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छलकते रहे मौत के प्याले, सोते रहे आबकारी वाले
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Mon, 06 Jul 2015 02:18 AM IST
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जहरीली शराब से आठ मौत हो जाने के बाद भी आबकारी विभाग के अधिकारी क्या
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किसी कर्मचारी तक पर कार्रवाई नहीं हुई है। इतने कोहराम के बावजूद महकमे
पर कोई असर भी नहीं है। न तो कोई शराब माफिया अभी तक पकड़ा गया है और न ही
अवैध भट्टियां तोड़ी गई हैं। यह साफ हो चुका है कि खंदौली से शमशाबाद तक
बड़े पैमाने पर जहरीले जाम खरीदे गए हैं। इसके बावजूद प्रशासन ने गांवों
में मुनादी कराकर चेतावनी नहीं दी है कि कच्ची शराब कोई न पिए। इस लापरवाही
के चलते कहना मुश्किल है कि और कहर अभी और कितने बरपेगा? यह हाल तब है
जबकि शासन ने एक महीने पहले ही इस खतरे से अफसरों को आगाह कर दिया था।
जहरीली शराब पीने से मई में उन्नाव में हुई मौतों और अक्टूबर में प्रस्तावित पंचायत चुनाव के मद्देनजर शासन ने जून के शुरू में ही आबकारी विभाग को निर्देश दिए थे कि कच्ची शराब बनाने वालों को खिलाफ सख्त अभियान चलाया जाए। आगरा के आबकारी अधिकारियों को बताया गया था कि ढाबों पर मिथाइल अल्कोहल और स्प्रिट के ट्रक रुकते हैं। यहीं से शराब माफिया खरीदकर ले जाते हैं। यह भी कहा गया था कि जहां भी भट्ठियां चल रही हों उन्हें ध्वस्त किया जाए और इस कार्य में संलिप्त लोगों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई की जाए। तस्करी की शराब के गोरखधंधे पर लगाम लगाई जाए। यह कार्रवाई जून में होनी थी। लेकिन आबकारी विभाग के अफसरों ने ध्यान नहीं दिया।
जिले के आबकारी विभाग के इंस्पेक्टरों से पूछा गया कि अभियान के दौरान क्या कार्रवाई की तो उन्होंने यह कहकर टाल दिया कि कई टीम बनी थीं, किसने क्या किया हमें जानकारी नहीं है।
जब जिला आबकारी अधिकारी आरएन यादव से यही सवाल दोहराया गया तो उन्होंने भी टालने वाले अंदाज में कह दिया कि आंकड़े कलेक्ट किए जा रहे हैं। इससे साफ है कि आबकारी विभाग के अधिकारी जिले में हुई आठ मौतों के बाद कागजी घोड़े दौड़ाने में लगे हैं।
मिलावटी शराब से हुई मौत
शमशाबाद में हुई पांच मौतों के मामले में सिपाही और दरोगा खिलाफ कार्रवाई हो गई। लेकिन आबकारी विभाग के किसी भी अधिकारी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई। जबकि प्रभावित गांवों के दौरे पर उप आबकारी आयुक्त अमर सिंह ने भी इस बात के संकेत दिए हैं कि मौत मिलावटी शराब की वजह से हुई हैं। सूत्रों की मानें तो प्रशासनिक अधिकारियों की रिपोर्ट भी आबकारी विभाग के अफसरों की लापरवाही की ओर इशारा कर रही है। खंदौली में हुई घटना की प्रशासनिक जांच हो चुकी है। यहां भी आबकारी विभाग के अफसर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते हैं।
पुलिस पहुंचने से पहले जलाए सुबूत
गांव लालगढ़ी में शराब पीकर पांच लोगों की हालत बिगड़ने की जानकारी दुकानदार राजू को हुई तो उसने शाम को ही दुकान बंद कर दी। इसके बाद दुकान में रखी जहरीली शराब को एक कोने में इकट्ठा करके जला दिया। इसके बाद उसने खेतों में छुपाई शराब को भी ठिकाने लगा दिया। ग्रामीणों ने बताया कि वह रात में ही अपने परिवार को लेकर घर में ताला लगाकर फरार हो गया था। उसे अंदेशा था कि जहरीली शराब पीने से ग्रामीणों की मौत हो सकती है। दोपहर को गांव पहुंची पुलिस ने जब दुकान का ताला तोड़कर देखा तो जली हुई शराब के पौव्वे पड़े मिले। पुलिस ने दुकान से एक शराब की शीशी कब्जे में ली है। इसके बाद पुलिस उसके घर पहुंची मगर वह फरार हो चुका था।
शराब सप्लायर पकड़ा, कई हिरासत में
पुलिस ने बांस दलेल में दबिश देकर शराब सप्लायर अवधेश सिंह को पकड़ लिया। यहां से शराब की बोतलों पर लगाए जाने वाले होलोग्राम आदि बरामद किए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अवधेश ही आसपास के इलाकों में शराब की सप्लाई करता है। इसके साथ इस धंधे से जुड़े आधा दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में ले लिया है।
