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प्रवेश से लेकर परीक्षा तक में प्रबंधक का दखल
प्रवेश से लेकर परीक्षा तक में प्रबंधक का दखल
Updated Wed, 18 Jan 2017 12:10 AM IST
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काली सूची में शामिल 17 कालेज भी बने सेंटर
- फोटो : अमर उजाला
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डा. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध कालेजों में मानक के अनुरूप शिक्षक नहीं है। पढ़ाई चौपट है। निजी कालेज के प्राचार्यों ने मंगलवार को खंदारी कैंपस स्थित जेपी सभागार में कुलपति से हुए संवाद में यही बातें बताईं।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों को वेतन बेहद कम दिया जाता है। एक प्राचार्य-शिक्षक के शैक्षणिक रिकार्ड कई कालेजों में लगे हैं। प्रवेश से लेकर परीक्षा तक में प्रबंधक का दखल रहता है। नकल समेत अन्य अनैतिक कार्यों का दबाव बनाया जाता है। विश्वविद्यालय से पत्राचार प्राचार्य के नाम से होता है, लेकिन जवाब प्रबंधक जारी करते हैं। इसमें तमाम गलत जानकारियां दी जाती हैं। कुलपति ने इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए कार्य योजना बनाने की बात कही। उन्होंने प्राचार्यों से कहा कि कैसी भी धांधली और अव्यवस्था की शिकायत ऑनलाइन या फिर गोपनीय पत्र के जरिये कर सकते हैं।
ये दिए सुझाव
- जुलाई में ही प्रवेश सीटों का विवरण मंगाया जाए, जिससे परीक्षा तक प्रवेश लेना बंद हो
- नियमानुसार शिक्षकों को वेतन मिले और यह सीधे खातों में आए
- छात्रों की 75 फीसदी उपस्थिति पर ही परीक्षा देने दी जाए।
निजी कालेज संचालकों का हंगामा, नोकझोंक
आगरा। निजी कालेज संचालकों ने जेपी सभागार के बाहर जमकर हंगामा किया। कुलपति से उनकी तीखी नोकझोंक हुई। मौके पर आई पुलिस ने कालेज संचालकों को मीटिंग से बाहर निकाला। तब संचालक बाहर धरने पर बैठ गए और नारेबाजी की। सेल्फ फाइनेंस कालेज एसोसिएशन ने कुलपति पर गंभीर आरोप भी लगाए। अध्यक्ष बृजेश चौधरी ने कहा कि विश्वविद्यालय पर करीब 900 निजी कालेजों के फीस के तौर पर 500 करोड़ रुपये बकाया हैं। हाईकोर्ट से केस जीतने के बाद इस संदर्भ में कुलपति से मिलने गए थे। विश्वविद्यालय के पीआरओ डा. गिरिजाशंकर शर्मा का कहना है कि कुलपति ने संवाद में सिर्फ प्राचार्यों को बुलाया था, प्रबंधकों को नहीं। इनको अन्य दिन के लिए समय दिया गया था। उन्होंने जबरन प्रवेश कर हंगामा किया।
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उन्होंने कहा कि शिक्षकों को वेतन बेहद कम दिया जाता है। एक प्राचार्य-शिक्षक के शैक्षणिक रिकार्ड कई कालेजों में लगे हैं। प्रवेश से लेकर परीक्षा तक में प्रबंधक का दखल रहता है। नकल समेत अन्य अनैतिक कार्यों का दबाव बनाया जाता है। विश्वविद्यालय से पत्राचार प्राचार्य के नाम से होता है, लेकिन जवाब प्रबंधक जारी करते हैं। इसमें तमाम गलत जानकारियां दी जाती हैं। कुलपति ने इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए कार्य योजना बनाने की बात कही। उन्होंने प्राचार्यों से कहा कि कैसी भी धांधली और अव्यवस्था की शिकायत ऑनलाइन या फिर गोपनीय पत्र के जरिये कर सकते हैं।
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ये दिए सुझाव
- जुलाई में ही प्रवेश सीटों का विवरण मंगाया जाए, जिससे परीक्षा तक प्रवेश लेना बंद हो
- नियमानुसार शिक्षकों को वेतन मिले और यह सीधे खातों में आए
- छात्रों की 75 फीसदी उपस्थिति पर ही परीक्षा देने दी जाए।
निजी कालेज संचालकों का हंगामा, नोकझोंक
आगरा। निजी कालेज संचालकों ने जेपी सभागार के बाहर जमकर हंगामा किया। कुलपति से उनकी तीखी नोकझोंक हुई। मौके पर आई पुलिस ने कालेज संचालकों को मीटिंग से बाहर निकाला। तब संचालक बाहर धरने पर बैठ गए और नारेबाजी की। सेल्फ फाइनेंस कालेज एसोसिएशन ने कुलपति पर गंभीर आरोप भी लगाए। अध्यक्ष बृजेश चौधरी ने कहा कि विश्वविद्यालय पर करीब 900 निजी कालेजों के फीस के तौर पर 500 करोड़ रुपये बकाया हैं। हाईकोर्ट से केस जीतने के बाद इस संदर्भ में कुलपति से मिलने गए थे। विश्वविद्यालय के पीआरओ डा. गिरिजाशंकर शर्मा का कहना है कि कुलपति ने संवाद में सिर्फ प्राचार्यों को बुलाया था, प्रबंधकों को नहीं। इनको अन्य दिन के लिए समय दिया गया था। उन्होंने जबरन प्रवेश कर हंगामा किया।
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