{"_id":"9441078552cb117a56d8c695907888f7","slug":"dangerous-railway-crossing-in-agra-city-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"यहां तो ‘मौत के फाटक’ शहर के बीच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यहां तो ‘मौत के फाटक’ शहर के बीच
आगरा , अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 05 Dec 2014 01:49 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मऊ हादसे ने एक बार फिर प्रकाशनगर क्रासिंग हादसे की याद दिला दी। करीब एक साल पहले यहां से एक कार ट्रैक पर फंस गई और ट्रेन की टक्कर से सवार दो लोगों की मौत हो गई। उसी के बाद यहां अंडरपाथ बनाने का काम शुरू हुआ जो अगले माह तक पूरा भी कर लिया जाएगा। खतरों को देखते हुए रेलवे ने अगले साल तक सभी मानवरहित क्रासिंग खत्म कर देने का फैसला किया है। यहां जरूरत के मुताबिक ओवर या अंडर ब्रिज बनाए जाएंगे। लेकिन मऊ की तरह हर दुर्घटना के बाद वाहन चालक की लापरवाही, असावधानी अथवा बेसब्री ही इसका कारण पाई गई।
शहर में सबसे खतरनाक मानवरहित फाटक प्रकाश नगर का था। यहां अक्सर छोटे-बड़े हादसे होते रहते। गत वर्ष कुछ ही दूर रह गई आती ट्रेन देखने के बाद भी चालक ने कार क्रासिंग पार ले जाने की कोशिश की। शायद वह पार भी हो जाता लेकिन कार का पिछला पहिया ट्रैक में फंस गया। कानपुर की ओर से आती ट्रेन का चालक बेहद करीब और ऐन ट्रैक पर फंसी कार को टक्कर से चाहकर भी नहीं बचा पाया।
‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी, फाटक को क्रास करते वक्त ट्रैक के दोनों ओर जरूर देखें। अगर गाड़ी आ रही है, तो ट्रेन के निकलने का इंतजार करे।’ यह प्रचार अखबार-टीवी के साथ ही स्टेशन ओर रेल फाटकों के आसपास देखा-सुना जाता है। बावजूद इसके लोग सबक नहीं लेते। प्रकाश नगर हो या मऊ, जो हुआ वह यही बताता है। कि मंजिल तक पहुंचने की जल्दबाजी में जान जोखिम में डाल दी जाती है। मऊ में गुरुवार को बस चालक ने ट्रेन पास होने के बाद भी मानवरहित फाटक को क्रास किया। ट्रेन की टक्कर से पांच बच्चों की मौत हो गई।
विज्ञापन
स्कूल बस चालक की कसौटी
स्कूल बसों के चालक नियुक्त होने के लिए उसके पास व्यावसायिक ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए जो कम से कम पांच साल पुराना हो। स्कूल का बैज अंकित हो। स्कूल में तैनाती के वक्त पुलिस से सत्यापन अनिवार्य। लाइसेंस नवीनीकरण के समय देखा जाता है कि कोई आपराधिक इतिहास तो नहीं।
रेलवे की व्यवस्था
आगरा रेल मंडल में 284 रेलवे क्रासिंग हैं
इनमें 40 मानवरहित हैं। 244 पर गेटमैन
मानवरहित क्रासिंग पर होमगार्ड तैनात हैं
यहां 2015 तक ब्रिज बनाने लक्ष्य तय है
एक लाख से अधिक वाहनों के आवागमन (टीवीयू) पर ओवरब्रिज बनाने का नियम है। जनता को जागरूक करने के लिए विज्ञापन, नुक्कड़ नाटक, मोबाइल वैन आदि का सहारा भी लिया जाता है।
जब भी चालकों की नियुक्ति करते हैं, उसके डीएल से लेकर चरित्र तक का पता किया जाता है। उसके क्षेत्र के किसी जिम्मेदार व्यक्ति का प्रमाणपत्र भी लिया जाता है।
