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तिरंगे में लिपटा शव पहुंचा गांव, तो रो पड़े लोग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Updated Mon, 03 Sep 2018 08:34 AM IST
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गांव में उमड़ी भीड़। इनसेट- मृतक बाचाराम।
- फोटो : अमर उजाला
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पुणे के खिड़की इलाके में आगरा बाह के विक्रमपुर निवासी सूबेदार पद से रिटायर्ड डिफेंस सिक्योरिटी कोर में तैनात हवलदार बाचाराम की आंत में संक्रमण के कारण मौत हो गई। शनिवार को तिरंगे में लिपटा उनका शव गांव पहुंचा तो पूरा गांव रो पड़ा। लोगों ने घर के पास स्मारक बनाने का निर्णय लिया है।
1981 में सेना में भर्ती हुए बाचाराम पुत्र राजाराम ने जम्मू कश्मीर में तैनाती के दौरान दुश्मन के दांत खट्टे किए थे। उनके साथी सैनिक सुरेश यादव ने बताया कि उन्हें सेना के कई मेडल मिले थे। 2005 में सूबेदार के पद से रिटायर्ड हुए तो डिफेन्स सिक्योरिटी कोर में हवलदार के पद पर ज्वाइन कर लिया।
पुणे के खिड़की इलाके में तैनाती के दौरान देशभक्ति के जुनून में पेट दर्द को भूल गए। साथी सैनिकों ने बताया कि आंत में संक्रमण होने पर 15 अगस्त को पुणे के कमांड हॉस्पिटल में भर्ती कराया, जहां दूसरे ऑपरेशन के बाद गुरुवार को उनकी मौत हो गई।
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शनिवार को सेना यूनिट बाचाराम का तिरंगे में लिपटा शव लेकर पहुंची तो उनके अंतिम दर्शन को आसपास के गांवों के लोग भी पहुंचे गए। घर के पास ही खेत में उनका अंतिम संस्कार किया गया, यहां पर उनकी यादों का स्मारक बनाने का निर्णय लिया गया, जिसमें उनकी वीरगाथा अंकित होगी।
पत्नी मीरा ने बताया कि 28 अगस्त को फोन पर हुई बात में उन्होंने बच्चों का ख्याल रखने के लिए कहा था। वहीं उनके पुत्र विपिन, भोला और पुत्री आरती ने सेना में भर्ती होने की इच्छा जताई है। बाचाराम के बडे़ भाई शिव कुमार भी सेना में थे।
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1981 में सेना में भर्ती हुए बाचाराम पुत्र राजाराम ने जम्मू कश्मीर में तैनाती के दौरान दुश्मन के दांत खट्टे किए थे। उनके साथी सैनिक सुरेश यादव ने बताया कि उन्हें सेना के कई मेडल मिले थे। 2005 में सूबेदार के पद से रिटायर्ड हुए तो डिफेन्स सिक्योरिटी कोर में हवलदार के पद पर ज्वाइन कर लिया।
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पुणे के खिड़की इलाके में तैनाती के दौरान देशभक्ति के जुनून में पेट दर्द को भूल गए। साथी सैनिकों ने बताया कि आंत में संक्रमण होने पर 15 अगस्त को पुणे के कमांड हॉस्पिटल में भर्ती कराया, जहां दूसरे ऑपरेशन के बाद गुरुवार को उनकी मौत हो गई।
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शनिवार को सेना यूनिट बाचाराम का तिरंगे में लिपटा शव लेकर पहुंची तो उनके अंतिम दर्शन को आसपास के गांवों के लोग भी पहुंचे गए। घर के पास ही खेत में उनका अंतिम संस्कार किया गया, यहां पर उनकी यादों का स्मारक बनाने का निर्णय लिया गया, जिसमें उनकी वीरगाथा अंकित होगी।
पत्नी मीरा ने बताया कि 28 अगस्त को फोन पर हुई बात में उन्होंने बच्चों का ख्याल रखने के लिए कहा था। वहीं उनके पुत्र विपिन, भोला और पुत्री आरती ने सेना में भर्ती होने की इच्छा जताई है। बाचाराम के बडे़ भाई शिव कुमार भी सेना में थे।