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आगरा गैंग: नशे की दवाएं आतंकी संगठनों को बेचे जाने का शक, ड्रग विभाग कर रहा जांच
Fri, 25 Dec 2020 09:19 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 25 Dec 2020 09:19 AM IST
सार
- औषधि निरीक्षक नरेश मोहन दीपक ने बताया कि 2008 में एक रिपोर्ट आई थी कि आतंकी संगठन नशे की दवाइयां इस्तेमाल करते हैं। तस्करों के गोदाम से ऐसी प्रतिबंधित दवाइयां मिली हैं।
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तस्करों के गोदामों से बरामद हुईं नशे की दवाइयां
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा गैंग के तस्करों के घर मिलीं दवाइयां आतंकी संगठनों को भी बेचे जाने का शक ड्रग विभाग को है। इसकी वजह यह है कि जब्त की गईं प्रतिबंधित दवाइयों में से एक वह है, जिसके सॉल्ट के बारे में रिपोर्ट आ चुकी है कि इसका इस्तेमाल आतंकी संगठन करते हैं। यह ड्रग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित है। ड्रग विभाग का कहना है कि इस पर भी जांच कराई जा रही है।
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आगरा के औषधि निरीक्षक नरेश मोहन दीपक ने बताया कि 2008 में एक रिपोर्ट आई थी कि आतंकी संगठन नशे की दवाइयां इस्तेमाल करते हैं। चार साल पहले एक और रिपोर्ट आई, जिसमें बताया गया कि इंटरपोल ने संगठन बोको हरम के आतंकियों से नशे की दवा बरामद की। इसके अलावा मुंबई हमले में शामिल जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने भी ड्रग्स लिए थे, ऐसी भी एक रिपोर्ट आ चुकी है।
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इन सभी मामलों में वे प्रतिबंधित ड्रग्स ली गई थीं, जो तस्कर पंकज गुप्ता के घर से बरामद की गईं। हालांकि अभी तक ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है जिसके आधार पर कहा जा सके कि यहां से दवाएं आतंकी संगठन को भेजी गई हों, लेकिन इस बिंदु पर जांच होना जरूरी है। इसके लिए पुलिस से भी कहा गया है। इस पर एसएसपी बबलू कुमार का कहना है कि ड्रग तस्करी के सभी पहलुओं पर जांच चल रही है।
पांच दिन में साढ़े पांच करोड़ रुपये की दवाइयां बरामद
आगरा में पांच दिन के भीतर सात तस्करों की गिरफ्तारी और साढ़े पांच करोड़ की दवाइयों की बरामदगी के बाद पुलिस के रडार पर 50 और दवा कारोबारी आ गए हैं। इनके बारे में जानकारी गिरफ्तार तस्करों से पूछताछ में मिले हैं। तस्करों के मोबाइल में इनके नंबर और बातचीत का रिकॉर्ड मिला है।
तस्करों के घरों से इनकी फर्म के बिल मिले हैं। शक है कि ये नशे की दवाइयों और गर्भपात किटों को खरीदने और बेचने का कम करते हैं। तस्करों की तरह इन्होंने भी दिखावे के लिए दवा की फर्म खोल रखी हैं, असली काम तस्करी का ही है।
पंकज की तलाश में दिल्ली गई टीम
पंकज गुप्ता के दिल्ली में कई ठिकानों का पता चला है। उसकी तलाश में एक टीम दिल्ली भेजी गई है। उसकी पत्नी रीता गुप्ता, बेटी आकांक्षा और श्रुति भी फरार हैं। पुलिस को कानपुर के लाल बंगला निवासी सरदार हरप्रीत सिंह, अनिल और धीरज, आगरा के काला महल निवासी अनिल द्वारिका की भी तलाश है।
तस्करों के घरों से इनकी फर्म के बिल मिले हैं। शक है कि ये नशे की दवाइयों और गर्भपात किटों को खरीदने और बेचने का कम करते हैं। तस्करों की तरह इन्होंने भी दिखावे के लिए दवा की फर्म खोल रखी हैं, असली काम तस्करी का ही है।
पंकज की तलाश में दिल्ली गई टीम
पंकज गुप्ता के दिल्ली में कई ठिकानों का पता चला है। उसकी तलाश में एक टीम दिल्ली भेजी गई है। उसकी पत्नी रीता गुप्ता, बेटी आकांक्षा और श्रुति भी फरार हैं। पुलिस को कानपुर के लाल बंगला निवासी सरदार हरप्रीत सिंह, अनिल और धीरज, आगरा के काला महल निवासी अनिल द्वारिका की भी तलाश है।