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अफसरों को बचाने में छूटे एसआईटी के पसीने
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
Updated Fri, 19 Jun 2015 02:20 AM IST
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अगर एसआईटी शैलेंद्र के मोबाइल फोन का कॉल
डिटेल रिकार्ड केस डायरी में दर्ज करती है, तो इसमें अधिकारियों के साथ
उसके कनेक्शन साफ जाहिर हो रहे हैं। अगर एसएमएस का ब्योरा भी रखा तो
ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए बोली लगाने का खेल भी सामने आ जाएगा। इसी तरह अगर
उसके 17 बैंक एकाउंट की कैश ट्रांजिक्शन रिपोर्ट पेश की तो अधिकारियों के
साथ उसके लेन देन का चिट्ठा खुल जाएगा।
गौरतलब है कि पुलिस सूत्रों के हवाले से यह बात पहले ही सामने आ चुकी है कि पहली चार्जशीट में किसी अधिकारी को आरोपी नहीं बनाया जाएगा। इसमें सिर्फ शैलेंद्र, उसके ड्राइवर, पीएसओ और नौकरों के नाम हो सकते हैं। लेकिन शैलेंद्र की जिस डायरी में नौकरों के जालसाजी में शामिल होने का ब्योरा है, उसमें कई अधिकारियों के नाम भी लिखे हैं।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि एसआईटी की तीन मीटिंग सिर्फ इसी बात पर हुई हैं कि चार्जशीट किस तरह से तैयार की जाए? अगर अभी तक मिले साक्ष्य कोर्ट के सामने नहीं रखे जाते हैं, तो शैलेंद्र इसका फायदा उठा सकता है। उसकी कॉल डिटेल के बिना कॉल स्पूफिंग को साबित करना आसान नहीं होगा। कॉल स्पूफिंग के जरिए वह अधिकारियों के मोबाइल नंबर हैक करके फोन करता था। पुलिस के लिए टेंशन इसलिए भी है क्योंकि ये साक्ष्य उसने खुद नहीं जुटाए हैं बल्कि सीबीआई की टेक्निकल विंग की मदद से हासिल किए हैं। अगर इन्हें छुपाया गया तो एसआईटी के लिए भी मुश्किल खड़ी हो सकती है।
गौरतलब है कि पुलिस सूत्रों के हवाले से यह बात पहले ही सामने आ चुकी है कि पहली चार्जशीट में किसी अधिकारी को आरोपी नहीं बनाया जाएगा। इसमें सिर्फ शैलेंद्र, उसके ड्राइवर, पीएसओ और नौकरों के नाम हो सकते हैं। लेकिन शैलेंद्र की जिस डायरी में नौकरों के जालसाजी में शामिल होने का ब्योरा है, उसमें कई अधिकारियों के नाम भी लिखे हैं।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि एसआईटी की तीन मीटिंग सिर्फ इसी बात पर हुई हैं कि चार्जशीट किस तरह से तैयार की जाए? अगर अभी तक मिले साक्ष्य कोर्ट के सामने नहीं रखे जाते हैं, तो शैलेंद्र इसका फायदा उठा सकता है। उसकी कॉल डिटेल के बिना कॉल स्पूफिंग को साबित करना आसान नहीं होगा। कॉल स्पूफिंग के जरिए वह अधिकारियों के मोबाइल नंबर हैक करके फोन करता था। पुलिस के लिए टेंशन इसलिए भी है क्योंकि ये साक्ष्य उसने खुद नहीं जुटाए हैं बल्कि सीबीआई की टेक्निकल विंग की मदद से हासिल किए हैं। अगर इन्हें छुपाया गया तो एसआईटी के लिए भी मुश्किल खड़ी हो सकती है।