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बुआ ने चलाया रेस्क्यु ऑपरेशन, भतीजियों के लिए बनीं देवदूत
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कासगंज के लहरा गंगा घाट पर बालिकाओं के डूबने पर घाट पर मोटर वोट से निगरानी करते एडीएम व एएसपी ।
- फोटो : KASGANJ
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कासगंज। गंगा में बालिकाओं के डूबने के दौरान एक बुआ ने अपराजिता का परिचय दिया। भतीजियों को डूबता देख उसने रेस्क्यु अभियान चला दिया और देवदूत बनकर दो भतीजियों को बचा लिया। महिला के इस साहस को देख महिला सशक्तिकरण और अपराजिता का सीधा संदेश मिला है।
स्नान के दौरान जब बालिकाएं डूब रहीं थी तो उस समय पिंकी(22) पुत्री महेंद्र पाल स्नान कर गंगानदी से बाहर निकली थीं। जब उन्होंने यह नजारा देखा तो तुरंत ही फिर से नदी में छलांग लगा दी। उन्होंने अपनी 12 साल की भतीजी अंजली और परिवार की ही भतीजी सोनी का हाथ पकड़ लिया और फिर वह तैरती हुई दोनों ही डूबती हुई भतीजियों को नदी के किनारे घाट तक ले आईं।
इस तरह उसने रेस्क्यु अभियान चलाकर अपनी भतीजी को बचाया। उसने अदम्य साहस और सशक्त महिला का परिचय दिया। भतीजियों को बचाने वाली बुआ भी चर्चाओं में रहीं। हालांकि वह भतीजियों को निकालने के बाद घाट से तुरंत ही घर चली गई। गांव में जब अमर उजाला की टीम पहुंची तो पिंकी से बातचीत की।
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उसने बताया कि वह पानी में तैरना जानती है। गंगा में डूबते सभी को बचाने का प्रयास किया था, लेकिन वह सिर्फ दो भतीजियों को ही बचा सकी। गांव में भी बुआ लोगों की जुबां पर सुर्खियों में रही।
रिपोर्ट एवं संपादन अजय झंवर
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स्नान के दौरान जब बालिकाएं डूब रहीं थी तो उस समय पिंकी(22) पुत्री महेंद्र पाल स्नान कर गंगानदी से बाहर निकली थीं। जब उन्होंने यह नजारा देखा तो तुरंत ही फिर से नदी में छलांग लगा दी। उन्होंने अपनी 12 साल की भतीजी अंजली और परिवार की ही भतीजी सोनी का हाथ पकड़ लिया और फिर वह तैरती हुई दोनों ही डूबती हुई भतीजियों को नदी के किनारे घाट तक ले आईं।
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इस तरह उसने रेस्क्यु अभियान चलाकर अपनी भतीजी को बचाया। उसने अदम्य साहस और सशक्त महिला का परिचय दिया। भतीजियों को बचाने वाली बुआ भी चर्चाओं में रहीं। हालांकि वह भतीजियों को निकालने के बाद घाट से तुरंत ही घर चली गई। गांव में जब अमर उजाला की टीम पहुंची तो पिंकी से बातचीत की।
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उसने बताया कि वह पानी में तैरना जानती है। गंगा में डूबते सभी को बचाने का प्रयास किया था, लेकिन वह सिर्फ दो भतीजियों को ही बचा सकी। गांव में भी बुआ लोगों की जुबां पर सुर्खियों में रही।
रिपोर्ट एवं संपादन अजय झंवर