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मुल्जिम को बचाने के लिए बदला मुद्दई
अमर उजाला ब्यूरो आगरा
Updated Sat, 28 May 2016 01:27 AM IST
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पुलिस
- फोटो : file photo
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रस्सी को सांप और सांप को रस्सी बनाने के लिए बदनाम पुलिस का एक और खेल देखिए। मुकदमे में जेलकर्मी और उसके भाई को बचाने के लिए मुद्दई को ही बदल डाला। मामला सिकंदरा थाना का है। जिस महिला ने एफआईआर दर्ज कराई, चार्जशीट में उसका नाम ही नहीं है। उसकी जगह गवाह को मुद्दई बना दिया है। मुकदमे से तमाम संगीन धाराएं भी हटा दी गई हैं। खेल पकड़ में आने पर कोर्ट ने चार्जशीट लौटा दी। मामले की नए सिरे से जांच करने के आदेश दिए गए हैं।
यह केस अक्तूबर 2015 में आवास विकास की एक महिला ने दर्ज कराया था। जेलकर्मी अशोक चौधरी, उसके भाई मुरारी चौधरी और एक अन्य इंद्रेश इसमें आरोपी हैं। आरोप है घर में घुसकर छेड़छाड़, जातिसूचक शब्द बोलना और मारपीट। एफआईआर में एससी-एसटी एक्ट समेत सभी धाराएं लगाई गईं लेकिन चार्जशीट में न तो छेड़छाड़ की धारा है और न ही एससी-एसटी एक्ट। सिर्फ साधारण मारपीट की धारा है।
यह आरोपपत्र जब एसीजेएम अरविंद विकास की कोर्ट में पहुंचा तो वह हैरान रह गए। उन्होंने इसे पुलिस को वापस कर दिया। केस की पुन: विवेचना के आदेश दिए हैं। पुलिस ने गवाह नरेश दीक्षित को मुद्दई (वादी) बताकर चार्जशीट दाखिल की थी। कोर्ट ने इसे लौटाकर पुलिस को झटका दिया है। इस केस में पुलिस ने वादी महिला का कोर्ट में बयान भी दर्ज नहीं कराया।
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धूल झोंकना
- एससी-एसटी एक्ट भी हटा दिया पुलिस ने
- कोर्ट में पीड़ित महिला का बयान नहीं कराया
- चार्जशीट में गवाह को मुद्दई बताया गया है
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यह केस अक्तूबर 2015 में आवास विकास की एक महिला ने दर्ज कराया था। जेलकर्मी अशोक चौधरी, उसके भाई मुरारी चौधरी और एक अन्य इंद्रेश इसमें आरोपी हैं। आरोप है घर में घुसकर छेड़छाड़, जातिसूचक शब्द बोलना और मारपीट। एफआईआर में एससी-एसटी एक्ट समेत सभी धाराएं लगाई गईं लेकिन चार्जशीट में न तो छेड़छाड़ की धारा है और न ही एससी-एसटी एक्ट। सिर्फ साधारण मारपीट की धारा है।
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यह आरोपपत्र जब एसीजेएम अरविंद विकास की कोर्ट में पहुंचा तो वह हैरान रह गए। उन्होंने इसे पुलिस को वापस कर दिया। केस की पुन: विवेचना के आदेश दिए हैं। पुलिस ने गवाह नरेश दीक्षित को मुद्दई (वादी) बताकर चार्जशीट दाखिल की थी। कोर्ट ने इसे लौटाकर पुलिस को झटका दिया है। इस केस में पुलिस ने वादी महिला का कोर्ट में बयान भी दर्ज नहीं कराया।
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धूल झोंकना
- एससी-एसटी एक्ट भी हटा दिया पुलिस ने
- कोर्ट में पीड़ित महिला का बयान नहीं कराया
- चार्जशीट में गवाह को मुद्दई बताया गया है