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बाबा की कुंडली में डकैती से लेकर हत्या तक के अपराध
बाबा की कुंडली में डकैती से लेकर हत्या तक के अपराध
Updated Mon, 27 Feb 2017 12:42 AM IST
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बाबा की कुंडली में डकैती से लेकर हत्या तक के अपराध
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बाबा मुंशीदास निषाद का नाम पुलिस के रिकार्ड में हिस्ट्रीशीटर अपराधियों के रूप में दर्ज है। जितनी तेजी से उसका आश्रम बढ़ रहा था, उतनी ही रफ्तार से उसके खिलाफ मुकदमों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही थी। हत्या का प्रयास, हत्या, डकैती, सरकारी काम में बाधा, रेप का प्रयास, बलवा जैसी धाराओं में केस दर्ज हैं। पुलिस ने उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की।
उसके खिलाफ पहला केस 1986 में दर्ज हुआ था। इसके बाद शायद ही कोई साल बीता हो जब हिस्ट्रीशीट में एक या इससे अधिक केस न बढ़े हों। पुलिस कार्रवाई करती जरूर मगर शिकंजा ढीला ही रहता। बाबा आराम से निकल जाता। उस पर जमीन पर कब्जों के आरोप लगे, मुकदमे दर्ज हुए लेकिन बाबा रूका नहीं। आश्रम फैलता ही चला गया। उस पर यमुना मेें रेत खनन कराने के भी आरोप लगे। तहसील की टीम ने कई बार छापामारी की। एक बार टीम को पीटा भी गया था। टीम में लेखपाल और तहसीलदार शामिल थे। इसका भी केस बाबा के खिलाफ दर्ज हुआ था।
पुलिस ने बताया कि उसके खिलाफ सबसे ज्यादा केस डौकी थाना में ही दर्ज हैं। ये आश्रम के विस्तार के चक्कर में दर्ज हुए। इनसे पता चलता है कि उसके रास्ते में जो आया, उसने उसे बख्शा नहीं। जिसने जमीन राजी से दी, उससे ले ली। जिसने नहीं दी, उसे सबक सिखा दिया। जयराम का भी ऐसा ही मामला बताया गया है। बाबा उसकी जमीन पर कब्जा करना चाहता था। उसने विरोध किया। इसके बाद उसकी हत्या हो गई। इसमें बाबा को जेल जाना पड़ा। पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत भी केस दर्ज किया। इसके चलते बाबा की जमानत नहीं हो पा रही थी। दो साल बाद जेल से छूटा था चार दिसंबर 2016 को।
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मथुरा में तलाशे जा रहे केस
फतेहाबाद। बाबा मुंशीदास के खिलाफ आगरा जनपद में 35 केस दर्ज हैं। इनकी डिटेल उसकी हिस्ट्रीशीट में है। लेकिन पता चला कि कुछ मामले मथुरा में भी हैं। इनके बारे में पुलिस मालूम करा रही है। आगरा में उसके खिलाफ डौकी, फतेहाबाद और छत्ता थाना में केस दर्ज हैं।
डीजीपी के आदेश पर पड़ा था छापा
फतेहाबाद। बात कई साल पुरानी है। बाबा के आश्रम के खिलाफ पुलिस से शिकायत की गई थी। लोकल पुलिस ने एक्शन नहीं लिया। इस पर शिकायत डीजीपी तक पहुंची। तब डीजीपी के आदेश पर पुलिस ने जबरदस्त छापामारी की थी।
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उसके खिलाफ पहला केस 1986 में दर्ज हुआ था। इसके बाद शायद ही कोई साल बीता हो जब हिस्ट्रीशीट में एक या इससे अधिक केस न बढ़े हों। पुलिस कार्रवाई करती जरूर मगर शिकंजा ढीला ही रहता। बाबा आराम से निकल जाता। उस पर जमीन पर कब्जों के आरोप लगे, मुकदमे दर्ज हुए लेकिन बाबा रूका नहीं। आश्रम फैलता ही चला गया। उस पर यमुना मेें रेत खनन कराने के भी आरोप लगे। तहसील की टीम ने कई बार छापामारी की। एक बार टीम को पीटा भी गया था। टीम में लेखपाल और तहसीलदार शामिल थे। इसका भी केस बाबा के खिलाफ दर्ज हुआ था।
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पुलिस ने बताया कि उसके खिलाफ सबसे ज्यादा केस डौकी थाना में ही दर्ज हैं। ये आश्रम के विस्तार के चक्कर में दर्ज हुए। इनसे पता चलता है कि उसके रास्ते में जो आया, उसने उसे बख्शा नहीं। जिसने जमीन राजी से दी, उससे ले ली। जिसने नहीं दी, उसे सबक सिखा दिया। जयराम का भी ऐसा ही मामला बताया गया है। बाबा उसकी जमीन पर कब्जा करना चाहता था। उसने विरोध किया। इसके बाद उसकी हत्या हो गई। इसमें बाबा को जेल जाना पड़ा। पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत भी केस दर्ज किया। इसके चलते बाबा की जमानत नहीं हो पा रही थी। दो साल बाद जेल से छूटा था चार दिसंबर 2016 को।
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मथुरा में तलाशे जा रहे केस
फतेहाबाद। बाबा मुंशीदास के खिलाफ आगरा जनपद में 35 केस दर्ज हैं। इनकी डिटेल उसकी हिस्ट्रीशीट में है। लेकिन पता चला कि कुछ मामले मथुरा में भी हैं। इनके बारे में पुलिस मालूम करा रही है। आगरा में उसके खिलाफ डौकी, फतेहाबाद और छत्ता थाना में केस दर्ज हैं।
डीजीपी के आदेश पर पड़ा था छापा
फतेहाबाद। बात कई साल पुरानी है। बाबा के आश्रम के खिलाफ पुलिस से शिकायत की गई थी। लोकल पुलिस ने एक्शन नहीं लिया। इस पर शिकायत डीजीपी तक पहुंची। तब डीजीपी के आदेश पर पुलिस ने जबरदस्त छापामारी की थी।