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वाराणसी में डूबे तीसरे युवक का भी मिला शव
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वाराणसी में डूबे तीसरे युवक का भी मिला शव
संवाद न्यूज एजेंसी
टूंडला(फिरोजाबाद)। वाराणसी में गंगा नदी में डूबे युवकों में से तीसरे युवक का भी शव मिल गया। गोताखोरों ने दूसरे दिन तलाश करते हुए घटना स्थल से करीब आठ किमी दूर से शव बरामद कर लिया। शव मिलते ही घर में कोहराम मच गया।
नगर के कच्चा टूंडला निवासी केशव मरुधर एक्सप्रेस ट्रेन में पैंट्री कार संचालक हैं। उसके साथ ही मरुधर एक्सप्रेस में उनके मोहल्ले का इमामुद्दीन, लाइनपार के नगला इस्माइल निवासी अनस, नगला कुम्हारान संजय उर्फ चिंगारू (36) (खानपान का सामान बेचने) का काम करते थे। रविवार को केशव के साथ इमामुद्दीन, अनस, संजय और कच्चा टूंडला निवासी पवन जो पिछले छह माह से वाराणसी में ही चाय बेचने का काम करता है के साथ नौकायन के लिए गए।
गंगा में स्नान के बाद लौटने समय नाव पलटने से सभी नदी में लापता हो गए। इसमें इमामुद्दीन (32), अनस 20 पुत्र नईम खान की मौत हो गई। केशव व पवन को अन्य नाविकों ने बचा लिया था। संजय की तलाश की जा रही थी। मंगलवार दोपहर गोताखोरों ने संजय के शव को घटना स्थल के करीब आठ किमी दूर खोज लिया। परिजन के मुताबिक तीनों के शवों का पोस्टमार्टम हो गया है। शाम पांच बजे करीब तीनों के शव वाराणसी से टूंडला के लिए रवाना हो गए हैं। युवकों के परिजन ने बताया कि उनके लाडलों के शव मध्यरात्रि बाद ही टूंडला पहुंचेंगे। शवों के साथ परिवार के सदस्य भी हैं। बुधवार सुबह अंतिम संस्कार किया जाएगा। रविवार को वाराणसी गंगा में युवकों के डूबने के खबर के बाद तीनों ही परिवारों में कोहराम मचा हुआ है। दो दिनों से तीनों ही परिवारों में चूल्हे नहीं जले हैं।
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बेटा अब कौन रखेगा तेरी अम्मी का ख्याल
मृत इमामुद्दीन की मां रहीसा बेगम का रो-रोकर बुरा हाल है। वह कभी उसके निकाह की बात करती तो कभी बिलखते हुए कहती कि बेटा अब तेरी अम्मी का ख्याल कौन रखेगा। तू तो कहता था कि ऐसी बीबी लाएगा जो तेरा हमेशा ख्याल रखेगी। इकलौते बेटे इमामुद्दीन की मौत से उसकी मां रहीसा बेगम को इतना गहरा सदमा लगा कि वह बार-बार बेहोश हो जा रहीं हैं।
ससुराल से बच्चों को घर छोड़कर ड्यूटी गया था संजय
गंगा में डूबे संजय उर्फ चिंगारू के वृद्ध पिता रामकिशन ने बताया कि वे अपनी जिम्मदारी पूर्ण करने के बाद निश्चिंत थे। मगर ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। रेलवे से रिटायर्ड होने के बाद वो पेंशन से अपना गुजारा चला रहे थे, किंतु अब उनके ऊपर नाती-नातिन (आठ वर्षीय मनीष और छह वर्षीय मानवी) की जिम्मेदारी भी आ गई है। संजय रविवार को ही अपनी ससुराल फर्रुखाबाद से पत्नी नीतू व बच्चों को टूंडला छोड़कर ड्यूटी पर गया था।
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संवाद न्यूज एजेंसी
टूंडला(फिरोजाबाद)। वाराणसी में गंगा नदी में डूबे युवकों में से तीसरे युवक का भी शव मिल गया। गोताखोरों ने दूसरे दिन तलाश करते हुए घटना स्थल से करीब आठ किमी दूर से शव बरामद कर लिया। शव मिलते ही घर में कोहराम मच गया।
नगर के कच्चा टूंडला निवासी केशव मरुधर एक्सप्रेस ट्रेन में पैंट्री कार संचालक हैं। उसके साथ ही मरुधर एक्सप्रेस में उनके मोहल्ले का इमामुद्दीन, लाइनपार के नगला इस्माइल निवासी अनस, नगला कुम्हारान संजय उर्फ चिंगारू (36) (खानपान का सामान बेचने) का काम करते थे। रविवार को केशव के साथ इमामुद्दीन, अनस, संजय और कच्चा टूंडला निवासी पवन जो पिछले छह माह से वाराणसी में ही चाय बेचने का काम करता है के साथ नौकायन के लिए गए।
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गंगा में स्नान के बाद लौटने समय नाव पलटने से सभी नदी में लापता हो गए। इसमें इमामुद्दीन (32), अनस 20 पुत्र नईम खान की मौत हो गई। केशव व पवन को अन्य नाविकों ने बचा लिया था। संजय की तलाश की जा रही थी। मंगलवार दोपहर गोताखोरों ने संजय के शव को घटना स्थल के करीब आठ किमी दूर खोज लिया। परिजन के मुताबिक तीनों के शवों का पोस्टमार्टम हो गया है। शाम पांच बजे करीब तीनों के शव वाराणसी से टूंडला के लिए रवाना हो गए हैं। युवकों के परिजन ने बताया कि उनके लाडलों के शव मध्यरात्रि बाद ही टूंडला पहुंचेंगे। शवों के साथ परिवार के सदस्य भी हैं। बुधवार सुबह अंतिम संस्कार किया जाएगा। रविवार को वाराणसी गंगा में युवकों के डूबने के खबर के बाद तीनों ही परिवारों में कोहराम मचा हुआ है। दो दिनों से तीनों ही परिवारों में चूल्हे नहीं जले हैं।
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बेटा अब कौन रखेगा तेरी अम्मी का ख्याल
मृत इमामुद्दीन की मां रहीसा बेगम का रो-रोकर बुरा हाल है। वह कभी उसके निकाह की बात करती तो कभी बिलखते हुए कहती कि बेटा अब तेरी अम्मी का ख्याल कौन रखेगा। तू तो कहता था कि ऐसी बीबी लाएगा जो तेरा हमेशा ख्याल रखेगी। इकलौते बेटे इमामुद्दीन की मौत से उसकी मां रहीसा बेगम को इतना गहरा सदमा लगा कि वह बार-बार बेहोश हो जा रहीं हैं।
ससुराल से बच्चों को घर छोड़कर ड्यूटी गया था संजय
गंगा में डूबे संजय उर्फ चिंगारू के वृद्ध पिता रामकिशन ने बताया कि वे अपनी जिम्मदारी पूर्ण करने के बाद निश्चिंत थे। मगर ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। रेलवे से रिटायर्ड होने के बाद वो पेंशन से अपना गुजारा चला रहे थे, किंतु अब उनके ऊपर नाती-नातिन (आठ वर्षीय मनीष और छह वर्षीय मानवी) की जिम्मेदारी भी आ गई है। संजय रविवार को ही अपनी ससुराल फर्रुखाबाद से पत्नी नीतू व बच्चों को टूंडला छोड़कर ड्यूटी पर गया था।