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धान की फसल के लिए मौसम नहीं दे रहा साथ
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मैनपुरी। बारिश कम होने से धान की फसल पर संकट मंडरा रहा है। इससे किसान परेशान हैं। जिले में बड़े पैमाने पर धान की खेती की जाती है। इस बार मौसम धान की फसल के लिए अनुकूल नहीं है। पहले जहां बारिश धान के लिए जरूरत से कम हुई तो वहीं अब तापमान भी मुश्किल खड़ी कर रहा है।
धान की नर्सरी बुवाई से लेकर अब तक लगभग 400 मिमी बारिश हुई है। जबकि धान की फसल के लिए 650-700 मिमी औसत बारिश होनी चाहिए। कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरडी यादव बताते हैं कि सितंबर के अंत तक धान की कई प्रजातियां पकने की तरफ पहुंच जाती हैं। ऐसे में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास होना चाहिए। इससे धान एकदम नहीं पकता है और दाने को विकसित होने का पूरा समय मिलता है। वर्तमान में तापमान इसके विपरीत है। अधिकतम तापमान 35 से 36 डिग्री के बीच बना हुआ है, इससे दाना जल्द ही सूख जाएगा और पूर्ण विकसित नहीं हो पाएगा। उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
सिंचाई ने भी बढ़ाई लागत
बारिश न होने पर किसान निजी संसाधनों से धान की सिंचाई कर रहे हैं। इससे धान की फसल की लागत बढ़ती जा रही है। एक हेक्टेयर धान की अगर बात करें तो इसमें लगभग छह से सात हजार रुपये की लागत सिंचाई के चलते बढ़ गई है।
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हाईलाइटर
-65 हजार हेक्टेयर है धान का क्षेत्रफल
-90 हजार से अधिक किसान करते हैं धान की खेती
-400 मिमी हुई है जून से अब तक बारिश
-650 मिमी होनी चाहिए धान के लिए औसत बारिश
इस बार धान की फसल के अनुसार बारिश कम हुई है। तापमान भी औसत से अधिक है। किसान धान की फसल को सूखने न दें। इससे काफी हद तक राहत मिलेगी। जल्द बारिश होने की भी उम्मीद जताई जा रही है।
डॉ. गगनदीप सिंह, जिला कृषि अधिकारी।
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धान की नर्सरी बुवाई से लेकर अब तक लगभग 400 मिमी बारिश हुई है। जबकि धान की फसल के लिए 650-700 मिमी औसत बारिश होनी चाहिए। कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरडी यादव बताते हैं कि सितंबर के अंत तक धान की कई प्रजातियां पकने की तरफ पहुंच जाती हैं। ऐसे में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास होना चाहिए। इससे धान एकदम नहीं पकता है और दाने को विकसित होने का पूरा समय मिलता है। वर्तमान में तापमान इसके विपरीत है। अधिकतम तापमान 35 से 36 डिग्री के बीच बना हुआ है, इससे दाना जल्द ही सूख जाएगा और पूर्ण विकसित नहीं हो पाएगा। उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
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सिंचाई ने भी बढ़ाई लागत
बारिश न होने पर किसान निजी संसाधनों से धान की सिंचाई कर रहे हैं। इससे धान की फसल की लागत बढ़ती जा रही है। एक हेक्टेयर धान की अगर बात करें तो इसमें लगभग छह से सात हजार रुपये की लागत सिंचाई के चलते बढ़ गई है।
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हाईलाइटर
-65 हजार हेक्टेयर है धान का क्षेत्रफल
-90 हजार से अधिक किसान करते हैं धान की खेती
-400 मिमी हुई है जून से अब तक बारिश
-650 मिमी होनी चाहिए धान के लिए औसत बारिश
इस बार धान की फसल के अनुसार बारिश कम हुई है। तापमान भी औसत से अधिक है। किसान धान की फसल को सूखने न दें। इससे काफी हद तक राहत मिलेगी। जल्द बारिश होने की भी उम्मीद जताई जा रही है।
डॉ. गगनदीप सिंह, जिला कृषि अधिकारी।