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तेल माफिया की करतूत से समय से पहले टूट रही सड़कें

Fri, 24 Feb 2017 12:34 AM IST
तेल माफिया की करतूत से समय से पहले टूट रही सड़कें
तेल माफिया की करतूत से समय से पहले टूट रही सड़कें Updated Fri, 24 Feb 2017 12:34 AM IST
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जर्जर रोड - फोटो : अमर उजाला
तेल माफिया सिर्फ तेल की चोरी नहीं कर रहे। काले तेल का काला कारोबार भी चला रहे हैं। वही काला तेल जो डामर की जगह इस्तेमाल किया जाता है। यह देखने में काला है, गाढ़ा है, एकदम  डामर जैसा लेकिन टिकाऊ दस फीसदी भी नहीं। नतीजा सड़कें बनते ही टूट रही हैं। काले तेल माफियाओं का नेटवर्क मथुरा से मेरठ तक फैला हुआ है। पुलिस अब इनकी भी फाइलें खंगाल रही है।
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मथुरा रिफाइनरी में बिटुमिन नाम का केमिकल भी बनता है। इसे ही डामर (तारकोल) कहा जाता है। तेल माफिया ने इसकी सप्लाई में सेंध लगा रखी है। इसकी सप्लाई पाइप से नहीं, टैंकरों से होती है। रिफाइनरी से निकलते ही टैंकर के टैंकर बीच में गायब कर दिए जाते हैं। इन्हें माफिया अपने प्लांट पर ले जाते हैं। यहां डामर बनाने के उपकरण लगे होते हैं। डामर को उबाला जाता है। इसमें कुछ केमिकल मिलाए जाते हैं। फिर केरोसिन मिला दिया जाता है। इस तरह एक टैंकर डामर से दस टैंकर काला तेल बना लिया जाता  है। इसमें खर्चा डामर के मुकाबले 15 फीसदी आता है। सड़कों के ठेकेदारों का काले तेल के माफियाओं से संपर्क है। वह डामर की जगह काले तेल के ड्रम ले जाते हैं। इसका इस्तेमाल ही सड़क बनाने में किया जाता है।
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नतीजा यह होता है कि जो सड़क पांच साल के लिए बनती है, वह पांच महीने भी नहीं टिक पाती। आगरा और मथुरा में पिछले पांच सालों में 50 से अधिक लोग काले तेल का अवैध कारोबार चलाने में गिरफ्तार किए गए हैं। इस तेल की सप्लाई अलीगढ़, मेरठ, मुजफ्फरनगर तक हुई है। मेरठ के कई माफियाओं के नाम भी सामने आ चुके हैं।
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चाल बदलते रहे माफिया
- रिफाइनरी 1974 में बनी। शुरू में टैंकरों से थोड़ा थोड़ा तेल चोरी किए जाने की शिकायतें आईं। उन पर ध्यान नहीं दिया गया।
- 1990 में तेल चोरों का संगठित गिरोह बन गया। गांवों में जमीन में टैंकर गाढ़ दिए गए। इनमें चोरी का तेल स्टाक किया जाता था। 
- 2000 तक तेल चोरी ने बड़ा रूप ले लिया। पहले चोरी का तेल गांवों में ड्रमों से बेचा जाता था, अब सीधे पेट्रोल पंपों को सप्लाई होने लगी।
- 2010 में काले तेल के काले कारोबार ने जोर पकड़ा। जो डामर चोरी किया जाता है उससे काला तेल बनाया जाता। इसे ठेकेदारों को बेचा जाता।
- 2015 में पुलिस ने काले तेल पर सख्ती की। आगरा, मथुरा, राजस्थान, मेरठ के माफियाओं के नाम सामने आए।
- 2017 में पाइप लाइन से सीधे तेल चोरी का बड़ा मामला सामने आया है। इससे पहले तीन बार ऐसे छोटे मामले सामने आते रहे।
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