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UP: फांसी पर लटकें दोनों दरिंदे...मिले ऐसी सजा, फिर न किसी बिटिया के साथ हो ऐसा अपराध, मां की है ये इच्छा
Fri, 17 Oct 2025 09:32 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 17 Oct 2025 09:32 AM IST
सार
पांच साल की मासूम से सामूहिक दुष्कर्म और फिर बेरहमी से हत्या करने के दोषियों को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। वहीं मृतक बच्ची की मां की इच्छा है कि दरिंदों को उसकी आंखों के सामने फांसी के फंदे पर लटकाया जाए।
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फांसी की रस्सी
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
आगरा के बाह के गांव में 18 मार्च 2024 को साढ़े पांच साल की बालिका को गला घोंट कर मौत के घाट उतारने वाले रिश्तेदार अमित और उसके दोस्त होलीपुरा गांव के निखिल को फांसी की सजा सुनाए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मृतका के दादा ने कहा दरिंदे फांसी पै लटकेंगे, बिनकौ पहलौ फौन माेई पै आओ हतो, दरिंदो ने मौड़ी ए छोड़वे के 6 लाख मांगे हते, फोन पै मैंने पैसे देबे की बात कही हती, तौऊ मेई मौड़ी मार दई, अब कलैजे कौ ठंडक पहुंची है।
दादा के साथ बैठी मिली दादी ने बताया कि डेढ़ साल कैसे बीते हैं, हमई ते पूछो, एक ऊ त्यौहार न मनाऔ, होली, रक्षाबंधन, दिवाली बीति गई, ठानी हती कै दरिंदों को फांसी होगी, तबई कौऊ त्यौहार मनेगौ। डेढ़ साल बाद पहली बार घर में दिवाली मनेगी। पूजा की अलमारी की साफ सफाई करेंगे।
ये भी पढ़ें - 'नन्हीं जान ने कितना संघर्ष किया होगा': बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म, फिर बेरहमी से कत्ल; फांसी की सजा सुनाते हुए कोर्ट ने लिखीं ये पंक्तियां
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दादा के साथ बैठी मिली दादी ने बताया कि डेढ़ साल कैसे बीते हैं, हमई ते पूछो, एक ऊ त्यौहार न मनाऔ, होली, रक्षाबंधन, दिवाली बीति गई, ठानी हती कै दरिंदों को फांसी होगी, तबई कौऊ त्यौहार मनेगौ। डेढ़ साल बाद पहली बार घर में दिवाली मनेगी। पूजा की अलमारी की साफ सफाई करेंगे।
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मां बोली- मेरी आंखों के सामने फांसी पर लटकें
मां भी दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के समय पर कोर्ट रूम में उपस्थित थीं। उन्होंने कहा कि सजा का ऐलान होते ही इंसाफ की उम्मीद पूरी हो गई। जिस दरिंदगी के साथ बेटी को मौत के घाट उतारा है, चाहती हूं कि दरिंदों को ऐसी ही मौत मिले ताकि भविष्य में किसी की बेटी की जघन्य हत्या न हो। उन्होंने कहा कि इच्छा है कि मेरी आंखों के सामने ही दरिंदे फांसी पर लटकें। उनको मरते हुए देखने के बाद ही मेरे कलेजे को ठंडक पहुंचेगी। डेढ़ साल एक एक दिन गिन कर गुजारे हैं, ईश्वर से हर रोज दरिंदों को फांसी की सजा की दुआ मांगी है। दुआ कबूल हुई, अब अपनी आंखों के सामने दरिंदों को फांसी पर लटकते हुए देखने के लिए ईश्वर से प्रार्थना करूंगी।
ये भी पढ़ें - UP: पांच साल की बच्ची छटपटा रही थी...दरिदों को नहीं आया रहम, फांसी की सजा मिलने पर रो पड़े दोनों दोषी
मां भी दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के समय पर कोर्ट रूम में उपस्थित थीं। उन्होंने कहा कि सजा का ऐलान होते ही इंसाफ की उम्मीद पूरी हो गई। जिस दरिंदगी के साथ बेटी को मौत के घाट उतारा है, चाहती हूं कि दरिंदों को ऐसी ही मौत मिले ताकि भविष्य में किसी की बेटी की जघन्य हत्या न हो। उन्होंने कहा कि इच्छा है कि मेरी आंखों के सामने ही दरिंदे फांसी पर लटकें। उनको मरते हुए देखने के बाद ही मेरे कलेजे को ठंडक पहुंचेगी। डेढ़ साल एक एक दिन गिन कर गुजारे हैं, ईश्वर से हर रोज दरिंदों को फांसी की सजा की दुआ मांगी है। दुआ कबूल हुई, अब अपनी आंखों के सामने दरिंदों को फांसी पर लटकते हुए देखने के लिए ईश्वर से प्रार्थना करूंगी।
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साइकिल के साथ जुड़ी हैं मासूम की यादें, जब भी बच्चे उठाते, रो पड़ते थे परिजन
घर में बेटी की साइकिल पड़ी हुई है। घर के बच्चे जब भी साइकिल उठाते, देख कर दादा, दादी, मां रो पड़ती थीं। उन्होंने बताया कि जब बच्चे ज्यादा जिद पकड़ने लगे तो साइकिल की गद्दी निकाल कर रख दी थी। बेटी के साथ जुड़ी साइकिल की यादें परिवार के जेहन में आज भी हैं। उसकी जिद पर ही साइकिल ली गई थी। कैसे उसे साइकिल चलाना सिखाया, अपनी दादी को साइकिल पर बैठने के लिए जिद करने की बात हो या फिर कहानी सुनाने की, 6 साल के जीवन का सफर इंसाफ के साथ परिजनों को याद आ गया।
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