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स्लाइड से मिला सुबूत, फिर जेल पहुंचा उदय स्वरूप
अमर उजाला ब्यूरो आगरा
Updated Fri, 13 May 2016 01:39 AM IST
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फोरेंसिक इंवेस्टिगेशन में मिसाल बनेगा नेहा शर्मा हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नेहा शर्मा हत्याकांड में आरोपी उदय स्वरूप एक साल दो महीने बाद फिर से जेल पहुंच गया। दोनों ही बार उस पर यह कार्रवाई फोरेंसिक साक्ष्य के आधार पर हुई है। पहले पुलिस ने उसे मौकेे से मिले उसके बाल की मैचिंग रिपोर्ट के आधार पर गिरफ्तार किया था। अब सीबीआई ने डीएनए परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर उसके खिलाफ दुराचार की धारा बढ़ाई। उसके खिलाफ दुराचार का सुबूत निकला एक स्लाइड से।
वह स्लाइड जिसमें जिला अस्पताल के डाक्टर कोई साक्ष्य नहीं ढूंढ पाए। आगरा की विधि विज्ञान प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों ने इसके परीक्षण से इनकार कर दिया था। सीबीआई ने उसी स्लाइड को हैदराबाद की फोरेंसिक साइंस लैब में भेजा। वहां स्लाइड से डीएनए रिकवर किया गया। इसके बाद डीएनए का उदय स्वरूप के डीएनए के साथ मिलान कराया गया। मिलान होते ही रेप का चार्ज बन गया।
दरअसल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रेप की बात नहीं थी। इसकी जांच के लिए स्लाइड बनाई गई थी। जिला अस्पताल के डाक्टरों ने परीक्षण के बाद रिपोर्ट दी कि इसमें कुछ नहीं है। फिर यह स्लाइड विधि विज्ञान प्रयोगशाला को भेजी गई। यहां वैज्ञानिकों ने कह दिया कि जिस स्लाइड का एक बार परीक्षण हो चुका, उसका दोबारा नहीं किया जाएगा। इसके चलते पुलिस ने चार्जशीट में हत्या के अलावा रेप की नहीं, रेप के प्रयास की धारा लगाई।
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सीबीआई ने डीएनए रिपोर्ट के आधार पर रेप की धारा बढ़ाई। इससे पहले जब इस वारदात में उसका नाम आया था तो आगरा पुलिस को सुबूत नहीं मिल रहा था। तब मौके से मिले बाल का परीक्षण आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला में किया गया था। हेयर मैचिंग रिपोर्ट उसके खिलाफ गई थी। उसकी गिरफ्तारी में यह मुख्य आधार रही थी। इस तरह दोनों बार उसके जेल जाने की वजह फोरेंसिक साक्ष्य बने हैं। विधि विज्ञान प्रयोगशाला में नेहा शर्मा हत्याकांड की अलग से फाइल बनाई गई है। इसे फोरेंसिक एविडेंस पर होने वाली सेमिनार में नजीर के रूप में रखा जाएगा।
- 15 मार्च 2013 को डीईआई में नेहा शर्मा की हत्या की गई।
- 22 अप्रैल 2013 को उदय स्वरूप और यशवीर संधू की गिरफ्तारी हुई।
- 15 जुलाई 2013 को पुलिस ने दोनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
- 23 जुलाई 2013 को केंद्र सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी।
- 12 फरवरी 2014 को दोनों को हाईकोर्ट से जमानत मिली।
इंसाफ की राह में बढ़ा कदम
नेहा के पिता रक्षपाल शर्मा दिल्ली से कोर्ट पहुंचे। उन्होंने उदय स्वरूप की गिरफ्तारी पर कहा कि इंसाफ की राह में कदम बढ़ा है। उसका जेल जाना जरूरी था।
रो पड़ा आरोपी का परिवार
उदय स्वरूप के पिता राजेंद्र, मां और बहन भी कोर्ट में मौजूद रहीं। उसके जेल जाने का आदेश सुनते ही मां और बहन की आंखों में आंसू छलक आए।
चेहरा छिपाता रहा उदय स्वरूप
मीडिया के कैमरों को देखते ही उदय स्वरूप अपना चेहरा छुपाने लगा। उधर, यशवीर सिंह संधू भी कोर्ट में मौजूद रहा। उसे क्लीन चिट मिल चुकी है।
20 को तय होंगे आरोप
इस केस में आरोप तय करने के लिए कोर्ट ने 20 मई की तारीख मुकर्रर की है। उधर, उदय स्वरूप की पैरवी के लिए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता गजेंद्र सिंह, आलोक सिंह, आगरा के अधिवक्ता अचल शर्मा मौजूद रहे।
