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वाशिंग मशीन में बनाया जा रहा सिंथेटिक दूध पकड़ा
वाशिंग मशीन में बनाया जा रहा सिंथेटिक दूध पकड़ा
Updated Fri, 26 May 2017 12:56 AM IST
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वाशिंग मशीन में बनाया जा रहा सिंथेटिक दूध पकड़ा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की टीम ने गुरुवार को बरहन क्षेत्र के गांव कुम्हरैलिया मौजा खांडा में पुलिस फोर्स के साथ तीन मकानों पर छापा मारा। वहां बडे़ पैमाने पर नकली दूध बनाते पकड़ा गया। टीम ने भारी मात्रा में बना सामान, केमिकल, पाउडर, रिफाइंड और उपकरण बरामद किए। 2000 लीटर दूध नष्ट कराया गया। कार्रवाई के दौरान वहां काम करने वाले लोग भाग गए। एक महिला को हिरासत में ले लिया है। यह गोरखधंधा पांच सालों से चल रहा था।
नकली दूध बनाने की सूचना पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने सहायक आयुक्त खाद्य विनीत कुमार के नेतृत्व में सुबह नौ बजे रक्षपाल सिंह पुत्र दीवान सिंह, सुरेश पुत्र शैतान सिंह और राजपाल पुत्र रामजीलाल के मकानों में छापा मारा। टीम ने थाना बरहन से संपर्क करने के बजाए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से संपर्क कर सीधे पुलिस लाइन से फोर्स की व्यवस्था की थी। सुरेश और राजपाल सहित परिवार सहित दीवार फलांग कर भाग गए।
विनीत कुमार ने बताया कि दूध वाशिंग मशीन में बनाया जा रहा था। दूध डेरियों पर आपूर्ति की जाती थी। टीम ने तीनोें मकानों से भारी मात्रा में रिफाइंड, स्किम्न मिल्क, ड्राई ग्लूकोज, डिटर्जेंट पाउडर, लिक्विड डिटर्जेंट के अलावा कई ड्रमों में तेल बरामद किया गया है। केमिकल के नमूने लेने के बाद टीम ने थाना बरहन में मुकदमे दर्ज कराए।
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उधर, खाद्य विभाग की टीम ने रक्षपाल की विवाहित पुत्री को हिरासत में लिया तो वह जेल जाने के डर से रोने लगी। कुछ लोगों ने उसे छोड़ने की मांग की तो असिस्टेंट कमिश्नर ने उसके मां-बाप को सरेंडर करने की बात कह दी। अंशु के दो वर्ष के बच्चे को टीम ने पड़ोसियों के सुपुर्द कर उसे थाने ले गई।
सफेदी के लिए दूध में मिलाते थे सीमेंट
बरहन।
छापेमारी के दौरान टीम को केमिकल के साथ सफेद सीमेंट के कट्टे भी मिले हैं। बताया गया है कि चिनाई के काम आने वाला सफेद सीमेंट को भी प्रयोग किया जाता है। दो ड्रम से अधिक एक तेल जैसा पदार्थ भी मिला है। टीम के लोग भी यह नहीं बता सके कि यह किसका तेल है। यह पहला मौका है जब सिंथेटिक दूध में सीमेंट की मिलावट पकड़ी गई है। डिटर्जेंट, मिल्क पाउडर और अन्य केमिकल पहले भी पकड़े जाते रहे हैं। गांव वालों ने बताया कि रक्षपाल और उसके परिवार के लोग कहते थे कि दूध एकदम असली है, तभी तो इतना सफेद है। इसी चक्कर में लोग यह दूध खूब खरीदते थे।
गांव में खोल रखी थी दूध व पनीर की दुकान
बरहन। रक्षपाल के जिस मकान पर छापा मारा गया उसमें डेयरी है। मकान के बाहर मां गायत्री डेरी मिल्क लिखा होने के साथ खोया, पनीर, छैना, क्रीम व देशी घी का आर्डर बुक कराना भी लिखा हुआ है। इससे पता चलता है कि बड़ी डेयरी और चिलर प्लांट पर दूध भेजने के साथ रक्षपाल शादी विवाह में माल भेजने का आर्डर लेता है।
