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बीएड 2013 की उत्तर पुस्तिकाएं सील
ब्यूरो, अमर उजाला अागरा
Updated Wed, 30 Sep 2015 01:36 AM IST
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बीएड 2012-13 सत्र फर्जीवाड़े मामले में डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। खंदारी स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (आईईटी) के दो कमरों में रखी उत्तरपुस्तिकाओं को सील कर दिया है। कुलसचिव के नेतृत्व में देर शाम टीम ने कार्रवाई की।
बता दें कि 2012-13 में बड़े पैमाने पर फर्जी अभ्यर्थियों के नंबर जनरेट कर दिए गए। अनुमान है कि करीब पांच हजार से अधिक फर्जी अभ्यर्थियों को मार्कशीट बांटी गईं। इसका खुलासा क्रिएटिव सोसाइटी के अधिवक्ता विजय यादव ने किया। साक्ष्य समेत रिपोर्ट राजभवन भी भेजी गई। राजभवन ने विश्वविद्यालय को अग्रिम कार्रवाई के निर्देश दिए। इसी कड़ी में देर शाम कुलसचिव केएन सिंह दल के साथ आईईटी पहुंचे, वहां दो कमरों में रखीं कापियां सील कर दीं। कुलसचिव केएन सिंह ने बताया कि कापियां सील कर दी हैं। टीम में डिप्टी रजिस्ट्रार महेंद्र सिंह, सहायक कुलसचिव रामव्रत सिंह, सेक्शन इंचार्ज जगवीर सिंह, प्रमोद अग्रवाल, अरविंद गुप्ता रहे।
रिजल्ट बिना जारी कर दी मार्कशीट
फर्जीवाड़े में प्रभारियों के नाम सामने आए हैं। इसमें एक सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जो निजी विश्वविद्यालय में कुलपति के रूप में तैनात हैं, दूसरे विश्वविद्यालय में एमएसडब्ल्यू के शिक्षक हैं। कहा जा रहा है कि इन्होंने रिजल्ट तैयार किए बिना ही कालेजों को मार्कशीट और डिग्री जारी करवा दीं। यहां तक कि रिजल्ट का एक्सल शीट भी विश्वविद्यालय को नहीं दिया गया। ये लोग उत्तरपुस्तिकाओं को हटाकर साक्ष्य मिटाने की तैयारी में थे।
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बता दें कि 2012-13 में बड़े पैमाने पर फर्जी अभ्यर्थियों के नंबर जनरेट कर दिए गए। अनुमान है कि करीब पांच हजार से अधिक फर्जी अभ्यर्थियों को मार्कशीट बांटी गईं। इसका खुलासा क्रिएटिव सोसाइटी के अधिवक्ता विजय यादव ने किया। साक्ष्य समेत रिपोर्ट राजभवन भी भेजी गई। राजभवन ने विश्वविद्यालय को अग्रिम कार्रवाई के निर्देश दिए। इसी कड़ी में देर शाम कुलसचिव केएन सिंह दल के साथ आईईटी पहुंचे, वहां दो कमरों में रखीं कापियां सील कर दीं। कुलसचिव केएन सिंह ने बताया कि कापियां सील कर दी हैं। टीम में डिप्टी रजिस्ट्रार महेंद्र सिंह, सहायक कुलसचिव रामव्रत सिंह, सेक्शन इंचार्ज जगवीर सिंह, प्रमोद अग्रवाल, अरविंद गुप्ता रहे।
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रिजल्ट बिना जारी कर दी मार्कशीट
फर्जीवाड़े में प्रभारियों के नाम सामने आए हैं। इसमें एक सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जो निजी विश्वविद्यालय में कुलपति के रूप में तैनात हैं, दूसरे विश्वविद्यालय में एमएसडब्ल्यू के शिक्षक हैं। कहा जा रहा है कि इन्होंने रिजल्ट तैयार किए बिना ही कालेजों को मार्कशीट और डिग्री जारी करवा दीं। यहां तक कि रिजल्ट का एक्सल शीट भी विश्वविद्यालय को नहीं दिया गया। ये लोग उत्तरपुस्तिकाओं को हटाकर साक्ष्य मिटाने की तैयारी में थे।
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