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बैंक अफसरों की सुरक्षा पर खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 23 Nov 2016 01:22 AM IST
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पब्लिक से बैंक अफसरों को अपनी सुरक्षा खतरे में दिख रही है।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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500 और 1000 रुपये के नोट बंद होने के 14 दिन बाद भी कैश की किल्लत और लंबी कतारों में कोई कमी नहीं आई है। बैंकों में हर दिन बिगड़ रहे हालातों और आपा खोती पब्लिक से बैंक अफसरों को अपनी सुरक्षा खतरे में दिख रही है। आल इंडिया बैंक आफिसर्स कन्फेडरेशन (आईबॉक) ने वित्तमंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर उनसे हर बैंक में सुरक्षा के पर्याप्त प्रबंध करने की मांग की है।
आईबॉक के महासचिव हरविंदर सिंह ने वित्तमंत्री के सामने नोटबंदी के बाद के हालातों का ब्योरा दिया है। उन्होंने कहा कि करेंसी चेस्ट में काम करने वाले बैंक अधिकारी और कर्मचारी कई दिनों से अपने घर नहीं जा पाए। पूरी रात जागकर काम कर रहे हैं। बैंक शाखाओं में जो कर्मचारी लगे हुए हैं, वह पब्लिक के भारी दबाव के बीच 12 से 16 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं। एटीएम के काम न करने और बैंकों को पर्याप्त कैश न उपलब्ध कराने से हालात और बिगड़ रहे हैं। कई कर्मचारी मानसिक तनाव, हृदय रोगों से जूझ रहे हैं और कुछ की मृत्यु की भी हो चुकी है।
काम के भारी दबाव और स्वास्थ्य कारणों के अलावा लोगों से कहासुनी, तकरार और अवांछित तत्वों की मौजूदगी से उनकी सुरक्षा को भी खतरा है। बैंकों में गेट तोड़ने, मारपीट, कर्मचारियों की पिटाई जैसी घटनाओं से बचने के लिए शाखाओं में सुरक्षा के उपाय करने की मांग की गई है।
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महिला कर्मचारियों ने ब्रांच से मांगा ट्रांसफर
14 दिनों से बैंकों में भारी भीड़ के बीच काउंटर पर कैश का लेन-देन कर रही महिला कर्मचारियों के सामने अजब मुश्किल है। लाइन में घंटों लगने के बाद ग्राहक गुस्से में गालियां तक दे रहे हैं। कई बार असहज स्थितियां भी बन रही हैं। ऐसे में सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों में 250 से ज्यादा महिला कर्मचारियों ने रीजनल आफिस में ट्रांसफर मांगा है। बरौली अहीर, ग्वालियर रोड, फतेहपुर सीकरी, धनौली, मलपुरा, फतेहाबाद, बाह, जगदीशपुरा, खंदौली, किरावली, टेढ़ी बगिया, शाहदरा आदि क्षेत्रों से सबसे ज्यादा काउंटर की महिला स्टाफ ने ट्रांसफर के लिए आवेदन किया है। बता दें कि बैंकों में 30 से 40 फीसदी तक महिला कर्मचारी हैं। इनमें अधिकांश नई नियुक्तियां हैं, जिन्हाेंने ग्राहकों की इतनी भीड़ और ऐसी समस्याओं का कभी सामना ही नहीं किया है।
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आईबॉक के महासचिव हरविंदर सिंह ने वित्तमंत्री के सामने नोटबंदी के बाद के हालातों का ब्योरा दिया है। उन्होंने कहा कि करेंसी चेस्ट में काम करने वाले बैंक अधिकारी और कर्मचारी कई दिनों से अपने घर नहीं जा पाए। पूरी रात जागकर काम कर रहे हैं। बैंक शाखाओं में जो कर्मचारी लगे हुए हैं, वह पब्लिक के भारी दबाव के बीच 12 से 16 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं। एटीएम के काम न करने और बैंकों को पर्याप्त कैश न उपलब्ध कराने से हालात और बिगड़ रहे हैं। कई कर्मचारी मानसिक तनाव, हृदय रोगों से जूझ रहे हैं और कुछ की मृत्यु की भी हो चुकी है।
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काम के भारी दबाव और स्वास्थ्य कारणों के अलावा लोगों से कहासुनी, तकरार और अवांछित तत्वों की मौजूदगी से उनकी सुरक्षा को भी खतरा है। बैंकों में गेट तोड़ने, मारपीट, कर्मचारियों की पिटाई जैसी घटनाओं से बचने के लिए शाखाओं में सुरक्षा के उपाय करने की मांग की गई है।
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महिला कर्मचारियों ने ब्रांच से मांगा ट्रांसफर
14 दिनों से बैंकों में भारी भीड़ के बीच काउंटर पर कैश का लेन-देन कर रही महिला कर्मचारियों के सामने अजब मुश्किल है। लाइन में घंटों लगने के बाद ग्राहक गुस्से में गालियां तक दे रहे हैं। कई बार असहज स्थितियां भी बन रही हैं। ऐसे में सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों में 250 से ज्यादा महिला कर्मचारियों ने रीजनल आफिस में ट्रांसफर मांगा है। बरौली अहीर, ग्वालियर रोड, फतेहपुर सीकरी, धनौली, मलपुरा, फतेहाबाद, बाह, जगदीशपुरा, खंदौली, किरावली, टेढ़ी बगिया, शाहदरा आदि क्षेत्रों से सबसे ज्यादा काउंटर की महिला स्टाफ ने ट्रांसफर के लिए आवेदन किया है। बता दें कि बैंकों में 30 से 40 फीसदी तक महिला कर्मचारी हैं। इनमें अधिकांश नई नियुक्तियां हैं, जिन्हाेंने ग्राहकों की इतनी भीड़ और ऐसी समस्याओं का कभी सामना ही नहीं किया है।