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कुंदनिका कोर्ट में पेश, स्थाई जमानत मिली
अमर उजाला अागरा
Updated Sun, 03 Apr 2016 12:06 AM IST
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कुंदनिका
- फोटो : अमर उजाला आगरा
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विहिप नेता अरुण माहौर की श्रद्धांजलि सभा में भड़काऊ भाषण देने की आरोपी और भाजपा पार्षद दल की नेता कुंदनिका शर्मा शनिवार सुबह 10:30 बजे एसीजेएम तृतीय सतीश चंद्र त्रिपाठी की कोर्ट में पेश हुईं। कोर्ट ने उन्हें स्थाई जमानत दे दी।
बता दें, पुलिस ने कुंदनिका शर्मा को 21 मार्च को गिरफ्तार किया था। उन्हें कोर्ट में पेश किया था। अपनी गिरफ्तारी से पहले उन्होंने (18 मार्च को) हाईकोर्ट से सेम डे सुनवाई का आदेश प्राप्त कर लिया था। वहीं, पुलिस ने एफआईआर से लेकर गिरफ्तारी चालान तक में कुंदनिका शर्मा के पति का नाम दिनेश चंद शर्मा की जगह विनोद शर्मा लिख रखा था। इसके लिए विवेचक को कोर्ट में अपनी भूल सुधारनी पड़ी। इसी के चलते कुंदनिका शर्मा को कोर्ट से दो अप्रैल तक के लिए अंतरिम जमानत मिल गई थी। आदेश में शर्त रखी थी कि उन्हें तय तिथि पर हर हाल में कोर्ट में पेश होना होगा। उनके अधिवक्ता ने बहस में कहा कि कुंदनिका ने कोई अपराध नहीं किया है। उन्हें राजनीतिक द्वेष वश फंसाया गया है। कोर्ट ने कुंदनिका शर्मा को सीआरपीसी की धारा 437 परंतुक -2 का लाभ प्रदान करते हुए स्थाई जमानत देते हुए रिहा करने के आदेश पारित किए। कोर्ट ने उन्हें 20-20 हजार के दो जमानतदार और इतनी ही राशि के निजी मुचलके पर रिहा करने के आदेश दिए। कोर्ट में जमानती प्रस्तुत करने के बाद कोर्ट से बाहर आईं। दीवानी में उनकी रिहाई से खुश भाजपा नेताआें, कार्यकर्ता और महिलाओं ने जमकर नारेबाजी की। कुंदनिका शर्मा की ओर से प्रमुख रूप से अधिवक्ता बसंत गुप्ता, हेमेंद्र शर्मा, अनिल शर्मा, लक्ष्मी लवानियां, भगवान सिंह, तपन वर्मा, अशोक कोटिया, रमेश चंद लोधी, प्रदीप पांडे, सीपी सिंह, सुधीर उपाध्याय आदि ने बहस की।
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बता दें, पुलिस ने कुंदनिका शर्मा को 21 मार्च को गिरफ्तार किया था। उन्हें कोर्ट में पेश किया था। अपनी गिरफ्तारी से पहले उन्होंने (18 मार्च को) हाईकोर्ट से सेम डे सुनवाई का आदेश प्राप्त कर लिया था। वहीं, पुलिस ने एफआईआर से लेकर गिरफ्तारी चालान तक में कुंदनिका शर्मा के पति का नाम दिनेश चंद शर्मा की जगह विनोद शर्मा लिख रखा था। इसके लिए विवेचक को कोर्ट में अपनी भूल सुधारनी पड़ी। इसी के चलते कुंदनिका शर्मा को कोर्ट से दो अप्रैल तक के लिए अंतरिम जमानत मिल गई थी। आदेश में शर्त रखी थी कि उन्हें तय तिथि पर हर हाल में कोर्ट में पेश होना होगा। उनके अधिवक्ता ने बहस में कहा कि कुंदनिका ने कोई अपराध नहीं किया है। उन्हें राजनीतिक द्वेष वश फंसाया गया है। कोर्ट ने कुंदनिका शर्मा को सीआरपीसी की धारा 437 परंतुक -2 का लाभ प्रदान करते हुए स्थाई जमानत देते हुए रिहा करने के आदेश पारित किए। कोर्ट ने उन्हें 20-20 हजार के दो जमानतदार और इतनी ही राशि के निजी मुचलके पर रिहा करने के आदेश दिए। कोर्ट में जमानती प्रस्तुत करने के बाद कोर्ट से बाहर आईं। दीवानी में उनकी रिहाई से खुश भाजपा नेताआें, कार्यकर्ता और महिलाओं ने जमकर नारेबाजी की। कुंदनिका शर्मा की ओर से प्रमुख रूप से अधिवक्ता बसंत गुप्ता, हेमेंद्र शर्मा, अनिल शर्मा, लक्ष्मी लवानियां, भगवान सिंह, तपन वर्मा, अशोक कोटिया, रमेश चंद लोधी, प्रदीप पांडे, सीपी सिंह, सुधीर उपाध्याय आदि ने बहस की।
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