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शिक्षकों को समन, हाईकोर्ट में हाेंगे बयान
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Sun, 06 Sep 2015 01:52 AM IST
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डा. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय के फर्जी डिग्री प्रकरण के आरोपियों पर एसआईटी ने शिकंजा कस दिया है। हाईकोर्ट के आदेश पर उन सभी शिक्षकों को समन भेजा जा रहा है, जिन्होंने इस पद को हासिल करने में बीएड की फर्जी डिग्री का सहारा लिया था। इनको तिथि देकर लखनऊ बुलाया जा रहा है। हाईकोर्ट में उनके बयान दर्ज कराए जाएंगे। समन मिलने से जलसाजों में खलबली मची हुई है।
एसआईटी ने विश्वविद्यालय के गोपनीय विभाग में बीएड 2004-10 तक के रिकार्ड खंगाले। पेज पर ओवर राइटिंग, स्कैनिंग के जरिये फर्जी छात्राें का रिकार्ड जनरेट किया हुआ मिला। एसआईटी की पड़ताल में संबंधित डिग्री कालेज में अभ्यर्थियाें का रिकार्ड नहीं था। सैकड़ों की संख्या में फर्जी निकलीं। एसआईटी ने ये रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की। सूत्र बताते हैं कि चार सितंबर को कोर्ट ने आरोपियों को समन भेजने का आदेश दिया। इस पर एसआईटी ने इन शिक्षकों को हाईस्कूल से बीएड तक की मार्कशीट, प्रवेश पत्र, फीस स्लिप, टीसी के साथ बीटीसी प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, ज्वाइनिंग लेटर जैसे तमाम दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने को कहा है।
आगरा में 1400 शिक्षकों को समन
आगरा में 1400 सहायक अध्यापक शक के दायरे में हैं। यह सभी डा. बीआरए विश्वविद्यालय से बीएड धारक थे। एसआईटी ने बीएसए से इनका शैक्षणिक रिकार्ड तलब किया था। जांच में अधिकांश की मार्कशीट फर्जी पाई गई।
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न आने पर कोर्ट लेगा संज्ञान
बयान दर्ज न करने वालों की शिकायत हाईकोर्ट में की जाएगी। फिर कोर्ट ही कार्रवाई तय करेगा। शिक्षकाें को भेजे गए समन में एसआईटी ने इसकी साफ चेतावनी दी है।
घनघनाने लगे जालसाजों के फोन
- समन आते ही शिक्षकाें में हड़कंप मचा हुआ है। फोन कर अपने रहनुमाआें से बात भी की जा रही है। सूत्र बताते हैं कि ऐसे कुछ शिक्षकों ने खंदारी कैंपस परिसर पहुंच माफिया के एक साथी से बात भी की। बताया गया है कि उसने कुछ न होने की बात कहकर लौटा दिया।
क्या है मामला
- डा. बीआर अंबेडकर विवि के नाम से 25 हजार से अधिक बीएड की फर्जी मार्कशीट बांट दीं। बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकाें की नियुक्ति में फर्जी डिग्री वाले बाजी मार गए। मैनपुरी के सुनील कुमार का एक परिचित भी सरकारी नौकरी पा गया, जबकि उसने स्नातक, बीएड तक नहीं की। धांधली की संभावना पर सुनील ने जनहित याचिका दायर की। इसको संज्ञान में लेकर हाईकोर्ट ने अपनी देखरेख में एसआईटी को जांच के आदेश दिए थे।
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एसआईटी ने विश्वविद्यालय के गोपनीय विभाग में बीएड 2004-10 तक के रिकार्ड खंगाले। पेज पर ओवर राइटिंग, स्कैनिंग के जरिये फर्जी छात्राें का रिकार्ड जनरेट किया हुआ मिला। एसआईटी की पड़ताल में संबंधित डिग्री कालेज में अभ्यर्थियाें का रिकार्ड नहीं था। सैकड़ों की संख्या में फर्जी निकलीं। एसआईटी ने ये रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की। सूत्र बताते हैं कि चार सितंबर को कोर्ट ने आरोपियों को समन भेजने का आदेश दिया। इस पर एसआईटी ने इन शिक्षकों को हाईस्कूल से बीएड तक की मार्कशीट, प्रवेश पत्र, फीस स्लिप, टीसी के साथ बीटीसी प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, ज्वाइनिंग लेटर जैसे तमाम दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने को कहा है।
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आगरा में 1400 शिक्षकों को समन
आगरा में 1400 सहायक अध्यापक शक के दायरे में हैं। यह सभी डा. बीआरए विश्वविद्यालय से बीएड धारक थे। एसआईटी ने बीएसए से इनका शैक्षणिक रिकार्ड तलब किया था। जांच में अधिकांश की मार्कशीट फर्जी पाई गई।
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न आने पर कोर्ट लेगा संज्ञान
बयान दर्ज न करने वालों की शिकायत हाईकोर्ट में की जाएगी। फिर कोर्ट ही कार्रवाई तय करेगा। शिक्षकाें को भेजे गए समन में एसआईटी ने इसकी साफ चेतावनी दी है।
घनघनाने लगे जालसाजों के फोन
- समन आते ही शिक्षकाें में हड़कंप मचा हुआ है। फोन कर अपने रहनुमाआें से बात भी की जा रही है। सूत्र बताते हैं कि ऐसे कुछ शिक्षकों ने खंदारी कैंपस परिसर पहुंच माफिया के एक साथी से बात भी की। बताया गया है कि उसने कुछ न होने की बात कहकर लौटा दिया।
क्या है मामला
- डा. बीआर अंबेडकर विवि के नाम से 25 हजार से अधिक बीएड की फर्जी मार्कशीट बांट दीं। बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकाें की नियुक्ति में फर्जी डिग्री वाले बाजी मार गए। मैनपुरी के सुनील कुमार का एक परिचित भी सरकारी नौकरी पा गया, जबकि उसने स्नातक, बीएड तक नहीं की। धांधली की संभावना पर सुनील ने जनहित याचिका दायर की। इसको संज्ञान में लेकर हाईकोर्ट ने अपनी देखरेख में एसआईटी को जांच के आदेश दिए थे।