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आगरा: पुलिस की लापरवाही से पांच साल से जेल में बंद हैं बेगुनाह दंपती, कोर्ट ने दिया रिहाई का आदेश

Fri, 22 Jan 2021 09:50 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 22 Jan 2021 09:50 AM IST
सार

  • उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में अदालत ने हत्या के आरोप में पांच वर्षों से जेल में बंद दंपती को बेगुनाह पाते हुए रिहा करने का आदेश दिया है।

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court ordered innocent couple jailed for five years will be released in agra
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

आगरा के अपर जिला जज ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने पांच वर्षों से जेल में बंद बाह क्षेत्र के जरार निवासी दंपती को मासूम की हत्या के मामले में बेगुनाह पाते हुए रिहा करने का आदेश दिया है। पुलिस ने इन्हें जेल भिजवा दिया था, जबकि हत्या किसी और ने की। अदालत का यह भी आदेश है कि जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाए और फिर से जांच कर असली हत्यारों का पता लगाया जाए।

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घटना एक सितंबर, 2015 को हुई थी। बाह क्षेत्र के जरार निवासी योगेंद्र सिंह का पांच साल का बेटा रंजीत सिंह उर्फ चुन्ना शाम तकरीबन साढ़े पांच बजे घर से अपनी मां श्वेता से अंबरीश गुप्ता की दुकान पर जाने की कहकर गया था। रात तक लौटकर नहीं आया तो योगेंद्र सिंह ने बेटे की तलाश की। अंबरीश की दुकान बंद मिली। कई लोगों ने बच्चे को ढूंढा, लेकिन वह नहीं मिला। 
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दो सितंबर, 2015 को सुबह 11 बजे कोतवाल धर्मशाला के पास बृह्मचारी गुप्ता के बंद पड़े मकान में रंजीत का शव पड़ा मिला था। योगेंद्र सिंह ने मुकदमा दर्ज कराया। इसमें आरोप लगाया था कि बेटे की हत्या मोहल्ला मसजिद निवासी नरेंद्र सिंह और उसकी पत्नी नजमा ने की है। उनसे काफी दिन पहले झगड़ा हुआ था। तब दोनों ने धमकी दी थी। घटना से एक दिन पहले नजमा की गोदी में बेटे को बैठा हुआ देखा था। वह नमकीन खा रहा था। दोनों ने रंजिश में चाकुओं से गोदकर उसको मार डाला।

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कुबूलनामा : बगैर जांच के ही लगा दी थी चार्जशीट
अभियोजन की ओर से कोर्ट में छह गवाह और 32 सुबूत पेश किए गए। अभियुक्त की ओर से गवाहों से जिरह अधिवक्ता वंशो बाबू ने की। उनकी जिरह में विवेचक ने कोर्ट में स्वीकार किया कि बच्चे की हत्या को लेकर भारी जनाक्रोश था। इस कारण यह जानने की कोशिश नहीं की गई कि किसके खिलाफ मुकदमा लिखा गया है? क्या रंजिश थी? भारी जन आक्रोश को देखते हुए नामजदों के खिलाफ आनन-फानन में विवेचना पूर्ण करके चार्जशीट लगा दी। दोनों को जेल भेजा गया था।

टिप्पणी : निर्दोष जेल में और हत्यारोपी खुले घूम रहे हैं
अदालत ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण पक्ष यह है कि वास्तविक हत्यारोपी स्वच्छंद विचरण के लिए स्वतंत्र हैं, जबकि निर्दोषों को बिना वजह पांच साल तक जेल में रहना पड़ा। इसके लिए निश्चित रूप से अभियोजन और विशेष रूप से विवेचक की उपेक्षात्मक व उदासीनता से परिपूर्ण विवेचना उत्तरदायी है।

विवेचक पर कार्रवाई हो, दंपती को मुआवजा दिलाया जाए
अपर जिला जज ने एसएसपी को पत्र लिखकर विवेचक के खिलाफ कार्रवाई के आदेश किए हैं। निर्दोषों को पांच साल तक जेल में रखने पर उन्हें बतौर प्रतिकर मुआवजा दिलाने का नोटिस भी जारी किया है। विवेचक अलीगढ़ की क्राइम ब्रांच प्रभारी ब्रह्म सिंह थे।
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