मजदूर से पैसेवाला बन गया रक्षपाल
बरहन।
ग्रामीणों ने बताया कि पांच साल पहले इन घरों के लोग मजदूरी करते थे। एफएसडीए की टीम ने बताया कि सिंथेटिक दूध एक लीटर तैयार करने में पांच से छह रुपये का खर्च आता है जबकि इसे 40 से 50 रुपये लीटर में बेचा जा रहा था। ये लोग सीधा 10 गुना कर रहे थे। गांव वालों ने बताया कि आसपास के गांवों में भी दूध की आपूर्ति की जाती थी।
मिलावटी दूध पहचानने के कुछ नुस्खे
सहायक आयुक्त खाद्य विनीत कुमार ने बताया कि मिलावटी दूध की घर पर पहचान की जा सकती है। दूध और दूध के उत्पादों में स्टार्च की जांच के लिए दो से तीन मिली लीटर सैंपल को पांच मिली लीटर पानी के साथ उबालें। उसे ठंडा करके दो से दिन दूध आयोडिन डालें। यदि स्टार्च मिला होगा तो रंग नीला हो जाएगा। इसी तरह यूरिया की जांच के लिए पांच मिली लीटर दूध में पांच ग्राम सोया आटा डालें। इसके बाद लिटमस पेपर डालें, यूरिया मिले होने पर दूध का रंग लाल हो जाएगा। यदि दूध में डिटरजेंट की जांच करने के लिए इसको टेस्ट ट्यूब में डालकर कुछ देर हिलाएं, साबुन का झाग बन जाएगा। सबसे अच्छा तरीका यह है कि दूध को जीभ पर एक-दो मिनट रखे रहें, दांत और जीभ में साबुन की अनुभूति होगी। एफएसडीए के फेसबुक पेज ‘एफएसडीए आगरा मंडल’ से खाद्य पदार्थों में मिलावट के संबंध में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
मिलावट के खेल से बढ़ रही किडनी, लिवर की बीमारी
खाद्य पदार्थों में सिंथेटिक रंगों और केमिकल के इस्तेमाल से लोगों में किडनी और लिवर की बीमारी बढ़ रही है। चिकित्सकाें के मुताबिक, मिलावटी दूध, मिठाइयों के सेवन से अपाच्य, भूख कम लगने जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैैं। लंबे समय इनके सेवन से किडनी, लिवर प्रभावित होने लगते हैं। दूध से क्रीम (वसा) निकाले जाने से बच्चों, महिलाओं, शारीरिक परिश्रम करने वाले लोगों की डाइट प्रभावित होगी। रिफाइंड की मिलावट से डायबिटीज, मोटापा यहां तक कि हार्ट की समस्या पैदा होती है।
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नकली दूध बनाने की सूचना पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने सहायक आयुक्त खाद्य विनीत कुमार के नेतृत्व में सुबह नौ बजे रक्षपाल सिंह पुत्र दीवान सिंह, सुरेश पुत्र शैतान सिंह और राजपाल पुत्र रामजीलाल के मकानों में छापा मारा। टीम ने थाना बरहन से संपर्क करने के बजाए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से संपर्क कर सीधे पुलिस लाइन से फोर्स की व्यवस्था की थी। सुरेश और राजपाल सहित परिवार सहित दीवार फलांग कर भाग गए।
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विनीत कुमार ने बताया कि दूध वाशिंग मशीन में बनाया जा रहा था। दूध डेरियों पर आपूर्ति की जाती थी। टीम ने तीनोें मकानों से भारी मात्रा में रिफाइंड, स्किम्न मिल्क, ड्राई ग्लूकोज, डिटर्जेंट पाउडर, लिक्विड डिटर्जेंट के अलावा कई ड्रमों में तेल बरामद किया गया है। केमिकल के नमूने लेने के बाद टीम ने थाना बरहन में मुकदमे दर्ज कराए।
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उधर, खाद्य विभाग की टीम ने रक्षपाल की विवाहित पुत्री को हिरासत में लिया तो वह जेल जाने के डर से रोने लगी। कुछ लोगों ने उसे छोड़ने की मांग की तो असिस्टेंट कमिश्नर ने उसके मां-बाप को सरेंडर करने की बात कह दी। अंशु के दो वर्ष के बच्चे को टीम ने पड़ोसियों के सुपुर्द कर उसे थाने ले गई।
