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निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर ऐसे हो रही मरीजों से ‘लूट’
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Wed, 22 Nov 2017 01:40 PM IST
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hospital
- फोटो : अमर उजाला
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गुरुग्राम में डेंगू के मरीज का 16 दिन में करीब 18 लाख का बिल। जी हां ये कोई मजाक नहीं बल्कि सच्चाई है। आपको जानकर हैरानी होगी कि निजी अस्पताल किस तरह मरीजों से इलाज के नाम पर लूट कर रहे हैं।
गुरुग्राम में सामने आई इस ठगी पर केंद्र सरकार की आंखें जरूर खुलीं। वैसे इस मामले में अपना शहर आगरा भी पीछे नहीं है। यहां भी निजी अस्पताल इलाज के नाम पर मरीजों को लूट रहे हैं।
यह एक कड़वी हकीकत है कि पूरे देश में लगभग हर प्राइवेट हॉस्पिटल इलाज के नाम पर मरीजों को लूट रहे हैं। इस मामले में अगर आगरा की बात करें तो यहां भी यही हाल है।
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इनकी मनमानी पर सरकार और स्वास्थ्य विभाग का कोई नियंत्रण नहीं है। शिकायत के बावजूद हॉस्पिटल के बिल किस आधार पर वसूले जाते हैं, इसकी पड़ताल तक नहीं होती।
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गुरुग्राम में सामने आई इस ठगी पर केंद्र सरकार की आंखें जरूर खुलीं। वैसे इस मामले में अपना शहर आगरा भी पीछे नहीं है। यहां भी निजी अस्पताल इलाज के नाम पर मरीजों को लूट रहे हैं।
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यह एक कड़वी हकीकत है कि पूरे देश में लगभग हर प्राइवेट हॉस्पिटल इलाज के नाम पर मरीजों को लूट रहे हैं। इस मामले में अगर आगरा की बात करें तो यहां भी यही हाल है।
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इनकी मनमानी पर सरकार और स्वास्थ्य विभाग का कोई नियंत्रण नहीं है। शिकायत के बावजूद हॉस्पिटल के बिल किस आधार पर वसूले जाते हैं, इसकी पड़ताल तक नहीं होती।
ऐसे होती है वसूली
जिले में करीब 2500 हॉस्पिटल संचालित हैं। हॉस्पिटल का अनुमानित खर्र्च:अधिकांश हॉस्पिटलों में नर्सिंग स्टाफ, आईसीयू, चिकित्सकीय संसाधन और सुविधाएं काम चलाऊ हैं। इसके बावजूद इनकी फीस में कोई कमी नहीं। एक बार मरीज यहां आते हैं तो इन ठगों के चक्कर में बुरी तरह फंस जाते हैं।
डा. रविंद्र मोहन पचौरी, अध्यक्ष आईएमए का कहना है कि आईएमए मानकों का निरीक्षण हॉस्पिटलों की सूची तैयार कर रही है। इनको संस्था से प्रमाणपत्र मिलेगा। खर्चे हॉस्पिटल के बाहर दर्ज होंगे। किसी भी वसूली पर हेल्प लाइन नंबर जारी किया जाएगा।
वहीं डा. मुकेश वत्स, सीएमओ का कहना है कि प्राइवेट हॉस्पिटल में मरीज से ठगी होती है, या फिर उससे अनावश्यक चार्ज लिया गया है। विभाग में शिकायत कर सकते हैं। इसकी जांच कराई जाएगी।
डा. रविंद्र मोहन पचौरी, अध्यक्ष आईएमए का कहना है कि आईएमए मानकों का निरीक्षण हॉस्पिटलों की सूची तैयार कर रही है। इनको संस्था से प्रमाणपत्र मिलेगा। खर्चे हॉस्पिटल के बाहर दर्ज होंगे। किसी भी वसूली पर हेल्प लाइन नंबर जारी किया जाएगा।
वहीं डा. मुकेश वत्स, सीएमओ का कहना है कि प्राइवेट हॉस्पिटल में मरीज से ठगी होती है, या फिर उससे अनावश्यक चार्ज लिया गया है। विभाग में शिकायत कर सकते हैं। इसकी जांच कराई जाएगी।
ये लगता है चार्ज
डाक्टर का राउंड: 1000 रुपये प्रतिदिन
बेड: 600 से 2500 रुपये प्रतिदिन
आईसीयू: 3500 से 5000 रुपये प्रतिदिन
आक्सीजन: 800 से 1000 रुपये प्रतिदिन
वेंटीलेटर: 5000 रुपये प्रतिदिन
फाइल चार्ज: 500 से 1500 रुपये
नर्सिंग चार्ज: 500 से 1000 रुपये प्रतिदिन
ब्लड चार्ज: 300 से 800 रुपये
बेड: 600 से 2500 रुपये प्रतिदिन
आईसीयू: 3500 से 5000 रुपये प्रतिदिन
आक्सीजन: 800 से 1000 रुपये प्रतिदिन
वेंटीलेटर: 5000 रुपये प्रतिदिन
फाइल चार्ज: 500 से 1500 रुपये
नर्सिंग चार्ज: 500 से 1000 रुपये प्रतिदिन
ब्लड चार्ज: 300 से 800 रुपये