{"_id":"5c7161cfbdec224cb044efbc","slug":"corruption-case-filed-against-agra-nagar-nigam-employee","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"नगर निगम के कर्मचारी ने खर्च किए आय से 73 लाख अधिक, भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
नगर निगम के कर्मचारी ने खर्च किए आय से 73 लाख अधिक, भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज
Sat, 23 Feb 2019 08:37 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 23 Feb 2019 08:37 PM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आगरा नगर निगम के नायब मोहर्रिर सुरेश कुमार दीपक के खिलाफ थाना हरीपर्वत में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का केस दर्ज किया गया है। विजिलेंस की जांच में पाया गया है कि उसने अपने ज्ञात एवं वैद्य स्रोतों से 2.35 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की, जबकि संपत्ति और भरण पोषण पर किया गया खर्च 3.08 करोड़ रुपये है। 73 लाख से अधिक खर्च करने के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। विजिलेंस की खुली जांच में इसकी पुष्टि होने पर कार्रवाई के आदेश किए गए।
न्यू सुभाष नगर के लायर्स कालोनी निवासी सुरेश कुमार दीपक नगर निगम में कई साल से नायब मोहर्रिर के पद पर तैनात है। वर्ष 2015 में उसके खिलाफ जांच के आदेश किए गए थे। इसके बाद विजिलेंस ने जांच की। जांच में पाया कि नायब मोहर्रिर ने 2,35,83,327 रुपये की आय अर्जित की। इस दौरान उन्होंने अर्जन और भरण पोषण पर 3,08,89,925 रुपये खर्च किए।
इससे पता चला कि उन्होंने 73,06598 रुपये आय से अधिक खर्च किए। इस खर्च के संबंध में सुरेश कुमार दीपक की ओर से कोई संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इस पर निरीक्षक श्याम सिंह ने नायाब मोहर्रिर के खिलाफ थाना हरीपर्वत में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1) (ई) और 13(2) में मुकदमा दर्ज कराया है। विजिलेंस ही अब जांच के बाद कार्रवाई करेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
न्यू सुभाष नगर के लायर्स कालोनी निवासी सुरेश कुमार दीपक नगर निगम में कई साल से नायब मोहर्रिर के पद पर तैनात है। वर्ष 2015 में उसके खिलाफ जांच के आदेश किए गए थे। इसके बाद विजिलेंस ने जांच की। जांच में पाया कि नायब मोहर्रिर ने 2,35,83,327 रुपये की आय अर्जित की। इस दौरान उन्होंने अर्जन और भरण पोषण पर 3,08,89,925 रुपये खर्च किए।
विज्ञापन
इससे पता चला कि उन्होंने 73,06598 रुपये आय से अधिक खर्च किए। इस खर्च के संबंध में सुरेश कुमार दीपक की ओर से कोई संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इस पर निरीक्षक श्याम सिंह ने नायाब मोहर्रिर के खिलाफ थाना हरीपर्वत में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1) (ई) और 13(2) में मुकदमा दर्ज कराया है। विजिलेंस ही अब जांच के बाद कार्रवाई करेगी।
विज्ञापन
सरकारी नौकरी के दौरान किया निजी व्यवसाय
नगर निगम के नायब मोहर्रिर सुरेश कुमार दीपक के खिलाफ नगर निगम में शिकायत हुई थी। इसमें कहा गया था कि उन्होंने नगर निगम की नौकरी के दौरान निजी व्यवसाय किया। जमीन की खरीद फरोख्त की। लायर्स कालोनी के पास सुरेश दीपक ने आलीशान घर बनाया है। उसके परिवार में आलीशान कारें और शस्त्र के लाइसेंस भी हैं। सुरेश दीपक पर कर निर्धारण में गड़बड़ी और टैक्स वसूली में गड़बड़ी के आरोप भी लग चुके हैं।
गड़बड़ी के आरोप में हुआ था निलंबित
सुरेश कुमार दीपक को 2010 में तत्कालीन नगर आयुक्त विनय शंकर पांडे के कार्यकाल में निलंबित किया गया था। नगर निगम सूत्रों के मुताबिक, टैक्स वसूली में गड़बड़ी और लापरवाही पर उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई थी। करीब सात माह पहले नगर आयुक्त अरुण प्रकाश ने भी सुरेश दीपक को निलंबित किया था। आरोप थे कि वह विजिलेंस जांच में सहयोग नहीं कर रहे। हालांकि सुरेश दीपक निलंबन के खिलाफ कोर्ट से स्थगनादेश ले आया था।
मैंने कुछ गलत नहीं किया - सुरेश दीपक
सुरेश दीपक का कहना है कि निजी व्यवसाय करने के लिए उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों से अनुमति ली थी। यह मुकदमा गलत लिखा गया है। जांच के जो आदेश आए थे, उनके मुताबिक तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त कासिम रजा और सुरेश दीपक राजस्व निरीक्षक के खिलाफ जांच करनी थी, लेकिन वह नायब मोहर्रिर है।
गड़बड़ी के आरोप में हुआ था निलंबित
सुरेश कुमार दीपक को 2010 में तत्कालीन नगर आयुक्त विनय शंकर पांडे के कार्यकाल में निलंबित किया गया था। नगर निगम सूत्रों के मुताबिक, टैक्स वसूली में गड़बड़ी और लापरवाही पर उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई थी। करीब सात माह पहले नगर आयुक्त अरुण प्रकाश ने भी सुरेश दीपक को निलंबित किया था। आरोप थे कि वह विजिलेंस जांच में सहयोग नहीं कर रहे। हालांकि सुरेश दीपक निलंबन के खिलाफ कोर्ट से स्थगनादेश ले आया था।
मैंने कुछ गलत नहीं किया - सुरेश दीपक
सुरेश दीपक का कहना है कि निजी व्यवसाय करने के लिए उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों से अनुमति ली थी। यह मुकदमा गलत लिखा गया है। जांच के जो आदेश आए थे, उनके मुताबिक तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त कासिम रजा और सुरेश दीपक राजस्व निरीक्षक के खिलाफ जांच करनी थी, लेकिन वह नायब मोहर्रिर है।