सराय दारुपा में हुई थीं दो मौतें
खंदौली के गांव सराय दारुपा में जहरीली शराब पीने से 20 अप्रैल को दो ग्रामीणों की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी शराब की बिक्री पर अंकुश नहीं लगा। उस वक्त डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने थानाध्यक्ष समेत कई सिपाहियों को लाइन हाजिर कर दिया था।
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जहरीली शराब पीने से मई में उन्नाव में हुई मौतों और अक्टूबर में प्रस्तावित पंचायत चुनाव के मद्देनजर शासन ने जून के शुरू में ही आबकारी विभाग को निर्देश दिए थे कि कच्ची शराब बनाने वालों को खिलाफ सख्त अभियान चलाया जाए। आगरा के आबकारी अधिकारियों को बताया गया था कि ढाबों पर मिथाइल अल्कोहल और स्प्रिट के ट्रक रुकते हैं। यहीं से शराब माफिया खरीदकर ले जाते हैं। यह भी कहा गया था कि जहां भी भट्ठियां चल रही हों उन्हें ध्वस्त किया जाए और इस कार्य में संलिप्त लोगों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई की जाए। तस्करी की शराब के गोरखधंधे पर लगाम लगाई जाए। यह कार्रवाई जून में होनी थी। लेकिन आबकारी विभाग के अफसरों ने ध्यान नहीं दिया।
जिले के आबकारी विभाग के इंस्पेक्टरों से पूछा गया कि अभियान के दौरान क्या कार्रवाई की तो उन्होंने यह कहकर टाल दिया कि कई टीम बनी थीं, किसने क्या किया हमें जानकारी नहीं है।
जब जिला आबकारी अधिकारी आरएन यादव से यही सवाल दोहराया गया तो उन्होंने भी टालने वाले अंदाज में कह दिया कि आंकड़े कलेक्ट किए जा रहे हैं। इससे साफ है कि आबकारी विभाग के अधिकारी जिले में हुई आठ मौतों के बाद कागजी घोड़े दौड़ाने में लगे हैं।
मिलावटी शराब से हुई मौत
शमशाबाद में हुई पांच मौतों के मामले में सिपाही और दरोगा खिलाफ कार्रवाई हो गई। लेकिन आबकारी विभाग के किसी भी अधिकारी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई। जबकि प्रभावित गांवों के दौरे पर उप आबकारी आयुक्त अमर सिंह ने भी इस बात के संकेत दिए हैं कि मौत मिलावटी शराब की वजह से हुई हैं। सूत्रों की मानें तो प्रशासनिक अधिकारियों की रिपोर्ट भी आबकारी विभाग के अफसरों की लापरवाही की ओर इशारा कर रही है। खंदौली में हुई घटना की प्रशासनिक जांच हो चुकी है। यहां भी आबकारी विभाग के अफसर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते हैं।
पुलिस पहुंचने से पहले जलाए सुबूत
गांव लालगढ़ी में शराब पीकर पांच लोगों की हालत बिगड़ने की जानकारी दुकानदार राजू को हुई तो उसने शाम को ही दुकान बंद कर दी। इसके बाद दुकान में रखी जहरीली शराब को एक कोने में इकट्ठा करके जला दिया। इसके बाद उसने खेतों में छुपाई शराब को भी ठिकाने लगा दिया। ग्रामीणों ने बताया कि वह रात में ही अपने परिवार को लेकर घर में ताला लगाकर फरार हो गया था। उसे अंदेशा था कि जहरीली शराब पीने से ग्रामीणों की मौत हो सकती है। दोपहर को गांव पहुंची पुलिस ने जब दुकान का ताला तोड़कर देखा तो जली हुई शराब के पौव्वे पड़े मिले। पुलिस ने दुकान से एक शराब की शीशी कब्जे में ली है। इसके बाद पुलिस उसके घर पहुंची मगर वह फरार हो चुका था।
शराब सप्लायर पकड़ा, कई हिरासत में
पुलिस ने बांस दलेल में दबिश देकर शराब सप्लायर अवधेश सिंह को पकड़ लिया। यहां से शराब की बोतलों पर लगाए जाने वाले होलोग्राम आदि बरामद किए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अवधेश ही आसपास के इलाकों में शराब की सप्लाई करता है। इसके साथ इस धंधे से जुड़े आधा दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में ले लिया है।
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सराय दारुपा में हुई थीं दो मौतें
खंदौली के गांव सराय दारुपा में जहरीली शराब पीने से 20 अप्रैल को दो ग्रामीणों की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी शराब की बिक्री पर अंकुश नहीं लगा। उस वक्त डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने थानाध्यक्ष समेत कई सिपाहियों को लाइन हाजिर कर दिया था।
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