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UP: पांच साल की बच्ची छटपटा रही थी...दरिदों को नहीं आया रहम, फांसी की सजा मिलने पर रो पड़े दोनों दोषी

Fri, 17 Oct 2025 09:13 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 17 Oct 2025 09:13 AM IST
सार

पांच साल की मासूम बच्ची से खेत में ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म किया। इसके बाद उसे खेत में घसीटा। वो छटपटा रही थी, तब भी दरिंदों को रहम नहीं आया। बेरहमी से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। गंभीर अपराध की कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई, तो दोनों दोषी रोने लगे। 

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Agra child Misdeed murder Convicts Break Down in Court After Hearing Death Sentence
फांसी की सजा मिलने पर रो पड़े दोनों दोषी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

आगरा में साढ़े पांच साल की बालिका पड़ोस में रहने वाले बच्चे के साथ नहर के किनारे खेल रही थी। तभी उसका रिश्तेदार अमित अपने दोस्त निखिल के साथ बाइक पर आ गया और बच्ची का अपहरण कर ले गया। शोर मचाने पर आरोपी बच्ची को खेत में गए और हैवानियत की हदें पार कर दीं। दोनों ने उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद खेत में घसीटते रहे। छटपटाने पर बालिका का टॉप से गला घोंटकर हत्या कर दी।
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बाद में दोनों ने परिजनों और पुलिस को गुमराह करने के लिए बालिका की तलाश करने का नाटक भी किया। दूसरे दिन निखिल ने बालिका के पिता को फोन कर छह लाख रुपये की फिरौती की भी मांग कर दी थी। शक होने पर पुलिस ने अमित और उसके दोस्त को हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपियों ने सबकुछ कबूल कर लिया। उनकी निशानदेही पर बालिका का शव खेत से बरामद हुआ था। खुलासा होने पर गांव के लोग सन्न रह गए थे।

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घटना 18 मार्च 2024 की है। दोषी अमित बालिका का रिश्तेदार है। वह कपड़े की दुकान चलाता था। उसमें निखिल साझेदार था। दोनों ने 50 हजार रुपये का कर्ज लेकर भदरौली में कपड़े की दुकान खोली थी। दुकान में घाटा हो गया। कर्ज नहीं चुका सके। उन्हें ब्याज सहित दो लाख रुपये चुकाने थे। वहां दुकान बंद करनी पड़ी। बाद में जरार में एक और दुकान खोली। इधर, कर्जदार चक्कर काट रहे थे। ऐसे में उन्होंने बालिका के अपहरण की योजना बनाई थी। अपहरण के बाद बालिका ने शोर मचाना शुरू कर दिया तो दोनों घबराहट में उसे सरसों के खेत में ले गए।

 
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सामूहिक दुष्कर्म और अप्राकृतिक कृत्य किया। इसके बाद खेत में घसीटा। बच्ची छटपटा रही थी तो निखिल ने बालिका के टाॅप से ही उसका गला घाेंट दिया। शव को छिपाने के बाद अमित बालिका के पिता से मिला। उनके साथ बच्ची की तलाश करने का दिखावा करता रहा। इस बीच निखिल ने दो अलग-अलग नंबर से कॉल करके फिरौती भी मांगी, जिससे किसी को उस पर शक नहीं हो सके। इसके बाद भी पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया था।

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ऑर्डर-ऑर्डर सुनते ही रोने लगे दोषी और परिजन
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की कोर्ट में बृहस्पतिवार को सुबह 11 बजे सुनवाई शुरू हुई। पुलिस दोनों आरोपियों को जेल से अदालत लेकर पहुंची। उस दौरान दोनों दोषी कोर्ट में गुमसुम थे। बाहर परिजन उदास बैठे थे। फांसी की सजा का आदेश सुनते ही दोनों दोषियों के माता-पिता, भाई-बहन जोर-जोर से रोने लगे। दोषियों की भी आंखों में आंसू थे। सुरक्षा में तैनात एसएसएफ के जवानों ने उन्हें समझाकर शांत कराया, तो निखिल की मां ने कहा कि निर्दोष होने के बाद भी हमारे बेटे काे फंसाया गया। हमारे बुढ़ापे का सहारा चला गया। बेटे को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगी। वहीं अमित के परिजन गुमसुम रहे।
 
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