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‘रोटी बंद करि दई, तोऊ शराब न छोड़ी’

Tue, 07 Jul 2015 02:28 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला अागरा।
ब्यूरो, अमर उजाला अागरा। Updated Tue, 07 Jul 2015 02:28 AM IST
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women arise voise against liqueur
काह बताएं, हमने तो भोत कोशिश कर लई। पर, मर्द शराब छोड़वे कूं तैयार न होत। हम इन पे कित्ती नजर रखें। चार-चार दिना के काजे रोटी तक बंद कर दई। तोऊ कोऊ असर न पड़ौ। फिर मही पहुंच जात हैं। जै शराब बिकवो बंद होये, तमई कछु हौय सकतू है।
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खंदौली के लालगढ़ी में एक गली के बाहर महिलाओं के झुंड के साथ खड़ी उर्मिला का कुछ ऐसा ही दर्द है। वह चीख-चीख कर शराब की बिक्री पर रोक लगाने की मांग कर रही है। उसका कहना है कि जब शराब बिकेगी ही नहीं तो लोग पिएंगे कैसे। उर्मिला ही नहीं, गांव की अधिकांश महिलाओं का भी यही मत है। इधर, गांव के बीचोबीच स्थित कन्हैया लाल के घर में 24 घंटे बाद भी करुण-क्रंदन थमा नहीं है। रविवार को क्षेत्र में जहरीली शराब के पीने से हुईं तीन मौतों में एक कन्हैया लाल भी था। उसकी मौत के बाद गांव में मातमी सन्नाटा है। हालांकि, गलियों के नुक्कड़ पर जगह-जगह महिलाओं और पुरुषों के अलग-अलग झुंड तो लगे रहे लेकिन मानो जहरीली शराब के घटनाक्रम ने उनके दिमाग को सुन्न कर दिया हो।
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बता दें कि शनिवार शाम को लालगढ़ी में पांच लोगों की जहरीली शराब पीने से हालत बिगड़ गई थी। सूचना के बाद इनके परिवार वाले इन्हें घर ले गए। मगर, कन्हैया लाल, सहदेव और भूरी सिंह की हालत ज्यादा बिगड़ी तो इन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। मगर, 52 वर्षीय कन्हैया लाल को नहीं बचाया जा सका। सहदेव की हालत अभी भी ठीक नहीं है। उसके बेटे रमन का कहना है कि पिता की आंखों की रोशनी चली गई है। उसके घर ग्रामीणों का जमघट लगा है। जैसे ही कोई अस्पताल से सहदेव को देखकर घर पहुंचता है तो ग्रामीण उसे घेर लेते हैं।
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वहीं, मौत के मुंह से लौटे भूरी सिंह को इलाज के बाद परिवारीजन सोमवार को घर ले आए। मगर, जहरीली शराब ने उसकी आवाज छीन ली है। आर्थिक स्थिति ठीक न होने पर उसके बेटे कुलदीप को पिता की जान बचाने के लिए कर्ज लेना पड़ा है। गांवों में सोमवार को जहरीली शराब को लेकर ही चर्चा होती रही। बता दें कि जहरीली शराब का शिकार हुए लोगों की आर्थिक स्थिति ज्यादा ठीक नहीं है। खेती नाममात्र की है। छोटा-मोटा कामकाज करके गुजर-बसर कर रहे हैं।
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