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जेल गया नितेंद्र अग्रवाल, गैंगस्टर एक्ट भी लगेगा

Thu, 22 Oct 2015 02:51 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा Updated Thu, 22 Oct 2015 02:51 AM IST
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nitendra in jail, gangster act impose too
हाईप्रोफाइल जालसाज शैलेंद्र अग्रवाल के साथ धोखाधड़ी के संगीन मामलों में नामजद उसके परिवारीजनों और रिश्तेदारों को बचाने में लगी पुलिस ने भारी मन से ही सही लेकिन उसके भाई नितेंद्र अग्रवाल को भी गिरफ्तार कर लिया। बुधवार दोपहर कोर्ट में उसे पेश किया गया, जहां से तीन नवंबर तक के लिए जेल भेज दिया गया। नितेंद्र पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई होना भी तय माना जा रहा है।
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पांच मई को गिरफ्तार किए गए शैलेंद्र और बाद में सरेंडर करके जेल पहुंचे उसके मैनेजर रोहन पर यह एक्ट पहले ही लग चुका है। 36 मुकदमों में नामजदगी के चलते शैलेंद्र की हिस्ट्रीशीट भी खुल चुकी है। लेकिन उसके साथ नामजद उसके परिवारीजनों और रिश्तेदारों पर पुलिस छह महीने से कार्रवाई करने में बच रही थी। न उनकी गिरफ्तारी की जा रही थी और न ही उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो रही थी।
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जालसाजी के शिकार लोग परेशान घूम रहे थे। अफसर उनकी सुन नहीं रहे थे। अमर उजाला ने 18 अक्तूबर को शैलेंद्र के परिवार को बचा रही पुलिस शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित की। इस पर लखनऊ तक हड़कंप मचा। तब जाकर पुलिस हरकत में आई और नितेंद्र को गिरफ्तार किया। शैलेंद्र ने जिस फर्म एग्रोटेक प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी की, उसमें उसके साथ ही नितेंद्र भी डायरेक्टर है। इसलिए माना जा रहा है कि उस पर भी गैंगस्टर एक्ट लगेगा। उसे हरिपर्वत थाना के दो और ताजगंज के एक मामले में गिरफ्तार किया गया है।
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शैलेंद्र की आठ मुकदमों में पेशी
आगरा। एटा जेल में बंद हिस्ट्रीशीटर शैलेंद्र अग्रवाल को बुधवार दोपहर कड़ी सुरक्षा में पेशी पर लाया गया। उसकी आठ मुकदमों में पेशी हुई। इनमें तीन हरिपर्वत, तीन न्यू आगरा और दो सदर थाना के हैं। पेशी के बाद पुलिस उसे वापस एटा जेल ले गई। इस दौरान उसकी नजर भाई नितेंद्र पर पड़ी तो वह चलते चलते रुक गया और दो मिनट तक उसे देखता ही रहा।

अगला नंबर किसका होगा?
आगरा। शैलेंद्र के साथ नामजद उसके परिवारीजनों, रिश्तेदारों, कर्मचारियों को बचाने में पुलिस कोई कसर नहीं छोड़ रही लेकिन मामला इतना संगीन है कि एक एक कर सबका नंबर आ रहा है। शैलेंद्र, उसका मैनेजर और ड्राइवर पहले ही जेल पहुंच चुके। अब एक भाई भी चला गया। पीड़ितों की नजर इसी पर लगी हैं कि अगला नंबर किसका आता है?
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