{"_id":"56eb0c0e4f1c1b50248b4bbd","slug":"only-kidnap-then-the-whole-exercise-moderation","type":"story","status":"publish","title_hn":"बस अपहरण, फिर पूरी नरमी बरती","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
बस अपहरण, फिर पूरी नरमी बरती
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 18 Mar 2016 01:33 AM IST
विज्ञापन
दिव्य
- फोटो : अमर उजाला आगरा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिव्य का अपहरण तो बड़ी बेरहमी से किया। साइकिल चला रहे दिव्य झटके से उठाकर जबरन बाइक पर बिठा लिया था। वह रो रहा था लेकिन जब बदमाश अपने ठिकाने पर पहुंच गए तो उनका व्यवहार कुछ नरम हो गया। दिव्य ने बताया कि बदमाश उससे कई बार पूछते थे कि उसे भूख तो नहीं लग रही। उसे खाने के लिए बिस्कुट, पेटीज देते। कई बार दाल और चावल भी दिया।
दिव्य ने बताया कि उसे कई जगह रखा गया। बाइक पर थोडे़ देर ही रहा। फिर उसे कार में बिठा लिया गया था। वह चिल्ला रहा था, इसलिए उसका मुंह दबा रखा था। जब और थोड़ी दूर निकल गए तो उसने चिल्लाना बंद कर दिया। एक बदमाश ने कहा, ‘अच्छे बच्चे शोर नहीं मचाते, हम तुम्हें जल्दी ही तुम्हारे घर भेज देंगे।’ इसके बाद न उसने शोर मचाया और न ही बदमाशों ने सख्ती की।
उसे सुबह चाय और बिस्कुट देते। उसने 14 मार्च की सुबह चाय नहीं पी तो दूध मंगाया। दोपहर खाने को दाल-चावल दिया। अक्सर यही मंगाते थे। कोई खाना लेकर आता था। उसकी आंखों पर पट्टी नहीं बांधी गई थी। उसके पापा ने उससे मिली जानकारी के आधार पर बताया कि उसे जहां भी रखा गया, वहां पंखा लगा था। बदमाशों ने उसे एक बार कोल्ड ड्रिंक भी पिलाई।
विज्ञापन
अंकल मुझे घर भेज दो, प्लीज
मां मोना ने दिव्य के हवाले से बताया कि उसने बदमाशों की हर बात मानी। कहते बैठ जा, तो बैठ जाता, सोने के लिए कहते, तो पलंग पर लेट जाता। उसे घर की आ रही थी। बदमाशों से बहुत धीमे से कहता था, ‘अंकल मुझे घर भेज दो प्लीज। मेरे मम्मी-डैडी और दादा-दादी को नींद नहीं आ रही होगी। मेरा छोटा भाई भी परेशान होगा।’
विज्ञापन
दिव्य ने बताया कि उसे कई जगह रखा गया। बाइक पर थोडे़ देर ही रहा। फिर उसे कार में बिठा लिया गया था। वह चिल्ला रहा था, इसलिए उसका मुंह दबा रखा था। जब और थोड़ी दूर निकल गए तो उसने चिल्लाना बंद कर दिया। एक बदमाश ने कहा, ‘अच्छे बच्चे शोर नहीं मचाते, हम तुम्हें जल्दी ही तुम्हारे घर भेज देंगे।’ इसके बाद न उसने शोर मचाया और न ही बदमाशों ने सख्ती की।
विज्ञापन
उसे सुबह चाय और बिस्कुट देते। उसने 14 मार्च की सुबह चाय नहीं पी तो दूध मंगाया। दोपहर खाने को दाल-चावल दिया। अक्सर यही मंगाते थे। कोई खाना लेकर आता था। उसकी आंखों पर पट्टी नहीं बांधी गई थी। उसके पापा ने उससे मिली जानकारी के आधार पर बताया कि उसे जहां भी रखा गया, वहां पंखा लगा था। बदमाशों ने उसे एक बार कोल्ड ड्रिंक भी पिलाई।
विज्ञापन
अंकल मुझे घर भेज दो, प्लीज
मां मोना ने दिव्य के हवाले से बताया कि उसने बदमाशों की हर बात मानी। कहते बैठ जा, तो बैठ जाता, सोने के लिए कहते, तो पलंग पर लेट जाता। उसे घर की आ रही थी। बदमाशों से बहुत धीमे से कहता था, ‘अंकल मुझे घर भेज दो प्लीज। मेरे मम्मी-डैडी और दादा-दादी को नींद नहीं आ रही होगी। मेरा छोटा भाई भी परेशान होगा।’