{"_id":"1c7f222023fdec5040067cb4572a53cf","slug":"the-official-was-bush-anil-yadav-s-history-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अधिकारी ने फाड़ी थी अनिल यादव की हिस्ट्रीशीट ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
अधिकारी ने फाड़ी थी अनिल यादव की हिस्ट्रीशीट
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Fri, 20 Nov 2015 02:18 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष पद से बर्खास्त किए गए अनिल यादव के गुनाहों की फेहरिस्त सामने आने के बाद यह भी साफ होने लगा है कि उसके जुर्म की कुंडली पर पर्दा कैसे डाला गया था? पुलिस सूत्रों का कहना है कि एक मुंशी ने जांच अधिकारी को बयान दे दिया है। इसमें बताया गया है कि न्यू आगरा थाना में हिस्ट्रीशीट 2013 में एक पीपीएस अधिकारी ने अपने हाथ से फाड़ी थी। सिर्फ इतना ही नहीं। इसके बाद वह रजिस्टर ही बदल दिया गया, जिसमें अनिल यादव की तमाम काली करतूत दर्ज थीं। इसमें कहीं पर अनिल यादव के नाम के आगे से अपराध का ब्योरा हटा दिया गया तो कहीं पर अपराध के आगे से उसका नाम।
अनिल के बर्खास्त होने के बाद पुलिस ने इसकी जांच शुरू की। सबसे हैरानी की बात यह रही कि शुरू में जांच में भी खेल हुआ। थाना पुलिस का स्टाफ कहने लगा कि यह हिस्ट्रीशीट 2005 में ही गायब हो गई थी। इसके बाद बताया गया कि इसे 2011 में रिकार्ड से हटाया गया। रजिस्टर में एक जगह लिखा भी गया कि मुकदमे समाप्त कर दिए गए हैं, इसके आगे 2011 लिखा था।
इस पर उस समय का स्टाफ और अधिकारी सकते में आ गए। इसके बाद हरीपर्वत सर्किल के ही एक थाना के मुंशी ने बयान दिया है कि हिस्ट्रीशीट 2013 में सत्ता के करीबी और अनिल यादव के दोस्त पीपीएस अधिकारी ने खुद फाड़ी थी। उधर, अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। एसएसपी पहले ही कह चुके हैं कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई तय की जाएगी।
विज्ञापन
आईपीएस ने दिया झूठा हलफनामा
पुलिस सूत्रों ने यह भी बताया कि इस मामले में एक आईजी ने हाईकोर्ट में झूठा हलफनामा पेश किया। उच्च न्यायालय ने अनिल यादव के आपराधिक इतिहास के बारे में पूछा था। इस पर आईपीएस ने जो हलफनामा दिया, उसमें न गुंडा एक्ट का जिक्र था और न ही हिस्ट्रीशीट का। अनिल के खिलाफ दर्ज डकैती जैसे संगीन केस भी छुपा लिए गए थे।
लाठीचार्ज भी कराया था अधिकारी ने
जिस अधिकारी का नाम हिस्ट्रीशीट फाड़ने में आ रहा है, उसने एक बार छात्रों पर लाठी भी चलवा दी थी। छात्र कमला नगर में अनिल यादव के घर के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। यह अधिकारी आगरा में अलग-अलग पदों पर लंबे समय तक तैनात रहा।
विज्ञापन
अनिल के बर्खास्त होने के बाद पुलिस ने इसकी जांच शुरू की। सबसे हैरानी की बात यह रही कि शुरू में जांच में भी खेल हुआ। थाना पुलिस का स्टाफ कहने लगा कि यह हिस्ट्रीशीट 2005 में ही गायब हो गई थी। इसके बाद बताया गया कि इसे 2011 में रिकार्ड से हटाया गया। रजिस्टर में एक जगह लिखा भी गया कि मुकदमे समाप्त कर दिए गए हैं, इसके आगे 2011 लिखा था।
विज्ञापन
इस पर उस समय का स्टाफ और अधिकारी सकते में आ गए। इसके बाद हरीपर्वत सर्किल के ही एक थाना के मुंशी ने बयान दिया है कि हिस्ट्रीशीट 2013 में सत्ता के करीबी और अनिल यादव के दोस्त पीपीएस अधिकारी ने खुद फाड़ी थी। उधर, अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। एसएसपी पहले ही कह चुके हैं कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई तय की जाएगी।
विज्ञापन
आईपीएस ने दिया झूठा हलफनामा
पुलिस सूत्रों ने यह भी बताया कि इस मामले में एक आईजी ने हाईकोर्ट में झूठा हलफनामा पेश किया। उच्च न्यायालय ने अनिल यादव के आपराधिक इतिहास के बारे में पूछा था। इस पर आईपीएस ने जो हलफनामा दिया, उसमें न गुंडा एक्ट का जिक्र था और न ही हिस्ट्रीशीट का। अनिल के खिलाफ दर्ज डकैती जैसे संगीन केस भी छुपा लिए गए थे।
लाठीचार्ज भी कराया था अधिकारी ने
जिस अधिकारी का नाम हिस्ट्रीशीट फाड़ने में आ रहा है, उसने एक बार छात्रों पर लाठी भी चलवा दी थी। छात्र कमला नगर में अनिल यादव के घर के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। यह अधिकारी आगरा में अलग-अलग पदों पर लंबे समय तक तैनात रहा।