सफेदी के लिए दूध में मिलाते थे सीमेंट
बरहन।
छापेमारी के दौरान टीम को केमिकल के साथ सफेद सीमेंट के कट्टे भी मिले हैं। बताया गया है कि चिनाई के काम आने वाला सफेद सीमेंट को भी प्रयोग किया जाता है। दो ड्रम से अधिक एक तेल जैसा पदार्थ भी मिला है। टीम के लोग भी यह नहीं बता सके कि यह किसका तेल है। यह पहला मौका है जब सिंथेटिक दूध में सीमेंट की मिलावट पकड़ी गई है। डिटर्जेंट, मिल्क पाउडर और अन्य केमिकल पहले भी पकड़े जाते रहे हैं। गांव वालों ने बताया कि रक्षपाल और उसके परिवार के लोग कहते थे कि दूध एकदम असली है, तभी तो इतना सफेद है। इसी चक्कर में लोग यह दूध खूब खरीदते थे।
गांव में खोल रखी थी दूध व पनीर की दुकान
बरहन। रक्षपाल के जिस मकान पर छापा मारा गया उसमें डेयरी है। मकान के बाहर मां गायत्री डेरी मिल्क लिखा होने के साथ खोया, पनीर, छैना, क्रीम व देशी घी का आर्डर बुक कराना भी लिखा हुआ है। इससे पता चलता है कि बड़ी डेयरी और चिलर प्लांट पर दूध भेजने के साथ रक्षपाल शादी विवाह में माल भेजने का आर्डर लेता है।
मजदूर से पैसेवाला बन गया रक्षपाल
बरहन।
ग्रामीणों ने बताया कि पांच साल पहले इन घरों के लोग मजदूरी करते थे। एफएसडीए की टीम ने बताया कि सिंथेटिक दूध एक लीटर तैयार करने में पांच से छह रुपये का खर्च आता है जबकि इसे 40 से 50 रुपये लीटर में बेचा जा रहा था। ये लोग सीधा 10 गुना कर रहे थे। गांव वालों ने बताया कि आसपास के गांवों में भी दूध की आपूर्ति की जाती थी।
मिलावटी दूध पहचानने के कुछ नुस्खे
सहायक आयुक्त खाद्य विनीत कुमार ने बताया कि मिलावटी दूध की घर पर पहचान की जा सकती है। दूध और दूध के उत्पादों में स्टार्च की जांच के लिए दो से तीन मिली लीटर सैंपल को पांच मिली लीटर पानी के साथ उबालें। उसे ठंडा करके दो से दिन दूध आयोडिन डालें। यदि स्टार्च मिला होगा तो रंग नीला हो जाएगा। इसी तरह यूरिया की जांच के लिए पांच मिली लीटर दूध में पांच ग्राम सोया आटा डालें। इसके बाद लिटमस पेपर डालें, यूरिया मिले होने पर दूध का रंग लाल हो जाएगा। यदि दूध में डिटरजेंट की जांच करने के लिए इसको टेस्ट ट्यूब में डालकर कुछ देर हिलाएं, साबुन का झाग बन जाएगा। सबसे अच्छा तरीका यह है कि दूध को जीभ पर एक-दो मिनट रखे रहें, दांत और जीभ में साबुन की अनुभूति होगी। एफएसडीए के फेसबुक पेज ‘एफएसडीए आगरा मंडल’ से खाद्य पदार्थों में मिलावट के संबंध में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
मिलावट के खेल से बढ़ रही किडनी, लिवर की बीमारी
खाद्य पदार्थों में सिंथेटिक रंगों और केमिकल के इस्तेमाल से लोगों में किडनी और लिवर की बीमारी बढ़ रही है। चिकित्सकाें के मुताबिक, मिलावटी दूध, मिठाइयों के सेवन से अपाच्य, भूख कम लगने जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैैं। लंबे समय इनके सेवन से किडनी, लिवर प्रभावित होने लगते हैं। दूध से क्रीम (वसा) निकाले जाने से बच्चों, महिलाओं, शारीरिक परिश्रम करने वाले लोगों की डाइट प्रभावित होगी। रिफाइंड की मिलावट से डायबिटीज, मोटापा यहां तक कि हार्ट की समस्या पैदा होती है।