दीक्षांत समारोह: कम पड़ी पापा की कमाई, पढ़ाने लगी ट्यूशन, गरीबी में पढ़ीं बेटियों के गले में दमके सोने के पदक
आगरा में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय का 88वां दीक्षांत समारोह संपन्न हुआ। इस दौरान ऐसी बेटियों के गले में सोने के पदक दमके जो बेहद आभाव में पढ़ीं। किसी ने ट्यूशन पढ़ाकर पढ़ाई की तो किसी ने रिश्तेदार के घर रहकर।
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उत्तर प्रदेश के आगरा में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय का 88वां दीक्षांत समारोह गुरुवार को संपन्न हुआ। इस मौके पर कुलाधिपति और राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने छात्र-छात्राओं का मनोबल बढ़ाया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को मेडल पहनाकर सम्मानित किया।
एक समय लगा आगे नहीं पढ़ पाउंगी
आगरा के लोहामंडी की सेंट जोंस कॉलेज की अपूर्वा कुशवाहा ने तीन सोने के मेडल हासिल किए। उन्होंने बताया कि पिताजी बिजली का काम करते हैं। हम चार भाई-बहन की पढ़ाई और परिवार का खर्च उठाने में कमाई कम पड़ने लगी। ऐसा लगा कि आगे की पढ़ाई नहीं हो पाएगी। बीएससी प्रथम वर्ष से बच्चों को ट्यूशन देना शुरू कर दिया। महीने में आठ से 10 हजार रुपये मिल जाते। इससे परिवार में सहयोग के साथ अपनी पढ़ाई भी करती।
बेटे से भी बढ़कर है अपूर्वा
छोटे भाई-बहन को भी पढ़ाती हूं। पिता ईश्वरी प्रसाद कहते हैं कि अपूर्वा तो बेटे से भी बढ़कर है। दीक्षांत समारोह में उसने एमएससी गणित में 3 स्वर्ण पदक हासिल किए हैं। इससे पहले 86वें दीक्षांत समारोह में बीएससी अंतिम वर्ष में भी एक स्वर्ण पदक मिला था। भविष्य में शिक्षक बनना चाहती हैं, नेट की भी तैयारी कर रही हैं।
किसान की बेटी के गले में दमके सोने के तीन मेडल
पिता राजमणि पटेल के पास दो-तीन बीघा जमीन। खेती-मजदूरी कर साल भर में 50 हजार रुपये ही कमा पाते। परिवार में छह भाई-बहन, मुफलिसी ऐसी कि परिवार का पेट पालना भी मुश्किल। मन में पढ़कर शिक्षक बनने का सपना था, लगा कि पढ़ाई बंद करनी पड़ेगी। इतना कहते ही वाराणसी की सीमा देवी भावुक हो गईं। बोली, मेरे चाचा राजन कुमार वर्मा शिक्षक हैं और हाथरस में रहते हैं। उनके यहां रही, उन्होंने पढ़ाई में सहयोग किया। मैं भी जी-जान से जुट गई। इसका फल मिला और सोने के तीन मेडल मिले हैं।
जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई में सहयोग करेंगी
सीमा ने बताया कि वह पीसी बागला महाविद्यालय की छात्रा हैं। वह भी जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई में सहयोग करेंगी। समारोह में साथ आए सीमा के चाचा राजन बोले कि हमारे गांव में तो छोड़िए आसपास के क्षेत्र में भी किसी को इतने गोल्ड मेडल नहीं मिले हैं। सीमा ने हमारे गांव और परिवार को नाम रोशन कर दिया।