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डाटा रिकवरी के लिए अब सीबीआई की जरूरत नहीं
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Updated Fri, 05 Feb 2016 02:12 AM IST
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साइबर क्राइम के मामलों में मोबाइल, कंप्यूटर या लैपटॉप का डाटा रिकवर कराने के लिए पुलिस को अब सीबीआई की मदद लेने की जरूरत नहीं रहेगी। आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला में साइबर सेक्शन का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। यह 15-20 दिन में पूरा हो जाने की उम्मीद है। इसके लिए एक करोड़ के उपकरण पहले ही मिल चुके हैं। इसके शुरू हो जाने के बाद एसएमएस की डीकोडिंग भी हो सकेगी।
इस सेक्शन को मंजूरी पिछले साल मिली थी। उपकरण भी काफी दिन पहले आ गए थे, लेकिन काम अब शुरू हुआ है। विधि विज्ञान प्रयोगशाला के संयुक्त निदेशक डा. एके मित्तल इसे तैयार करा रहे हैं। उपकरण स्थापित करने के लिए दो साइबर एक्सपर्ट बुलाए गए हैं। इस सेक्शन में डाटा रिकवरी के साथ ही वीडियो फुटेज का परीक्षण भी किया जा सकेगा। सोशल मीडिया से जुड़े अपराध के मामलों की भी जांच हो सकेगी। साइबर एक्सपर्ट ने बताया कि मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप, पेन ड्राइवर, चिप से डिलीट किया गया कोई भी डाटा इस सेक्शन में रिकवर किया जा सकेगा। लैब में सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर दोनों का परीक्षण किया जाएगा। वीडियो फुटेज के परीक्षण में बताया जा सकेगा कि इसमें कोई छेड़छाड़ तो नहीं की गई है।
आगरा लैब में डीएनए परीक्षण भी जल्द
डीएनए परीक्षण कराने के लिए पुलिस को अब लखनऊ के चक्कर नहीं लगाने होंगे। आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला में डीएनए परीक्षण सेक्शन तैयार किया जा रहा है। इसके भी जल्द शुरू होने की उम्मीद है। इस सेक्शन को मंजूरी तो पिछले साल ही मिल गई थी, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ था। जल्द ही लखनऊ से उपकरण मिलने की उम्मीद है। लखनऊ से ही वैज्ञानिकों की नियुक्ति की जानी है। यह सेक्शन शुरू हो जाने पर लैब में 10 सेक्शन हो जाएंगे। अभी आठ ही हैं। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, दुराचार के प्रत्येक मामले में डीएनए परीक्षण कराया जाना अनिवार्य है। इसके अलावा अज्ञात शवों की शनाख्त के लिए डीएनए परीक्षण बेहद अहम है। कई बार मौका ए वारदात से अपराधियों के बाल या खून मिल जाते हैं। उनके पकड़े जाने पर डीएनए परीक्षण कराया जाता है। खंदारी में अधिवक्ता प्रवीण गुलाटी की पत्नी और बेटी की हत्या के मामले में मौके से खून मिला था। आरोपी के खून से डीएनए का मिलान कराने के लिए सैंपल लखनऊ लैब भेजे गए। इसके बाद हाल ही में रिटायर्ड कैप्टन अनेक सिंह सिकरवार की हत्या में पकड़े गए अपराधियों के पास खून से सने कपड़े मिले थे। यह खून अनेक सिंह का बताया गया। इससे सैंपल लेकर आरोपियों के डीएनए से मिलान कराया जाएगा।
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इस सेक्शन को मंजूरी पिछले साल मिली थी। उपकरण भी काफी दिन पहले आ गए थे, लेकिन काम अब शुरू हुआ है। विधि विज्ञान प्रयोगशाला के संयुक्त निदेशक डा. एके मित्तल इसे तैयार करा रहे हैं। उपकरण स्थापित करने के लिए दो साइबर एक्सपर्ट बुलाए गए हैं। इस सेक्शन में डाटा रिकवरी के साथ ही वीडियो फुटेज का परीक्षण भी किया जा सकेगा। सोशल मीडिया से जुड़े अपराध के मामलों की भी जांच हो सकेगी। साइबर एक्सपर्ट ने बताया कि मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप, पेन ड्राइवर, चिप से डिलीट किया गया कोई भी डाटा इस सेक्शन में रिकवर किया जा सकेगा। लैब में सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर दोनों का परीक्षण किया जाएगा। वीडियो फुटेज के परीक्षण में बताया जा सकेगा कि इसमें कोई छेड़छाड़ तो नहीं की गई है।
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आगरा लैब में डीएनए परीक्षण भी जल्द
डीएनए परीक्षण कराने के लिए पुलिस को अब लखनऊ के चक्कर नहीं लगाने होंगे। आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला में डीएनए परीक्षण सेक्शन तैयार किया जा रहा है। इसके भी जल्द शुरू होने की उम्मीद है। इस सेक्शन को मंजूरी तो पिछले साल ही मिल गई थी, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ था। जल्द ही लखनऊ से उपकरण मिलने की उम्मीद है। लखनऊ से ही वैज्ञानिकों की नियुक्ति की जानी है। यह सेक्शन शुरू हो जाने पर लैब में 10 सेक्शन हो जाएंगे। अभी आठ ही हैं। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, दुराचार के प्रत्येक मामले में डीएनए परीक्षण कराया जाना अनिवार्य है। इसके अलावा अज्ञात शवों की शनाख्त के लिए डीएनए परीक्षण बेहद अहम है। कई बार मौका ए वारदात से अपराधियों के बाल या खून मिल जाते हैं। उनके पकड़े जाने पर डीएनए परीक्षण कराया जाता है। खंदारी में अधिवक्ता प्रवीण गुलाटी की पत्नी और बेटी की हत्या के मामले में मौके से खून मिला था। आरोपी के खून से डीएनए का मिलान कराने के लिए सैंपल लखनऊ लैब भेजे गए। इसके बाद हाल ही में रिटायर्ड कैप्टन अनेक सिंह सिकरवार की हत्या में पकड़े गए अपराधियों के पास खून से सने कपड़े मिले थे। यह खून अनेक सिंह का बताया गया। इससे सैंपल लेकर आरोपियों के डीएनए से मिलान कराया जाएगा।
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