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पुलिस के हत्थे चढ़ा कार चोरों का हाईटेक गैंग
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Thu, 01 Oct 2015 01:56 AM IST
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शहर में लग्जरी कारों को पल भर में चोरी करने वाले हाईटेक चोरों का गैंग सिकंदरा पुलिस के हत्थे चढ़ा है। यह गिरोह चोरी की कारों की सप्लाई ऑन डिमांड देश के अलग-अलग राज्यों में करता था। सबसे ज्यादा मांग पश्चिम बंगाल और झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों में है। गैंग अपने साथ टूल बाक्स और कंप्यूटराइज्ड उपकरण लेकर चलता था। लॉक तोड़ने के बाद लैपटॉप की मदद से सिक्योरिटी सिस्टम को डीकोड कर कार उड़ा ले जाते थे।
एसपी सिटी राजेश कुमार सिंह के मुताबिक, नंदलाल उर्फ नंदू उर्फ एमडी उर्फ मनोज यादव निवासी गोंडा, विक्रम उर्फ बॉबी उर्फ माई गॉड निवासी जीद (हरियाणा), इकबाल निवासी फीरोजाबाद और राहुल पाराशर निवासी बल्देव, मथुरा को गिरफ्तार किया है। गैंग का सरगना और मास्टरमाइंड पिनाहट के गांव उमरैठा का प्रदीप भदौरिया और उसका साथी वाहिद निवासी गाजियाबाद अभी फरार है। पुलिस उनकी तलाश में दबिश दे रही है। प्रदीप का भाई भी वाहन चोरी करता है।
गैंग सैकड़ों वारदात को अंजाम दे चुका है। पश्चिम बंगाल और झारखंड के अलावा दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, बिहार में चोरी के वाहनों की सप्लाई करते थे। वाहनों को नंबर प्लेट बदलकर बेच देते थे। दस लाख तक के वाहनों की कीमत 60 हजार से एक लाख रुपये रखते थे।
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नक्सल प्रभावित इलाकों में इन वाहनों को बेचने के बाद आसानी से बरामद करना मुश्किल है। पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि चोरी के वाहनों को कैरियरों के माध्यम से नेपाल और बांग्लादेश भी ले जाया जाता था। कैरियर सीमा पार कराकर वाहनों को ले जाते थे। पुलिस टीम में इंस्पेक्टर हरिमोहन सिंह, एसएसआई सुभाष सिंह कठेरिया, लोकेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
कार में रखकर चलते थे ‘टूल बॉक्स’
चोर अपने साथ कार के अंदर पूरा का पूरा टूल बॉक्स लेकर चलते थे। पुलिस ने चोरों के पास से लॉक तोड़ने की ड्रिल मशीन, गाड़ियां स्टार्ट करने के लिए इस्तेमाल होने वाले रिंच और पाना, पेंचकस, सूजा, वायर आदि बरामद किए हैं। इसके अलावा गाड़ियों के 13 लॉक किट, नौ इलेक्ट्रानिक कंप्यूटर मॉड्यूल (ईसीएम), आठ बॉडी कंट्रोल मॉड्यूल (वीसीएम) नंबर प्लेट, कटर, दो चैन आदि भी बरामद किए हैं।
नंबर प्लेट पर लिखते थे एमपी गवर्नमेंट
पुलिस ने चोरों के पास से दो नंबर प्लेट भी बरामद की हैं, इन पर एमपी गवर्नमेंट लिखा है। इन प्लेट का इस्तेमाल ग्वालियर में किया जाता था। ग्वालियर, सहारनपुर, कानपुर आदि इलाकों में कई पार्किंग पर वाहनों को खड़ा करते थे। यहां नंबर प्लेट बदल दी जाती थी। यहीं सौदा तय करते थे।
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एसपी सिटी राजेश कुमार सिंह के मुताबिक, नंदलाल उर्फ नंदू उर्फ एमडी उर्फ मनोज यादव निवासी गोंडा, विक्रम उर्फ बॉबी उर्फ माई गॉड निवासी जीद (हरियाणा), इकबाल निवासी फीरोजाबाद और राहुल पाराशर निवासी बल्देव, मथुरा को गिरफ्तार किया है। गैंग का सरगना और मास्टरमाइंड पिनाहट के गांव उमरैठा का प्रदीप भदौरिया और उसका साथी वाहिद निवासी गाजियाबाद अभी फरार है। पुलिस उनकी तलाश में दबिश दे रही है। प्रदीप का भाई भी वाहन चोरी करता है।
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गैंग सैकड़ों वारदात को अंजाम दे चुका है। पश्चिम बंगाल और झारखंड के अलावा दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, बिहार में चोरी के वाहनों की सप्लाई करते थे। वाहनों को नंबर प्लेट बदलकर बेच देते थे। दस लाख तक के वाहनों की कीमत 60 हजार से एक लाख रुपये रखते थे।
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नक्सल प्रभावित इलाकों में इन वाहनों को बेचने के बाद आसानी से बरामद करना मुश्किल है। पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि चोरी के वाहनों को कैरियरों के माध्यम से नेपाल और बांग्लादेश भी ले जाया जाता था। कैरियर सीमा पार कराकर वाहनों को ले जाते थे। पुलिस टीम में इंस्पेक्टर हरिमोहन सिंह, एसएसआई सुभाष सिंह कठेरिया, लोकेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
कार में रखकर चलते थे ‘टूल बॉक्स’
चोर अपने साथ कार के अंदर पूरा का पूरा टूल बॉक्स लेकर चलते थे। पुलिस ने चोरों के पास से लॉक तोड़ने की ड्रिल मशीन, गाड़ियां स्टार्ट करने के लिए इस्तेमाल होने वाले रिंच और पाना, पेंचकस, सूजा, वायर आदि बरामद किए हैं। इसके अलावा गाड़ियों के 13 लॉक किट, नौ इलेक्ट्रानिक कंप्यूटर मॉड्यूल (ईसीएम), आठ बॉडी कंट्रोल मॉड्यूल (वीसीएम) नंबर प्लेट, कटर, दो चैन आदि भी बरामद किए हैं।
नंबर प्लेट पर लिखते थे एमपी गवर्नमेंट
पुलिस ने चोरों के पास से दो नंबर प्लेट भी बरामद की हैं, इन पर एमपी गवर्नमेंट लिखा है। इन प्लेट का इस्तेमाल ग्वालियर में किया जाता था। ग्वालियर, सहारनपुर, कानपुर आदि इलाकों में कई पार्किंग पर वाहनों को खड़ा करते थे। यहां नंबर प्लेट बदल दी जाती थी। यहीं सौदा तय करते थे।