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हास्टल के इर्द-गिर्द ही छिपा है तोशी की हत्या का राज
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Wed, 09 Sep 2015 01:56 AM IST
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बिचपुरी स्थित आरबीएस इंजीनियरिंग कालेज के गर्ल्स हास्टल के कमरा नंबर 122 में एमटेक (फर्स्ट सेमेस्टर) की छात्रा तोशी सेठ की हत्या का राज हास्टल के इर्द-गिर्द ही छिपा हो सकता है। हास्टल में बाहरी व्यक्ति का आना प्रतिबंधित है। स्टाफ के अलावा कोई और प्रवेश नहीं कर सकता है। पुलिस का कहना है कि तमाम तथ्यों को लेकर हास्टल प्रशासन से पूछताछ की जा रही है। फोरेंसिक टीम ने साक्ष्य भी जुटाए हैं। उधर, घटना के बाद से छात्राएं सहमी हुई हैं। हास्टल प्रशासन कुछ नहीं बोल रहा है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तोशी की हत्या की पुष्टि होने के बाद मंगलवार शाम तकरीबन छह बजे फोरेंसिक टीम हास्टल पहुंची। कमरा नंबर 122 हास्टल के भूतल पर बना हुआ है। कमरे को खोला गया। बेड पर कुर्सी रखी मिली। वहीं टेबल पर लैपटॉप, केबल, डोंगल, डायरी, पानी से भरी बोतल रखी हुई थी। इन सबसे से फिंगर प्रिंट लिए गए। इसके अलावा फांसी लगाने की पुष्टि के लिए बेड से पंखे की ऊंचाई की पड़ताल की। पुलिस को घटना वाले दिन कमरा खुला मिला था। छात्राओं ने पुलिस को बताया था कि कमरा बंद देखकर उनके जोर से धक्का देने पर कमरा खुल गया था। इसकी जांच के लिए कमरे की अंदर से कुंडी लगाकर देखी गई और फिर धक्का दिया गया लेकिन कमरा नहीं खुला। इससे छात्राओं की बात पर संदेह हो गया।
पुलिस ने छात्रा की डायरी, पर्स, किताबों को भी चेक किया। मगर इसमें कुछ भी नहीं मिला। तकरीबन एक घंटे की जांच पड़ताल के बाद कमरे पर ताला लगा दिया गया।
इतनी सख्ती, फिर भी कत्ल
हास्टल प्रशासन का कहना है कि यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। हास्टल में दो गेट बने हुए हैं, लेकिन प्रवेश के लिए एक ही खुला है। घटना वाले दिन दो छात्राओं के घर से परिवारीजन आए थे, लेकिन वह बाहर से ही कुछ सामान देने के बाद चले गए। पांच बजे के बाद छात्राओं को बाहर जाने की इजाजत नहीं है।
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बाक्स
हेलो, मम्मी...मम्मी...
