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दो पूर्व डीजीपी, दो आईएएस से कनेक्शन

Tue, 09 Jun 2015 01:48 AM IST
चन्द्र मोहन शर्मा/आगरा
चन्द्र मोहन शर्मा/आगरा Updated Tue, 09 Jun 2015 01:48 AM IST
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shalendra have link with two retd DGP and IAS
फिलहाल रिटायर्ड हो चुके इन दोनों अधिकारियों पर आगरा पुलिस शिकंजा
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कसने की तैयारी कर रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि शैलेंद्र अग्रवाल की जालसाजी में इनकी भूमिका मालूम करने के लिए जांच शुरू हो चुकी है। इनके खिलाफ सुबूत जुटाने के लिए सीबीआई की तकनीक ी शाखा की मदद ली गई। दरअसल, करोड़ों की जालसाजी में एक मई से जिला जेल में बंद सपा नेता शैलेंद्र अग्रवाल के मोबाइल की कॉल डिटेल रिपोर्ट पुलिस निकाल नहीं पा रही थी।
सीबीआई से जो रिपोर्ट आई, उसने पुलिस के अफसरों को चौंका दिया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सीबीआई ने शैलेंद्र के मोबाइल के एसएमएस भी डीकोड करके इनके संदेश उजागर कर दिए। इनमें ही दो तत्कालीन डीजीपी की पैसा वसूली का काला चिट्ठा सामने आ गया है। शैलेंद्र को पहली बार रिमांड पर लिया गया तो उसने यह तो कुबूल किया कि  उसके अफसरों से रिश्ते हैं, लेकिन किसी का नाम नहीं बताया था। पुलिस के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि अब उसे फिर से रिमांड पर लेकर उसके सामने कॉल डिटेल और एसएमएस का ब्योरा रखकर पूछताछ की जाएगी। खास तौर से पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के साथ उसकी बातचीत और एसएमएस के बारे में सवाल किए जाएंगे। पुलिस सूत्रों का कहना है कि दरोगाओं को मलाईदार पोस्टिंग के लिए सात लाख तय किए गए थे।
बता दें, इस जालसाज की जालसाजी तो बहुत लंबे समय से चल रही थी, लेकिन कोई उसके खिलाफ केस दर्ज कराने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था। जब एक दारोगा की पत्नी ने रिपोर्ट दर्ज करा दी, फिर तो लाइन लग गई। अब तक 27 केस लिखे जा चुके हैं। इनमें शैलेंद्र के परिवारीजन और रिश्तेदार भी मुल्जिम बने हैं। शैलेंद्र जेल में है।

दो आईएएस भी जांच के घेरे में
इनमें एक अधिकारी आगरा में रहा डीएम दूसरा एडीएम सिटी
शैलेंद्र के मथुरा के बैंक एकाउंट से एक को किया गया था पैसा ट्रांसफर
आगरा। जालसाज शैलेंद्र अग्रवाल से रिश्तों को लेकर दो आईएएस अधिकारी भी पुलिस की जांच के घेरे में आ गए हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि इनमें से एक को तो शैलेंद्र के मथुरा के एक बैंक एकाउंट से पैसे भी ट्रांसफर किए गए, जिसके साक्ष्य पुलिस को मिल गए हैं। यह अधिकारी आगरा में लगभग एक साल तक डीएम रह चुका है। उसने शहर में जमीन भी खरीदी। इसके अलावा एक  और आईएएस अधिकारी है, जो आगरा में एडीएम सिटी के अलावा यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण से भी जुड़ा रहा। वह प्रमोशन पाकर आईएएस बना है। शैलेंद्र की कॉल डिटेल में उसका भी नंबर है। वह फिलहाल लखनऊ में तैनात बताया गया है।

फर्जी था आलू निर्यात का ऑर्डर
आगरा। जालसाज शैलेंद्र की एक और जालसाजी सामने आई है। वह लोगों से कहता था कि उसे आलू निर्यात का बड़ा आर्डर मिला है। इसकी जांच हुई तो पता चला कि उसने ऑर्डर खुद ही तैयार किया था। इसे भी उसके खिलाफ जालसाजी के साक्ष्य के रूप में कोर्ट के सामने रखा जाएगा। वह आलू में पैसा लगाने पर 36 प्रतिशत ब्याज का लालच देता था। कई अधिकारियों को उसने इतना ब्याज दिया भी लेकिन ज्यादातर का पैसा लेकर हड़प गया। लेकिन अपनी गर्दन फंसने के डर से उसके जेल जाने के बाद एक रिटायर्ड डीआईजी की पत्नी के अलावा किसी अधिकारी ने शैलेंद्र के खिलाफ केस भी दर्ज नहीं कराया।

जालसाज को बचाने में लगी पुलिस
- शैलेंद्र अग्रवाल के खिलाफ 27 केस दर्ज हो चुके हैं लेकिन जांच बेहद धीमी गति से चल रही है। अभी तक केस डायरी खाली ही पड़ी है।
- शैलेंद्र को जब पहली बार रिमांड पर लिया गया था, तब उससे अफसरों से रिश्तों के बारे में जोर देकर पूछताछ नहीं की गई।
- शैलेंद्र के खिलाफ मुकदमों में धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और जालसाजी की धाराएं हैं। सूत्रों का कहना है कि पुलिस जालसाजी की धाराएं हटा सकती है।
- मोबाइल कॉल डिटेल रिकार्ड और एसएमएस की जानकारी मिलने पर भी इनका ब्योरा केस डायरी में अभी तक नहीं लिखा गया।

बदला जाएगा जांच अधिकारी
शैलेंद्र केस की जांच धीमी चलने पर डीआईजी लक्ष्मी सिंह नाराज हैं। उन्होेंने एसएसपी राजेश डी. मोदक को जांच अधिकारी बदलने के लिए निर्देश दिए हैं। साथ ही अभी तक की जांच की प्रगति का भी अध्ययन किया है।
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