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फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की तैयारी

Wed, 20 Apr 2016 01:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो आगरा
अमर उजाला ब्यूरो आगरा Updated Wed, 20 Apr 2016 01:32 AM IST
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Preparing an appeal in highcourt against the judgment
चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय - फोटो : file photo
सदर बाजार में नौ अगस्त, 2000 को हुए विस्फोट के आरोपी गुलजार अहमद वानी उर्फ इरशाद उर्फ मंजूर अहमद उर्फ अब्दुल हमीद उर्फ शाहिद को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिए जाने के खिलाफ प्रदेश सरकार हाईकोर्ट में अपील करने की तैयारी कर रही है।
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जिला शासकीय अधिवक्ता शिशुपाल यादव का कहना है कि गुलजार को धमाके का मुख्य सूत्रधार पाया गया था। उसे कोर्ट ने पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। इस फैसले का अध्ययन किया जा रहा है। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील जल्द ही दायर की जाएगी।
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बता दें, नौ अगस्त 2000 को सदर बाजार में मोहम्मद खलीक के मकान में दोपहर करीब 11:30 बजे ट्रांजिस्टर बम से विस्फोट हुआ था। इसमें बम बनाते समय दो लोगों की मृत्यु हो गई थी। वे थे शाहिद और मोहम्मद हाफिज। तीसरे घायल वकार ने बाद में दम तोड़ा था। तीनों इस मकान में किराए पर रहते थे। मौके से मिले साहित्य के आधार पर पुलिस ने इसे आतंकी वारदात बताया था। इसमें सिमी का हाथ पाया गया था।
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पुलिस ने अलीगढ़ से मुबीन और मारूक को गिरफ्तार किया था। इसके एक साल बाद गुलजार को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उसे सदर बाजार धमाके में शामिल बताया था। उसके खिलाफ 10 अगस्त 2001 को चार्जशीट दाखिल की गई थी। उसके खिलाफ आतंकी वारदात के और भी केस हैं। वह फिलहाल लखनऊ जेल में बंद है। अन्य केस अभी कोर्ट में चल रहे हैं। इसलिए इस केस में बरी होने के आधार पर उसकी रिहाई नहीं होगी। गौरतलब है कि साक्ष्य के अभाव में मुबीन और मारूक पहले ही बरी हो चुके हैं।

पुलिस की लापरवाही से बरी हुआ गुलजार
आगरा। यह केस तत्कालीन सदर बाजार इंस्पेक्टर नवरंग पाल ने दर्ज किया था। पुलिस ने गुलजार के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य होने का दावा किया था। कई गवाह भी प्रस्तुत किए थे लेकिन गवाह मुकर गए। साक्ष्य कमजोर साबित हुए। पुलिस ने पैरवी में ढिलाई बरती।

डार ने बनाया था गुलजार को आतंकी
आगरा। पुलिस ने जांच में बताया था कि गुलजार दिल्ली में काम करता था। छुट्टी मिलने पर वह कश्मीर में अपने गांव जाता था। वहां आतंकी हथियार लेकर आते थे। इनमें एक आतंकी फैय्याज अहमद डार भी था। उसने ही उसे बरगलाया था।

एएमयू में पढ़ा गुलजार 
आगरा। गुलजार ने पुलिस को बयान दिया था कि वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़ा है। उसने 1993 में बीए में दाखिला लिया था। 1994 में उसे हबीब हास्टल में कमरा मिल गया था। मुबीन सिमी से जुड़ा था। उसने ही उसे सिमी से जोड़ा।


कई धमाकों में रहा शामिल
पुलिस की जांच के दौरान गुलजार ने कई धमाकों में अपनी संलिप्तता स्वीकार की थी। इनमें साबरमती एक्सप्रेस में हुए धमाके भी शामिल थे। उसके साथी भी कई विस्फोट में शामिल रहे।

पुलिस की चूक 
पुलिस ने गुलजार की निशानदेही पर कोई विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं की।
पुलिस यह भी साबित नहीं कर पाई कि उसने ही विस्फोटक सामग्री मकान में रखी।
पुलिस यह भी साबित नहीं कर पाई कि उसने नाजायज पैम्फलेट छपवाए या भड़काऊ भाषण दिया।
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