संजय तोमर, अध्यक्ष अप्सा, आगरा
विभाग की ओर से समय-समय पर स्कूल प्रबंधकों को नियम कायदे बताए जाते हैं। उन्हें बस और चालकों को रखने की शर्तें बताते हैं। कमी मिली तो कार्रवाई भी करते हैं।
ओपी सिंह, संभागीय परिवहन अधिकारी
रेलवे की ओर से 2015 तक सभी मानवरहित फाटक बंद कर दिए जाएंगे। इन स्थानों पर जरूरत के हिसाब से रेल ट्रैक पर ओवरब्रिज अथवा अंडरब्रिज बनाए जा रहे हैं।
भूपेंदर ढिल्लन, जनसंपर्क अधिकारी, आगरा मंडल
विज्ञापन
शहर में सबसे खतरनाक मानवरहित फाटक प्रकाश नगर का था। यहां अक्सर छोटे-बड़े हादसे होते रहते। गत वर्ष कुछ ही दूर रह गई आती ट्रेन देखने के बाद भी चालक ने कार क्रासिंग पार ले जाने की कोशिश की। शायद वह पार भी हो जाता लेकिन कार का पिछला पहिया ट्रैक में फंस गया। कानपुर की ओर से आती ट्रेन का चालक बेहद करीब और ऐन ट्रैक पर फंसी कार को टक्कर से चाहकर भी नहीं बचा पाया।
विज्ञापन
‘सावधानी हटी, दुर्घटना घटी, फाटक को क्रास करते वक्त ट्रैक के दोनों ओर जरूर देखें। अगर गाड़ी आ रही है, तो ट्रेन के निकलने का इंतजार करे।’ यह प्रचार अखबार-टीवी के साथ ही स्टेशन ओर रेल फाटकों के आसपास देखा-सुना जाता है। बावजूद इसके लोग सबक नहीं लेते। प्रकाश नगर हो या मऊ, जो हुआ वह यही बताता है। कि मंजिल तक पहुंचने की जल्दबाजी में जान जोखिम में डाल दी जाती है। मऊ में गुरुवार को बस चालक ने ट्रेन पास होने के बाद भी मानवरहित फाटक को क्रास किया। ट्रेन की टक्कर से पांच बच्चों की मौत हो गई।
विज्ञापन
स्कूल बस चालक की कसौटी
स्कूल बसों के चालक नियुक्त होने के लिए उसके पास व्यावसायिक ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए जो कम से कम पांच साल पुराना हो। स्कूल का बैज अंकित हो। स्कूल में तैनाती के वक्त पुलिस से सत्यापन अनिवार्य। लाइसेंस नवीनीकरण के समय देखा जाता है कि कोई आपराधिक इतिहास तो नहीं।
रेलवे की व्यवस्था
आगरा रेल मंडल में 284 रेलवे क्रासिंग हैं
इनमें 40 मानवरहित हैं। 244 पर गेटमैन
मानवरहित क्रासिंग पर होमगार्ड तैनात हैं
यहां 2015 तक ब्रिज बनाने लक्ष्य तय है
एक लाख से अधिक वाहनों के आवागमन (टीवीयू) पर ओवरब्रिज बनाने का नियम है। जनता को जागरूक करने के लिए विज्ञापन, नुक्कड़ नाटक, मोबाइल वैन आदि का सहारा भी लिया जाता है।
जब भी चालकों की नियुक्ति करते हैं, उसके डीएल से लेकर चरित्र तक का पता किया जाता है। उसके क्षेत्र के किसी जिम्मेदार व्यक्ति का प्रमाणपत्र भी लिया जाता है।
संजय तोमर, अध्यक्ष अप्सा, आगरा
विभाग की ओर से समय-समय पर स्कूल प्रबंधकों को नियम कायदे बताए जाते हैं। उन्हें बस और चालकों को रखने की शर्तें बताते हैं। कमी मिली तो कार्रवाई भी करते हैं।
ओपी सिंह, संभागीय परिवहन अधिकारी
रेलवे की ओर से 2015 तक सभी मानवरहित फाटक बंद कर दिए जाएंगे। इन स्थानों पर जरूरत के हिसाब से रेल ट्रैक पर ओवरब्रिज अथवा अंडरब्रिज बनाए जा रहे हैं।
भूपेंदर ढिल्लन, जनसंपर्क अधिकारी, आगरा मंडल