घटना वाले दिन दस बजे तोशी ने हरिद्वार मेें रहने वाले अपने नाना रामदास से बात की थी। इसके बाद मां मीरा सेठ को भी फोन मिलाया था। हालचाल पूछने के बाद फोन काट दिया था। इस पर मां ने 11:30 बजे फिर फोन किया। फोन लगा भी, लेकिन उस पर हेलो मम्मी, मम्मी की आवाज सुनाई दी। इसके बाद फोन आउट आफ कवरेज एरिया में आ गया। तकरीबन रात 9:30 बजे मां ने छोटी बेटी यति को बताया। इस पर यति ने हास्टल में रहने वाली छात्रा दीक्षा को फोन किया था कि तोशी से बात करा दे। दीक्षा ही सबसे पहले दरवाजे के पास पहुंची थी।
बैटरी निकालकर फेंकी
पुलिस ने कमरे से दो मोबाइल बरामद किए हैं। एक मोबाइल की बैटरी पलंग पर पड़ी थी। इससे साफ है कि हत्या करने वालों ने उससे मोबाइल छीनकर उसकी बैटरी निकालकर फेंकी होगी। पिता ने बताया कि दूसरा मोबाइल काफी पुराना था। पुलिस ने दोनों मोबाइलों को कब्जे में ले लिया है।
अब मैं अपनी बहन को यहां नहीं पढ़ाएंगे
तोशी ने मैनपुरी की शिवांगी के साथ जयपुर से बीटेक किया था। उसी के कहने पर यहां एडमीशन लिया। पढ़ाई शुरू न होने से शिवांगी कालेज नहीं आई थी। घटना की जानकारी पर शिवांगी के भाई आनंद आए। उनका कहना था कि अब वह शिवांगी को यहां नहीं पढ़ने देेंगे। एडमीशन कैंसिल कराएंगे।
हास्टल में ऐसी पहली वारदात
आरबीएस इंजीनियरिंग कालेज का राजकुमारी इंद्र कुमारी इंजीनियरिंग गर्ल्स हास्टल वर्ष 2008 में बना था। इसमें 89 छात्राएं रहती हैं। इनमें बीटेक, बी फार्मा, आर्किटेक्चर और एमटेक की छात्राएं हैं। फाइनल ईयर की 20, तृतीय वर्ष की 13, द्वितीय वर्ष की 28, प्रथम वर्ष की 24 और एमटेक की दो छात्राएं ही रह रही थीं। इसके अलावा वार्डन डा. श्रद्धा सिंह, डा. प्रतिमा सिंह, डा. बीरबल सिंह, मेट्रन ऊषा सिंह हैं। दिन में चौकीदार रामकेवल, रामशरण और रात मेें हरि सिंह और सलीम की ड्यूटी रहती है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ओमवती और राजकुमारी की ड्यूटी रहती है। हास्टल में हत्या की पहली घटना सामने आई है।
छात्राएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रहीं
तोशी की हत्या की घटना से छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल खड़ा हो गया है। घटना वाले दिन रविवार को ज्यादातर छात्राएं अपने कमरे में ही थीं। इसके बावजूद कत्ल की वारदात हुई। कुछ छात्राओं ने कहा कि अब तो डर लगने लगा है।
कहीं रैगिंग तो नहीं
आगरा। इंजीनियर बनने का ख्वाब लेकर इलाहाबाद से राजा बलवंत सिंह कालेज में पढ़ने आई तोशी पिता का सहारा बनना चाहती थी। उसे यहां आए महज पांच दिन ही तो हुए थे। इन पांच दिनों में ऐसा क्या हुआ कि उसकी हत्या कर दी गई। हत्या के पीछे कहीं इंजीनियरिंग कालेजों में नये पंछियों के साथ होने वाली रैगिंग तो नहीं? पुलिस की जांच का यह भी एक बिंदु है। एसएसपी राजेश डी मोड़क ने बताया कि हत्या के पीछे रैगिंग से इनकार नहीं किया जा सकता है लेकिन अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा। सभी पहलुओं से छानबीन की जा रही है। कमरे में साक्ष्य मिले हैं। हास्टल की वार्डन और स्टाफ से लेकर चौकीदार सभी से पूछताछ की जाएगी।
अंतर्मुखी थी तोशी
तोशी अंर्तमुखी स्वभाव की थी। जल्दी ही किसी से घुलती मिलती नहीं थी। ऐसे में पांच दिन में उसकी हॉस्टल में किसी से दोस्ती होने का सवाल भी नहीं उठता है। मैनपुरी मेें रहने वाली उसकी सहेली शिवांगी के भाई ने बताया कि तोशी का एडमीशन उन्होंने कराया था। वह शांत स्वभाव की थी। किसी से ज्यादा बातचीत भी नहीं करती थी।
कातिल ने बड़ी सफाई से मिटाए सुबूत
आगरा। तोशी सेठ के शव का पोस्टमार्टम अगर ठीक से न हुआ होता, तो हत्या की बात राज ही रहती। तेज दिमाग कातिलों ने इतनी सफाई से सुबूत मिटाए कि पहली नजर में तो पुलिस की आंखें भी धोखा खा गईं और हत्या को आत्महत्या समझ बैठी।
टीम को हास्टल के कमरा नंबर 122 से न तो संघर्ष के निशान मिले, न ही कोई और साक्ष्य बरामद हो पाया। जिस बेड पर कुर्सी रखी थी, उसकी चादर भी सिकुड़ी नहीं थी। इससे लग रहा है कि क्राइम सीन से कुछ छेड़छाड़ की गई। क्योंकि तोशी के शव को उतारने के दौरान चादर हटी होगी।
जिस कुर्सी की मदद से आत्महत्या की बात बताई गई, वह भी बेड पर रखी थी। तोशी की किताब और खाना तक ज्यों का त्यों रखा था। कातिल बड़ी सफाई से क्राइम सीन को ऐसा बनाकर गए जैसे कुछ हुआ ही न हो। दुपट्टे से लटकी तोशी की आंखों पर चश्मा देखकर तो कोई भी यही कहेगा कि उसने सुसाइड किया है?