चार्जशीट - 1
पुलिस ने हत्या ( धारा 302) और दुराचार के प्रयास (धारा 376/511) में चार्जशीट दाखिल की थी। आरोपी उदय स्वरूप और यशवीर सिंह संधू को बनाया।
चार्जशीट - 2
सीबीआई ने हत्या, दुराचार ( धारा 376) और साक्ष्य मिटाना ( धारा 201) में चार्जशीट की। आरोपी सिर्फ उदय स्वरूप को बनाया।
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वह स्लाइड जिसमें जिला अस्पताल के डाक्टर कोई साक्ष्य नहीं ढूंढ पाए। आगरा की विधि विज्ञान प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों ने इसके परीक्षण से इनकार कर दिया था। सीबीआई ने उसी स्लाइड को हैदराबाद की फोरेंसिक साइंस लैब में भेजा। वहां स्लाइड से डीएनए रिकवर किया गया। इसके बाद डीएनए का उदय स्वरूप के डीएनए के साथ मिलान कराया गया। मिलान होते ही रेप का चार्ज बन गया।
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दरअसल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रेप की बात नहीं थी। इसकी जांच के लिए स्लाइड बनाई गई थी। जिला अस्पताल के डाक्टरों ने परीक्षण के बाद रिपोर्ट दी कि इसमें कुछ नहीं है। फिर यह स्लाइड विधि विज्ञान प्रयोगशाला को भेजी गई। यहां वैज्ञानिकों ने कह दिया कि जिस स्लाइड का एक बार परीक्षण हो चुका, उसका दोबारा नहीं किया जाएगा। इसके चलते पुलिस ने चार्जशीट में हत्या के अलावा रेप की नहीं, रेप के प्रयास की धारा लगाई।
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सीबीआई ने डीएनए रिपोर्ट के आधार पर रेप की धारा बढ़ाई। इससे पहले जब इस वारदात में उसका नाम आया था तो आगरा पुलिस को सुबूत नहीं मिल रहा था। तब मौके से मिले बाल का परीक्षण आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला में किया गया था। हेयर मैचिंग रिपोर्ट उसके खिलाफ गई थी। उसकी गिरफ्तारी में यह मुख्य आधार रही थी। इस तरह दोनों बार उसके जेल जाने की वजह फोरेंसिक साक्ष्य बने हैं। विधि विज्ञान प्रयोगशाला में नेहा शर्मा हत्याकांड की अलग से फाइल बनाई गई है। इसे फोरेंसिक एविडेंस पर होने वाली सेमिनार में नजीर के रूप में रखा जाएगा।
- 15 मार्च 2013 को डीईआई में नेहा शर्मा की हत्या की गई।
- 22 अप्रैल 2013 को उदय स्वरूप और यशवीर संधू की गिरफ्तारी हुई।
- 15 जुलाई 2013 को पुलिस ने दोनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
- 23 जुलाई 2013 को केंद्र सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी।
- 12 फरवरी 2014 को दोनों को हाईकोर्ट से जमानत मिली।
इंसाफ की राह में बढ़ा कदम
नेहा के पिता रक्षपाल शर्मा दिल्ली से कोर्ट पहुंचे। उन्होंने उदय स्वरूप की गिरफ्तारी पर कहा कि इंसाफ की राह में कदम बढ़ा है। उसका जेल जाना जरूरी था।
रो पड़ा आरोपी का परिवार
उदय स्वरूप के पिता राजेंद्र, मां और बहन भी कोर्ट में मौजूद रहीं। उसके जेल जाने का आदेश सुनते ही मां और बहन की आंखों में आंसू छलक आए।
चेहरा छिपाता रहा उदय स्वरूप
मीडिया के कैमरों को देखते ही उदय स्वरूप अपना चेहरा छुपाने लगा। उधर, यशवीर सिंह संधू भी कोर्ट में मौजूद रहा। उसे क्लीन चिट मिल चुकी है।
20 को तय होंगे आरोप
इस केस में आरोप तय करने के लिए कोर्ट ने 20 मई की तारीख मुकर्रर की है। उधर, उदय स्वरूप की पैरवी के लिए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता गजेंद्र सिंह, आलोक सिंह, आगरा के अधिवक्ता अचल शर्मा मौजूद रहे।
चार्जशीट - 1
पुलिस ने हत्या ( धारा 302) और दुराचार के प्रयास (धारा 376/511) में चार्जशीट दाखिल की थी। आरोपी उदय स्वरूप और यशवीर सिंह संधू को बनाया।
चार्जशीट - 2
सीबीआई ने हत्या, दुराचार ( धारा 376) और साक्ष्य मिटाना ( धारा 201) में चार्जशीट की। आरोपी सिर्फ उदय स्वरूप को बनाया।