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बच्चे की मौत पर हास्पिटल में तोड़फोड़
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
Updated Thu, 31 Dec 2015 02:21 AM IST
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देहली गेट स्थित वीमैन्स हास्पिटल एंड रवि टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर में भर्ती न्यूमोनिया से पीड़ित एक साल के बच्चे की उपचार के दौरान मौत होने पर उसके परिवारीजन भड़क उठे। इन लोगों ने हंगामा करते हुए हास्पिटल में तोड़फोड़ कर डाली। कुर्सियां पलट दीं। पथराव कर शीशे तोड़ दिए। हास्पिटल के सामने जाम लगा दिया। बाद में ट्रैफिक पुलिस के पहुंचने पर केस दर्ज कराने की धमकी देते हुए चले गए।
फीरोजाबाद के आलमपुर गांव के काले के बेटे मुकुल को कई दिन से न्यूमोनिया था। हालत बिगड़ने पर उसे रवि हास्पिटल लाया गया। उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी। चार दिन के उपचार के बाद भी उसकी सुधार नहीं हुआ। बुधवार को हालत और बिगड़ गई। काले का आरोप है कि उन्होंने डाक्टर से बच्चे को रेफर करने के लिए कहा, लेकिन वह राजी नहीं हुआ।
वह उसे जयपुर ले जाना चाहता था, लेकिन हास्पिटल के स्टाफ ने उसे डिस्चार्ज नहीं किया। कहते रहे कि वह यहीं ठीक हो जाएगा। दोपहर को दो बजे उसकी सांसें थम गईं। उसके उपचार में भी लापरवाही बरती गई।
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भर्ती मरीजों ने बताया कि काले पहले तो अपने मृत बच्चे को लेकर चुपचाल चला गया। लेकिन थोड़ी देर बाद महिलाओं समेत 20-25 लोगों के साथ पहुंचा। इन लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। कुर्सियां पलट दीं। पथराव किया, जिससे शीशे टूट गए। वहां भारी भीड़ जमा हो गई। इसके बाद इन लोगों ने हास्पिटल के सामने जाम लगा दिया। यहां वैसे भी दिन भर जाम की स्थिति रहती है। इसके बाद ट्रैफिक पुलिस आई तो वे लोग चले गए।
हास्पिटल की गलती नहीं
रवि हास्पिटल के प्रशासनिक प्रभारी सीपी शर्मा ने बताया कि लोग झूठा आरोप लगा रहे हैं। बच्चे की तबीयत बहुत नाजुक थी। उसे रेफर किया गया था, लेकिन कई बार कहने पर भी वे लोग उसे ले नहीं जा रहे थे। उसने उपचार के पैसे तक नहीं लिए गए। एक बार चले गए थे, लेकिन गांव के लोगों के आने पर तोड़फोड़ कर दी। उनके खिलाफ केस दर्ज कराया जाएगा।
नहीं पहुंची पुलिस
तोड़फोड़ शुरू होते ही हास्पिटल के कर्मचारियों ने 100 नंबर पर सूचना दी लेकिन एक घंटे बाद भी पुलिस नहीं पहुंची। ट्रैफिक जाम हो जाने के चलते पास से ट्रैफिक पुलिस पहुंच गई, लेकिन थाना और चौकी से एक सिपाही तक नहीं पहुंचा।
- तोड़फोड़ जैसी घटनाएं नहीं थमी तो गंभीर मरीजों का इलाज करने से डाक्टर कतराएंगे। पुलिस को भी चाहिए कि मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट का सख्ती से पालन कर तत्काल कार्रवाई करे।
डा. जेएन टंडन, अध्यक्ष आईएमए, आगरा
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फीरोजाबाद के आलमपुर गांव के काले के बेटे मुकुल को कई दिन से न्यूमोनिया था। हालत बिगड़ने पर उसे रवि हास्पिटल लाया गया। उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी। चार दिन के उपचार के बाद भी उसकी सुधार नहीं हुआ। बुधवार को हालत और बिगड़ गई। काले का आरोप है कि उन्होंने डाक्टर से बच्चे को रेफर करने के लिए कहा, लेकिन वह राजी नहीं हुआ।
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वह उसे जयपुर ले जाना चाहता था, लेकिन हास्पिटल के स्टाफ ने उसे डिस्चार्ज नहीं किया। कहते रहे कि वह यहीं ठीक हो जाएगा। दोपहर को दो बजे उसकी सांसें थम गईं। उसके उपचार में भी लापरवाही बरती गई।
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भर्ती मरीजों ने बताया कि काले पहले तो अपने मृत बच्चे को लेकर चुपचाल चला गया। लेकिन थोड़ी देर बाद महिलाओं समेत 20-25 लोगों के साथ पहुंचा। इन लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। कुर्सियां पलट दीं। पथराव किया, जिससे शीशे टूट गए। वहां भारी भीड़ जमा हो गई। इसके बाद इन लोगों ने हास्पिटल के सामने जाम लगा दिया। यहां वैसे भी दिन भर जाम की स्थिति रहती है। इसके बाद ट्रैफिक पुलिस आई तो वे लोग चले गए।
हास्पिटल की गलती नहीं
रवि हास्पिटल के प्रशासनिक प्रभारी सीपी शर्मा ने बताया कि लोग झूठा आरोप लगा रहे हैं। बच्चे की तबीयत बहुत नाजुक थी। उसे रेफर किया गया था, लेकिन कई बार कहने पर भी वे लोग उसे ले नहीं जा रहे थे। उसने उपचार के पैसे तक नहीं लिए गए। एक बार चले गए थे, लेकिन गांव के लोगों के आने पर तोड़फोड़ कर दी। उनके खिलाफ केस दर्ज कराया जाएगा।
नहीं पहुंची पुलिस
तोड़फोड़ शुरू होते ही हास्पिटल के कर्मचारियों ने 100 नंबर पर सूचना दी लेकिन एक घंटे बाद भी पुलिस नहीं पहुंची। ट्रैफिक जाम हो जाने के चलते पास से ट्रैफिक पुलिस पहुंच गई, लेकिन थाना और चौकी से एक सिपाही तक नहीं पहुंचा।
- तोड़फोड़ जैसी घटनाएं नहीं थमी तो गंभीर मरीजों का इलाज करने से डाक्टर कतराएंगे। पुलिस को भी चाहिए कि मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट का सख्ती से पालन कर तत्काल कार्रवाई करे।
डा. जेएन टंडन, अध्यक्ष आईएमए, आगरा