क्योंकि हत्या होती तो चश्मा आंखों से हट जाता? लेकिन ऐसा नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हत्या साफ हो जाने के बाद माना जा रहा है कि हत्यारों ने शव को चश्मा पहना दिया।
आत्महत्या क्यों नहीं ?
1. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह गला घुटना नहीं, घोटा जाना आया है।
2. फोरेंसिक जांच से पता चला है कि तोशी का कमरा बंद नहीं, खुला था।
3. अगर आत्महत्या करती तो कोई सुसाइड नोट छोड़कर जाती।
4. उसके परिवार का कहना है कि वह किसी तनाव में भी नहीं थी।
क्यों है हत्या
1. पोस्टमार्टम रिपोर्ट स्पष्ट है, तोशी की हत्या की गई।
2. पोस्टमार्टम में उसके पैर पर चोट के निशान मिले हैं।
3. वह कमरे का गेट बंद रखती थी, लेकिन यह खुला हुआ मिला।
4. हास्टल प्रशासन का झूठ बोलना भी हत्या की ओर इशारा करता है।
फिर से होगी फोरेंसिक जांच
फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम एक बार मौका मुआयना करके आ चुकी है। इसके बाद कमरे का गेट बंद करा दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि कल या परसों फिर से पड़ताल की जा सकती है।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तोशी की हत्या की पुष्टि होने के बाद मंगलवार शाम तकरीबन छह बजे फोरेंसिक टीम हास्टल पहुंची। कमरा नंबर 122 हास्टल के भूतल पर बना हुआ है। कमरे को खोला गया। बेड पर कुर्सी रखी मिली। वहीं टेबल पर लैपटॉप, केबल, डोंगल, डायरी, पानी से भरी बोतल रखी हुई थी। इन सबसे से फिंगर प्रिंट लिए गए। इसके अलावा फांसी लगाने की पुष्टि के लिए बेड से पंखे की ऊंचाई की पड़ताल की। पुलिस को घटना वाले दिन कमरा खुला मिला था। छात्राओं ने पुलिस को बताया था कि कमरा बंद देखकर उनके जोर से धक्का देने पर कमरा खुल गया था। इसकी जांच के लिए कमरे की अंदर से कुंडी लगाकर देखी गई और फिर धक्का दिया गया लेकिन कमरा नहीं खुला। इससे छात्राओं की बात पर संदेह हो गया।
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पुलिस ने छात्रा की डायरी, पर्स, किताबों को भी चेक किया। मगर इसमें कुछ भी नहीं मिला। तकरीबन एक घंटे की जांच पड़ताल के बाद कमरे पर ताला लगा दिया गया।
इतनी सख्ती, फिर भी कत्ल
हास्टल प्रशासन का कहना है कि यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। हास्टल में दो गेट बने हुए हैं, लेकिन प्रवेश के लिए एक ही खुला है। घटना वाले दिन दो छात्राओं के घर से परिवारीजन आए थे, लेकिन वह बाहर से ही कुछ सामान देने के बाद चले गए। पांच बजे के बाद छात्राओं को बाहर जाने की इजाजत नहीं है।
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हेलो, मम्मी...मम्मी...
