के विदेशी निर्यात में 15 प्रतिशत की गिरावट आई है। इस वजह से कृषि विभाग की ओर से 11 कीटनाशक प्रतिबंधित किए गए हैं। ट्राइसाइक्लाजोल निर्धारित एमआरएल से अधिक पाए जाने पर यूरोप, अमेरिका और खाड़ी देशों में निर्यात कम हुआ है। कृषि अधिकारी ने जिले के किसानों से भी प्रयोग न करने की अपील की है। 60 दिनोंं तक रोक जारी रहेगी। जिला कृषि अधिकारी अविशांक चौहान ने बताया कि बासमती चावल के कीटनाशी अवशेष मुक्त उत्पादन व निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बासमती चावल में प्रयोग होने वाले 11 कीटनाशकों को एक अगस्त 2025 से 60 दिनों की अवधि के लिए प्रतिबंधित किया गया है। उन्होंने कहा है कि प्रतिबंधित कीटनाशकों की जगह सुरक्षित रसायनों का प्रयोग कर किसान देश की उन्नति और स्वास्थ्य में सहयोगी बनें। उन्होंने बताया कि बासमती चावल उत्तर प्रदेश की भौगोलिक संकेत फसल है। बासमती चावल में लगने वाले कीटों व रोगों की रोकथाम के लिए किसान कृषि रक्षा रसायनों को प्रयोग करते हैं। इन रसायनों के अवशेष बासमती चावल में पाए जा रहे हैं। ट्राइसाइक्लाजोल निर्धारित एमआरएल से अधिक पाए जाने के कारण यूरोप, अमेरिका व खाड़ी देशों के निर्यात में 2020-21 की तुलना में वर्ष 2021-22 में 15 प्रतिशत की गिरावट आई है। इस वजह से शासन ने 11 कीटनाशकों के सभी प्रकार के फार्मूलेशन की बिक्री, वितरण और प्रयोग को जनपद में प्रतिबंधित किया है। ताकि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण बासमती चावल की पैदावार व निर्यात में वृद्धि हो सके।
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इन कीटनाशकों पर लगा है प्रतिबंध
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि जिले में ट्राइसाइक्लाजोल, थायोमिथाक्साम, बुप्रोफेजिन, प्रोफेनोफॉस, ऐसीफेट, इमिडाक्लोप्रिड, क्लोरोपाइरीफॉस, कार्बेंडाजिम, टेबुकोनोजोल, कार्बोफ्यूरान, प्रोपिकोनाजोल को 60 दिनों के लिए प्रतिबंधित किया गया गया है।
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धान की फसल को झोंका व झुलसा रोग से बचाएं
जनपद में धान की अच्छी पैदावार के लिए जिला कृषि अधिकारी की ओर से किसानों को अपनी फसल को रोगों से बचाव के लिए कहा गया है। कृषि अधिकारी ने शुक्रवार को क्षेत्र में निरीक्षण कर फसल देखी। उन्होंने कहा कि धान की फसल को झोंका व झुलसा रोग से बचाव के लिए किसान सचेत रहने के साथ कीट प्रबंधन करें। उन्होंने कहा कि झुलसा रोग धान में जेंथोमोनास ओराइजी नामक जीवाणु से फैलता है और पौधे की परिपक्व अवस्था तक यह रोग कभी भी अपना प्रकोप दिखा सकता है। इसके अलावा पत्तियों के किनारों से शुरू होकर मध्य भाग तक सूखने लगती है। सूखे किनारे अनियमित, टेड़-मेढ़े व झुलसे हुए दिखाई देते हैं। राख के रंग के धब्बे भी पत्तियों पर नजर आते हैं। इससे बचाव के लिए किसान स्वस्थ उपचारिक बीज का प्रयोग करें। संक्रमण हो जाने कि दशा में उस खेत का पानी दूसरे खेत में ना जाने दें। संक्रमित खेत की सिचाई भी न करें। संक्रमण रोकने के लिए उचित जल निकास की व्यवस्था जरूर करें। नाइट्रोजन उर्वरक का संतुलित प्रयोग व जल प्रबंधन करें। यदि किसानों को कोई समस्या है तो वह फोटो के साथ व्हाट्सएप नंबर 9452247111 या 9452257111 पर भेज दें। 48 घंटे में किसानों की समस्या का निस्तारण कर जवाब आपके मोबाइल पर भेज दिया जाएगा।
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