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साइबर ठगीः दो हजार के लालच में सैनिक ने ढाई लाख रुपये गंवाए
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किशनी (मैनपुरी)। दो हजार के लालच में गांव कुड़रिया निवासी सैनिक ने करीब ढाई लाख रुपये गंवा दिए। साइबर ठग ने पहले तो खाते के बारे में जानकारी ली। इसके बाद एप डाउनलोड करने के लिए कहा। इसके जरिए खाते से 2.40 लाख रुपये निकाल लिए गए। सैनिक की ओर से तहरीर दिए जाने के बाद पुलिस जांच में जुट गई है।
थाना क्षेत्र के गांव कुड़रिया समान निवासी महेंद्र पाल सिंह बीएसएफ की 145वीं बटालियन बीएसएफ कैंप मेहसाना अहमदाबाद गुजरात में तैनात हैं। 22 फरवरी को सैनिक मोबाइल पर एक क्रिकेटर के नाम से चल रहे गेम को ऑनलाइन खेल रहा था। खेल में जीत पर उन्हें करीब 2130 रुपये बोनस के तौर पर मिले थे। जब उन्होंने जीते हुए रुपये खाते में डलवाने के लिए सर्च किया तो खाते में रुपये ट्रांसफर करने के लिए एनी डेस्ट एप डाउनलोड करने के लिए कहा गया। एप डाउनलोड करने के बाद खाते के संबंध में जानकारी ली गई। सैनिक सभी जानकारियां उपलब्ध कराता गया और कुछ देर बाद ही खाते से 2.40 लाख रुपये निकाल लिए गए। सैनिक की ओर से थाने में तहरीर दी गई है।
भूलकर भी डाउनलोड न करें एप
साइबर एक्सपर्ट बताते हैं कि एनी डेस्क एप का प्रयोग अधिकतर डेस्कटॉप व लैपटॉप पर ऑनलाइन सर्विसिंग के लिए किया जाता है। इस एप के जरिए आपसे जुड़ा व्यक्ति आपके कंप्यूटर और लैपऑप को दूर बैठकर संचालित कर सकता है। इस एप को मोबाइल में डाउनलोड करके दूसरे व्यक्ति से कनेक्ट किया जाए तो संबंधित आपके मोबाइल फोन को खुद संचालित करने लगता है। ऐसा ही सैनिक के साथ हुआ। जरा सी असावधानी व जानकारी के अभाव में वह लाखों रुपये गंवा बैठा। प्रभारी निरीक्षक का कहना है कि जांच की जा रही है।
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थाना क्षेत्र के गांव कुड़रिया समान निवासी महेंद्र पाल सिंह बीएसएफ की 145वीं बटालियन बीएसएफ कैंप मेहसाना अहमदाबाद गुजरात में तैनात हैं। 22 फरवरी को सैनिक मोबाइल पर एक क्रिकेटर के नाम से चल रहे गेम को ऑनलाइन खेल रहा था। खेल में जीत पर उन्हें करीब 2130 रुपये बोनस के तौर पर मिले थे। जब उन्होंने जीते हुए रुपये खाते में डलवाने के लिए सर्च किया तो खाते में रुपये ट्रांसफर करने के लिए एनी डेस्ट एप डाउनलोड करने के लिए कहा गया। एप डाउनलोड करने के बाद खाते के संबंध में जानकारी ली गई। सैनिक सभी जानकारियां उपलब्ध कराता गया और कुछ देर बाद ही खाते से 2.40 लाख रुपये निकाल लिए गए। सैनिक की ओर से थाने में तहरीर दी गई है।
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भूलकर भी डाउनलोड न करें एप
साइबर एक्सपर्ट बताते हैं कि एनी डेस्क एप का प्रयोग अधिकतर डेस्कटॉप व लैपटॉप पर ऑनलाइन सर्विसिंग के लिए किया जाता है। इस एप के जरिए आपसे जुड़ा व्यक्ति आपके कंप्यूटर और लैपऑप को दूर बैठकर संचालित कर सकता है। इस एप को मोबाइल में डाउनलोड करके दूसरे व्यक्ति से कनेक्ट किया जाए तो संबंधित आपके मोबाइल फोन को खुद संचालित करने लगता है। ऐसा ही सैनिक के साथ हुआ। जरा सी असावधानी व जानकारी के अभाव में वह लाखों रुपये गंवा बैठा। प्रभारी निरीक्षक का कहना है कि जांच की जा रही है।
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