घटना वाले दिन दस बजे तोशी ने हरिद्वार मेें रहने वाले अपने नाना रामदास से बात की थी। इसके बाद मां मीरा सेठ को भी फोन मिलाया था। हालचाल पूछने के बाद फोन काट दिया था। इस पर मां ने 11:30 बजे फिर फोन किया। फोन लगा भी, लेकिन उस पर हेलो मम्मी, मम्मी की आवाज सुनाई दी। इसके बाद फोन आउट आफ कवरेज एरिया में आ गया। तकरीबन रात 9:30 बजे मां ने छोटी बेटी यति को बताया। इस पर यति ने हास्टल में रहने वाली छात्रा दीक्षा को फोन किया था कि तोशी से बात करा दे। दीक्षा ही सबसे पहले दरवाजे के पास पहुंची थी।
बैटरी निकालकर फेंकी
पुलिस ने कमरे से दो मोबाइल बरामद किए हैं। एक मोबाइल की बैटरी पलंग पर पड़ी थी। इससे साफ है कि हत्या करने वालों ने उससे मोबाइल छीनकर उसकी बैटरी निकालकर फेंकी होगी। पिता ने बताया कि दूसरा मोबाइल काफी पुराना था। पुलिस ने दोनों मोबाइलों को कब्जे में ले लिया है।
अब मैं अपनी बहन को यहां नहीं पढ़ाएंगे
तोशी ने मैनपुरी की शिवांगी के साथ जयपुर से बीटेक किया था। उसी के कहने पर यहां एडमीशन लिया। पढ़ाई शुरू न होने से शिवांगी कालेज नहीं आई थी। घटना की जानकारी पर शिवांगी के भाई आनंद आए। उनका कहना था कि अब वह शिवांगी को यहां नहीं पढ़ने देेंगे। एडमीशन कैंसिल कराएंगे।
हास्टल में ऐसी पहली वारदात
आरबीएस इंजीनियरिंग कालेज का राजकुमारी इंद्र कुमारी इंजीनियरिंग गर्ल्स हास्टल वर्ष 2008 में बना था। इसमें 89 छात्राएं रहती हैं। इनमें बीटेक, बी फार्मा, आर्किटेक्चर और एमटेक की छात्राएं हैं। फाइनल ईयर की 20, तृतीय वर्ष की 13, द्वितीय वर्ष की 28, प्रथम वर्ष की 24 और एमटेक की दो छात्राएं ही रह रही थीं। इसके अलावा वार्डन डा. श्रद्धा सिंह, डा. प्रतिमा सिंह, डा. बीरबल सिंह, मेट्रन ऊषा सिंह हैं। दिन में चौकीदार रामकेवल, रामशरण और रात मेें हरि सिंह और सलीम की ड्यूटी रहती है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ओमवती और राजकुमारी की ड्यूटी रहती है। हास्टल में हत्या की पहली घटना सामने आई है।
छात्राएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रहीं
तोशी की हत्या की घटना से छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल खड़ा हो गया है। घटना वाले दिन रविवार को ज्यादातर छात्राएं अपने कमरे में ही थीं। इसके बावजूद कत्ल की वारदात हुई। कुछ छात्राओं ने कहा कि अब तो डर लगने लगा है।
कहीं रैगिंग तो नहीं
आगरा। इंजीनियर बनने का ख्वाब लेकर इलाहाबाद से राजा बलवंत सिंह कालेज में पढ़ने आई तोशी पिता का सहारा बनना चाहती थी। उसे यहां आए महज पांच दिन ही तो हुए थे। इन पांच दिनों में ऐसा क्या हुआ कि उसकी हत्या कर दी गई। हत्या के पीछे कहीं इंजीनियरिंग कालेजों में नये पंछियों के साथ होने वाली रैगिंग तो नहीं? पुलिस की जांच का यह भी एक बिंदु है। एसएसपी राजेश डी मोड़क ने बताया कि हत्या के पीछे रैगिंग से इनकार नहीं किया जा सकता है लेकिन अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा। सभी पहलुओं से छानबीन की जा रही है। कमरे में साक्ष्य मिले हैं। हास्टल की वार्डन और स्टाफ से लेकर चौकीदार सभी से पूछताछ की जाएगी।
