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बाबा को सुनाई दे गई थी मौत की आहट 

Tue, 28 Feb 2017 01:00 AM IST
बाबा को सुनाई दे गई थी मौत की आहट 
बाबा को सुनाई दे गई थी मौत की आहट  Updated Tue, 28 Feb 2017 01:00 AM IST
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बाबा को सुनाई दे गई थी मौत की आहट  - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

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बाबा मुंशीदास निषाद की हत्या की गई रविवार दोपहर साढ़े तीन बजे लेकिन उन्हें मौत की आहट शायद बहुत पहले सुनाई दे गई थी। तभी तो जेल से बाहर आने के बाद हर पल चौकन्ना रहते थे। उन्हें डर अपने दुश्मनों से था। बचने के उपाय भी किए। किले जैसे चार मंजिला भवन में अकेले सोते थे। चौथी मंजिल पर। पहले से चौथी तक लोहे के पांच मजबूत दरवाजे हैं। पांचों पर ताले लगाते थे। उन्हें क्या मालूम था कि मौत रात के अंधेरे में दबे पांव नहीं, दिन के उजाले में आंखों के सामने से आएगी।
बाबा की रहस्यमयी जिंदगी में दोस्त भी बहुत आए और दुश्मनों की भी कमी नहीं रही। दोस्त जान छिड़कते थे, तो दुश्मन जान लेना चाहते थे। बाबा के करीबी लोग बताते हैं कि  उन्हें खतरे का अहसास था। वह किसी पर भरोसा नहीं करते थे। अपना खाना खुद बनाते थे। किसी और के हाथ से दूध भी नहीं लेते थे। दिन में शिष्यों की भीड़ रहती थी, इसलिए कुछ बेखौफ हो जाते थे। जहां मन करता बैठ जाते।
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फिर भी कुछ एहतियात बरतते थे। उनकी जान लेने आए तीन युवकों को देखकर भी उनके मन में शायद कुछ खटका हुआ। इसीलिए उन्होंने उनसे नाम, पता बताने के लिए कहा। बाबा के पास उस समय रजिस्टर नहीं था। शादी के कार्ड पर ही नाम नोट किया। एक ने अपना नाम राजू और पता फिरोजाबाद बताया। बाबा ने अपने हाथ से लिखा। तभी दूसरे ने गोली मार दी।
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... तो खाली रह जाएगी बाबा की गद्दी
किसी को नहीं दी जड़ी बूटियों से उपचार की जानकारी
फतेहाबाद। बाबा की मौत के बाद आश्रम में हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल है कि उनकी गद्दी पर कौन बैठेगा? कौन है जो उनकी विरासत को संभाल सके। शिष्यों की बेचैनी इसलिए है क्योंकि बाबा ने अपनी किसी संतान को जड़ीबूटियों से उपचार की जानकारी नहीं दी। न ही शिष्यों को कुछ बताया। बाबा की दो पत्नियां हैं। पहली राजवती। उनके साथ शादी 1977 में हुई थी। दूसरी उर्मिला। उनके साथ विवाह हुआ था 2001 में। राजवती से एक बेटा राजकुमार (35) है। उर्मिला से पांच संताने हैं। इनमें शिवकुमार नौ वर्ष का है और ब्रजमोहन छह का। तीन बेटियां हैं। राजकुमार को आश्रम के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं। वह 15 साल पहले घर छोड़कर फिरोजाबाद चला गया था। प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता है। पिता की मौत का पता चलने पर आया है। बाबा की संपत्ति में 150 बीघा में आश्रम है। आगरा के बालूगंज में कोठी है। कई जगह जमीन है। आश्रम में एक इंटर कालेज है। साथ ही गौशाला है। इसमें 200 गाय हैं।

कड़ी सुरक्षा में हुई बाबा की अंत्येष्टि 
फतेहाबाद। डौकी के नरि गांव निवासी चर्चित बाबा मुंशी दास का शव देर रात पोस्टमार्टम के बाद गांव लाया गया। कड़ी सुरक्षा के बीच सोमवार दोपहर करीब 12:00 बजे आश्रम पर ही अंत्येष्टि कर दी गई। सीओ अशोक कुमार सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर रहे। गांव के रास्ते पर भी पुलिस तैनात रही। बवाल की आशंका को देखते हुए हर पाइंट पर फोर्स लगाया गया। बाबा के बड़े पुत्र राजकुमार ने बाबा को मुखाग्नि दी। अंत्येष्टि स्थल पर भाजपा प्रत्याशी एवं निषाद समाज के नेता जितेंद्र वर्मा, फिरोजाबाद की जिला पंचायत सदस्य ममता वर्मा, नाथूराम वर्मा मौजूद रहे। अंत्येष्टि के बाद लोग जब तक अपने घर नहीं चले गये तब तक पुलिस डटी रही। 

बाबा पर तीस साल में 37 मुकदमे दर्ज
फतेहाबाद। बाबा मुंशीदास पर 1986 से 2016 तक 30 साल में 37 मुकदमे दर्ज हुए। हत्या, धोखाधड़ी, मारपीट, सरकारी संपत्ति कब्जाने, सरकारी कर्मचारियों से मारपीट जैसे कई संगीन मामले दर्ज है। बाबा पर 1992 में हत्या, धोखाधड़ी, शराब तथा अवैध हथियार के 8 मुकदमे दर्ज हुए। धारा 420 के 7 मुकदमे भी दर्ज है। बाबा ने आश्रम के आसपास की पीएसी के लिए अधिगृहीत जमीन को भी कब्जाने का प्रयास किया। आश्रम के आसपास की जमीन या तो बाबा की थी या उन्होंने जबरन कब्जा ली।


नेताओं ने की हत्यारों को पकड़ने की मांग
फतेहाबाद। बाबा की अंत्येष्टि में शामिल जितेंद्र वर्मा, जिला पंचायत सदस्य ममता वर्मा ने हत्यारों को पकड़ने और मामले के खुलासा के लिए सीओ अशोक कुमार सिंह से मांग की। सीओ ने बताया कि दो नामजद मुरारी और शिवराम निवासी ग्राम नरि को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
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