अंतर्मुखी थी तोशी
तोशी अंर्तमुखी स्वभाव की थी। जल्दी ही किसी से घुलती मिलती नहीं थी। ऐसे में पांच दिन में उसकी हॉस्टल में किसी से दोस्ती होने का सवाल भी नहीं उठता है। मैनपुरी मेें रहने वाली उसकी सहेली शिवांगी के भाई ने बताया कि तोशी का एडमीशन उन्होंने कराया था। वह शांत स्वभाव की थी। किसी से ज्यादा बातचीत भी नहीं करती थी।
कातिल ने बड़ी सफाई से मिटाए सुबूत
आगरा। तोशी सेठ के शव का पोस्टमार्टम अगर ठीक से न हुआ होता, तो हत्या की बात राज ही रहती। तेज दिमाग कातिलों ने इतनी सफाई से सुबूत मिटाए कि पहली नजर में तो पुलिस की आंखें भी धोखा खा गईं और हत्या को आत्महत्या समझ बैठी।
टीम को हास्टल के कमरा नंबर 122 से न तो संघर्ष के निशान मिले, न ही कोई और साक्ष्य बरामद हो पाया। जिस बेड पर कुर्सी रखी थी, उसकी चादर भी सिकुड़ी नहीं थी। इससे लग रहा है कि क्राइम सीन से कुछ छेड़छाड़ की गई। क्योंकि तोशी के शव को उतारने के दौरान चादर हटी होगी।
जिस कुर्सी की मदद से आत्महत्या की बात बताई गई, वह भी बेड पर रखी थी। तोशी की किताब और खाना तक ज्यों का त्यों रखा था। कातिल बड़ी सफाई से क्राइम सीन को ऐसा बनाकर गए जैसे कुछ हुआ ही न हो। दुपट्टे से लटकी तोशी की आंखों पर चश्मा देखकर तो कोई भी यही कहेगा कि उसने सुसाइड किया है?
क्योंकि हत्या होती तो चश्मा आंखों से हट जाता? लेकिन ऐसा नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हत्या साफ हो जाने के बाद माना जा रहा है कि हत्यारों ने शव को चश्मा पहना दिया।
आत्महत्या क्यों नहीं ?
1. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह गला घुटना नहीं, घोटा जाना आया है।
2. फोरेंसिक जांच से पता चला है कि तोशी का कमरा बंद नहीं, खुला था।
3. अगर आत्महत्या करती तो कोई सुसाइड नोट छोड़कर जाती।
4. उसके परिवार का कहना है कि वह किसी तनाव में भी नहीं थी।
क्यों है हत्या
1. पोस्टमार्टम रिपोर्ट स्पष्ट है, तोशी की हत्या की गई।
2. पोस्टमार्टम में उसके पैर पर चोट के निशान मिले हैं।
3. वह कमरे का गेट बंद रखती थी, लेकिन यह खुला हुआ मिला।
4. हास्टल प्रशासन का झूठ बोलना भी हत्या की ओर इशारा करता है।
फिर से होगी फोरेंसिक जांच
फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम एक बार मौका मुआयना करके आ चुकी है। इसके बाद कमरे का गेट बंद करा दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि कल या परसों फिर से पड़ताल की जा सकती है।